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Noida News: अगले वर्ष वजन घटाकर 75 किलो भारवर्ग में खेलेंगी मुक्केबाज नूपुर

Tue, 25 Nov 2025 01:22 AM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Tue, 25 Nov 2025 01:22 AM IST
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Boxer Nupur will reduce her weight and compete in the 75 kg category next year.
मुक्केबाज नूपुर श्योराण के साथ पिता संजय श्योराण व अन्य
भिवानी। ग्रेटर नोएडा में 16 से 20 नवंबर तक आयोजित विश्व मुक्केबाजी कप में स्वर्ण पदक जीतकर लौटी अंतरराष्ट्रीय मुक्केबाज नूपुर श्योराण का सोमवार को भिवानी पहुंचने पर रोहतक गेट स्थित जेजेएमबी अस्पताल में गर्मजोशी से स्वागत किया गया। नूपुर ने कहा कि वर्ष 2026 में होने वाले एशियन और कॉमनवेल्थ खेलों की तैयारी के लिए वह सबसे पहले वजन कम करेंगी और आगामी स्पर्धाओं में 75 किलोग्राम भारवर्ग में पूरी ताकत के साथ उतरेंगी।
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उन्होंने बताया कि हालिया विश्व मुक्केबाजी कप में उन्होंने 80 किलोग्राम से अधिक भारवर्ग में स्वर्ण पदक जीता। इससे पहले लीवरपुल में रजत और कजाकिस्तान में स्वर्ण पदक हासिल किया था। इस वर्ष वह दो स्वर्ण और एक रजत सहित तीन अंतरराष्ट्रीय पदक जीत चुकी हैं। नूपुर ने अपनी सफलता का श्रेय अपनी मां मुकेश श्योराण और पिता व कोच भीम अवॉर्डी संजय श्योराण को दिया।
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अकादमी अध्यक्ष डॉ. एलबी गुप्ता ने बताया कि नूपुर ने 2025 में तीन विश्व पदक दो स्वर्ण और एक रजत अपने नाम किए। वहीं अकादमी महासचिव प्रीतम दलाल ने बताया कि नूपुर अपने परिवार की तीसरी पीढ़ी की बॉक्सर हैं। इस मौके पर देवेंद्र, शंकर और अजीत ने नूपुर को बधाई दी।
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भारतीय नारी को सरकार का मिल रहा सहयोग : नूपुर

नूपुर श्योराण ने कहा कि हाल ही में भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने विश्व कप जीतकर देश का मान बढ़ाया है। इससे पहले लीवरपुल में आयोजित मुक्केबाजी चैंपियनशिप में भी चारों पदक महिलाओं ने जीते थे और ये चारों पदक हरियाणा की बेटियों के नाम रहे। मौजूदा विश्व मुक्केबाजी कप में भी महिला मुक्केबाजों का शानदार प्रदर्शन रहा। आज भारतीय नारी को सरकार से पूरा सहयोग मिल रहा है जिसके चलते वे लगातार आगे बढ़ रही हैं।



इंटर विश्वविद्यालय खेलों में हार के बाद चुना मुक्केबाजी को

नूपुर ने बताया कि सात वर्ष पहले उन्होंने इंटर कॉलेज से खेलना शुरू किया था। मगर इंटर विश्वविद्यालय खेलों में पहली बार मुक्केबाजी में हार मिली। उसी हार ने उनकी राह तय कर दी। घर लौटकर उन्होंने पिता से मुक्केबाजी के गुर सीखना शुरू किया। यही उनकी मुक्केबाजी यात्रा की शुरुआत थी। धीरे-धीरे पदक जीतने का सिलसिला शुरू हुआ और खेल के प्रति लगाव बढ़ता गया।




कैप्टन हवासिंह के लगाए वट वृक्ष का मिल रहा फल : संजय श्योराण

नूपुर के पिता और मुक्केबाजी प्रशिक्षक, भीम अवार्डी संजय श्योराण ने कहा कि वर्ष 1986 में कैप्टन हवासिंह ने भिवानी में मुक्केबाजी का जो वट वृक्ष लगाया था आज वह फल दे रहा है। इसी की बदौलत भिवानी को मिनी क्यूबा की पहचान मिली है। जिले के मुक्केबाज लगातार शानदार प्रदर्शन कर रहे हैं और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीत रहे हैं।
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