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Noida News: सियासी प्रस्ताव पेश कर भाजपा ने सत्ता पक्ष को घेरा
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प्रदेश कार्यकारिणी की बैठक में भ्रष्टाचार पर सरकार को घेरा
नेता प्रतिपक्ष ने रोजगार बजट को धोखा, शिक्षा मॉडल को फेल बताया
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। प्रदेश भाजपा की कार्यकारिणी की बैठक में शनिवार को नेता प्रतिपक्ष रामवीर सिंह बिधूड़ी ने राजनीतिक प्रस्ताव पेश किया। प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किया। प्रस्ताव में जहां दिल्ली सरकार के रोजगार बजट को धोखा बताया, वहीं शिक्षा माॅडल को फेल बताया। कहा कि सरकार की लचर व्यवस्था की वजह से गरीबों तक राशन नहीं पहुंच रहा है। दिल्ली वाले जहरीली हवा में सांस लेने व यमुना का जहरीला पानी पीने को मजबूर हैं। भ्रष्टाचार पर भी भाजपा ने आम आदमी पार्टी की सरकार को कठघरे में खड़ा किया।
प्रस्ताव पेश करने के दौरान विधूड़ी ने कहा कि भाजपा एमसीडी चुनावों को जीतने में सफल नहीं हो सकी लेकिन दिल्ली की जनता ने भाजपा को भरपूर समर्थन दिया। लगातार 15 साल शासन करने के बाद भी 2017 में हुए नगर निगम चुनावों की तुलना में भाजपा ने 3 प्रतिशत से भी ज्यादा मत हासिल किए। 2017 में भाजपा को 36.08 प्रतिशत वोट मिले थे जबकि 2022 के चुनावों में हमें 39.09 प्रतिशत मत प्राप्त हुए। यही नहीं, भाजपा ने पिछले विधानसभा चुनावों की तुलना में भी इस बार ज्यादा वोट प्राप्त किए। पिछले विधानसभा चुनावों में भाजपा का वोट प्रतिशत 38.5 था। दूसरी तरफ आम आदमी पार्टी ने पिछले विधानसभा चुनावों में 54 फीसदी वोट लिए थे जो नगर निगम चुनावों में गिरकर 42.5 फीसदी हो गए। यह आप सरकार की गिरती लोकप्रियता का एक प्रत्यक्ष प्रमाण है।
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राेजगार बजट पर सरकार को घेरा
राजनीतिक प्रस्ताव में भाजपा ने कहा कि पिछले साल सरकार ने रोजगार बजट पेश कर धोखा दिया है। पांच सालों में 20 लाख लोगों को रोजगार देने का वादा किया गया था। दिल्ली शॉपिंग फेस्टिवल के आयोजन के अलावा पांच मार्केट जिसमें कमला नगर, लाजपत नगर, खारी बावली, कीर्ति नगर और सरोजनी नगर के पुनर्विकास की योजना की बात थी। सभी हवा हवाई साबित हो गई।
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शिक्षा मॉडल पूरी तरह फेल
प्रस्ताव में कहा गया है कि जिस शिक्षा मॉडल को शो केस के रूप में आम आदमी पार्टी देश-विदेश में प्रचारित करती है, वह वास्तव में ढोल की पोल है। दिल्ली के सरकारी स्कूलों में बच्चों की संख्या लगातार कम हो रही है। बच्चों की उपस्थिति भी लगातार कम हो रही है। जितने बच्चे स्कूलों में रजिस्टर्ड हैं, उनमें से 40 फीसदी बच्चे तो स्कूलों में आते ही नहीं हैं। दूसरी तरफ 2013-14 में दिल्ली के पब्लिक स्कूलों में जाने वाले बच्चों की संख्या 31 फीसदी थी लेकिन 2019-20 के आंकड़े बताते हैं कि 43 फीसदी बच्चे पब्लिक स्कूलों में जा रहे हैं।
यमुना हुई और प्रदूषित
यमुना के बारे में प्रस्ताव में कहा गया है कि पिछले आठ साल में यमुना में सफाई होना तो दूर वह 200 फीसदी ज्यादा प्रदूषित हो गई है। जहरीले पानी की सप्लाई के कारण यमुना के आसपास की खेती भी पूरी तरह जहरीली हो चुकी है। वहां पैदा हुए अनाज और सब्जियां खाकर दिल्ली के लोग फेफड़ों, किडनी और लीवर की बीमारियों के शिकार हो रहे हैं। यमुना की सफाई के लिए केंद्र सरकार ने दिल्ली सरकार को 2500 करोड़ रुपए दिए हैं लेकिन दिल्ली सरकार उसका हिसाब नहीं दे रही। जाहिर है कि वह पैसा भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया है।
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गरीबों तक नहीं पहुंचा राशन
प्रस्ताव राशन योजना पर भी सवाल उठाता है। इसमें कहा गया है कि पिछले तीन महीनों से दिल्ली के 72 लाख 78 हजार राशन कार्ड धारकों को नवंबर महीने से राशन नहीं मिला। यह राशन गोदामों से ही नहीं उठाया गया। ‘वन नेशन वन कार्ड’ के तहत केंद्र सरकार द्वारा जारी किया गया अतिरिक्त राशन भी दिल्ली के उन गरीबों तक नहीं पहुंचा जो दूसरे राज्यों से आकर दिल्ली में रह रहे हैं।
सत्येंद्र जैन पर भी बोला हमला
प्रस्ताव में दिल्ली सरकार पर तंज कसा गया है कि राजनीति में नैतिक गिरावट की पराकाष्ठा हो चुकी है कि सत्येंद्र जैन न तो खुद इस्तीफा दे रहे हैं और न ही मुख्यमंत्री उन्हें हटा रहे हैं। वह मंत्री के रूप में पूरा वेतन और भत्ते भी ले रहे हैं। सत्येंद्र जैन 8 महीनों से जेल में हैं और वह वेतन और भत्तों सहित इन सारी सुविधाओं का भी लाभ उठा रहे हैं। विडंबना है कि मुख्यमंत्री बार-बार उस मंत्री को क्लीन चिट देकर और उसकी तुलना शहीद भगत सिंह से करते हुए उनकी शहादत का भी अपमान कर रहे हैं। जल बोर्ड में 57,598 करोड़ रुपयों का घोटाला हो चुका है जिसका सरकार कोई हिसाब नहीं दे रही। इसी तरह क्लास रूम घोटाला, बिजली सब्सिडी घोटाला, कंस्ट्रक्शन वर्कर्स का घपला, शराब माफिया को बचाने पर करोड़ों खर्च सरकार कर रही है।
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नेता प्रतिपक्ष ने रोजगार बजट को धोखा, शिक्षा मॉडल को फेल बताया
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। प्रदेश भाजपा की कार्यकारिणी की बैठक में शनिवार को नेता प्रतिपक्ष रामवीर सिंह बिधूड़ी ने राजनीतिक प्रस्ताव पेश किया। प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किया। प्रस्ताव में जहां दिल्ली सरकार के रोजगार बजट को धोखा बताया, वहीं शिक्षा माॅडल को फेल बताया। कहा कि सरकार की लचर व्यवस्था की वजह से गरीबों तक राशन नहीं पहुंच रहा है। दिल्ली वाले जहरीली हवा में सांस लेने व यमुना का जहरीला पानी पीने को मजबूर हैं। भ्रष्टाचार पर भी भाजपा ने आम आदमी पार्टी की सरकार को कठघरे में खड़ा किया।
प्रस्ताव पेश करने के दौरान विधूड़ी ने कहा कि भाजपा एमसीडी चुनावों को जीतने में सफल नहीं हो सकी लेकिन दिल्ली की जनता ने भाजपा को भरपूर समर्थन दिया। लगातार 15 साल शासन करने के बाद भी 2017 में हुए नगर निगम चुनावों की तुलना में भाजपा ने 3 प्रतिशत से भी ज्यादा मत हासिल किए। 2017 में भाजपा को 36.08 प्रतिशत वोट मिले थे जबकि 2022 के चुनावों में हमें 39.09 प्रतिशत मत प्राप्त हुए। यही नहीं, भाजपा ने पिछले विधानसभा चुनावों की तुलना में भी इस बार ज्यादा वोट प्राप्त किए। पिछले विधानसभा चुनावों में भाजपा का वोट प्रतिशत 38.5 था। दूसरी तरफ आम आदमी पार्टी ने पिछले विधानसभा चुनावों में 54 फीसदी वोट लिए थे जो नगर निगम चुनावों में गिरकर 42.5 फीसदी हो गए। यह आप सरकार की गिरती लोकप्रियता का एक प्रत्यक्ष प्रमाण है।
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राेजगार बजट पर सरकार को घेरा
राजनीतिक प्रस्ताव में भाजपा ने कहा कि पिछले साल सरकार ने रोजगार बजट पेश कर धोखा दिया है। पांच सालों में 20 लाख लोगों को रोजगार देने का वादा किया गया था। दिल्ली शॉपिंग फेस्टिवल के आयोजन के अलावा पांच मार्केट जिसमें कमला नगर, लाजपत नगर, खारी बावली, कीर्ति नगर और सरोजनी नगर के पुनर्विकास की योजना की बात थी। सभी हवा हवाई साबित हो गई।
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शिक्षा मॉडल पूरी तरह फेल
प्रस्ताव में कहा गया है कि जिस शिक्षा मॉडल को शो केस के रूप में आम आदमी पार्टी देश-विदेश में प्रचारित करती है, वह वास्तव में ढोल की पोल है। दिल्ली के सरकारी स्कूलों में बच्चों की संख्या लगातार कम हो रही है। बच्चों की उपस्थिति भी लगातार कम हो रही है। जितने बच्चे स्कूलों में रजिस्टर्ड हैं, उनमें से 40 फीसदी बच्चे तो स्कूलों में आते ही नहीं हैं। दूसरी तरफ 2013-14 में दिल्ली के पब्लिक स्कूलों में जाने वाले बच्चों की संख्या 31 फीसदी थी लेकिन 2019-20 के आंकड़े बताते हैं कि 43 फीसदी बच्चे पब्लिक स्कूलों में जा रहे हैं।
यमुना हुई और प्रदूषित
यमुना के बारे में प्रस्ताव में कहा गया है कि पिछले आठ साल में यमुना में सफाई होना तो दूर वह 200 फीसदी ज्यादा प्रदूषित हो गई है। जहरीले पानी की सप्लाई के कारण यमुना के आसपास की खेती भी पूरी तरह जहरीली हो चुकी है। वहां पैदा हुए अनाज और सब्जियां खाकर दिल्ली के लोग फेफड़ों, किडनी और लीवर की बीमारियों के शिकार हो रहे हैं। यमुना की सफाई के लिए केंद्र सरकार ने दिल्ली सरकार को 2500 करोड़ रुपए दिए हैं लेकिन दिल्ली सरकार उसका हिसाब नहीं दे रही। जाहिर है कि वह पैसा भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया है।
गरीबों तक नहीं पहुंचा राशन
प्रस्ताव राशन योजना पर भी सवाल उठाता है। इसमें कहा गया है कि पिछले तीन महीनों से दिल्ली के 72 लाख 78 हजार राशन कार्ड धारकों को नवंबर महीने से राशन नहीं मिला। यह राशन गोदामों से ही नहीं उठाया गया। ‘वन नेशन वन कार्ड’ के तहत केंद्र सरकार द्वारा जारी किया गया अतिरिक्त राशन भी दिल्ली के उन गरीबों तक नहीं पहुंचा जो दूसरे राज्यों से आकर दिल्ली में रह रहे हैं।
सत्येंद्र जैन पर भी बोला हमला
प्रस्ताव में दिल्ली सरकार पर तंज कसा गया है कि राजनीति में नैतिक गिरावट की पराकाष्ठा हो चुकी है कि सत्येंद्र जैन न तो खुद इस्तीफा दे रहे हैं और न ही मुख्यमंत्री उन्हें हटा रहे हैं। वह मंत्री के रूप में पूरा वेतन और भत्ते भी ले रहे हैं। सत्येंद्र जैन 8 महीनों से जेल में हैं और वह वेतन और भत्तों सहित इन सारी सुविधाओं का भी लाभ उठा रहे हैं। विडंबना है कि मुख्यमंत्री बार-बार उस मंत्री को क्लीन चिट देकर और उसकी तुलना शहीद भगत सिंह से करते हुए उनकी शहादत का भी अपमान कर रहे हैं। जल बोर्ड में 57,598 करोड़ रुपयों का घोटाला हो चुका है जिसका सरकार कोई हिसाब नहीं दे रही। इसी तरह क्लास रूम घोटाला, बिजली सब्सिडी घोटाला, कंस्ट्रक्शन वर्कर्स का घपला, शराब माफिया को बचाने पर करोड़ों खर्च सरकार कर रही है।