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Noida News: सिंदूर खेला के बाद मां दुर्गा को विदाई
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स्नेहा मौजूंदर
तान्या सिंह
ग्रेटर नोएडा। आनंदोधारा बंगाली कल्चरल एसोसिएशन की ओर से आयोजित शारदीय दुर्गोत्सव का समापन बुधवार को मां दुर्गा की विदाई के साथ हुआ। इससे पहले महिलाओं ने बंगाली रीति-रिवाज के अनुसार सिंदूर खेला में हिस्सा लिया। महिलाओं ने एक-दूसरे को सिंदूर लगाया। इस दौरान मून स्टार बैंक्वेट हॉल जयकारों और ढाक की थाप से गूंज उठा।
दुर्गा पूजा के अंतिम दिन महिलाओं ने मां दुर्गा को सिंदूर अर्पित कर परंपरा निभाई। उन्होंने एक-दूसरे को सिंदूर लगाकर सुख-समृद्धि और परिवार की खुशहाली की कामना की। ढाक की थाप और शंख ध्वनि के बीच महिलाओं ने त्योहार की खुशियां साझा कीं। बंगाली परंपरा में सिंदूर खेला का विशेष महत्व है। इसे सुहाग, सौभाग्य और आपसी प्रेम का प्रतीक माना जाता है। महिलाओं ने बताया कि यह परंपरा उन्हें एक-दूसरे के करीब लाने के साथ संस्कृति से जुड़ने का अवसर भी देती है।
सिंदूर खेला और पूजा-अर्चना के बाद मां दुर्गा की प्रतिमा के विसर्जन की प्रक्रिया शुरू हुई। जयकारों और ढाक की थाप के बीच विसर्जन यात्रा निकाली गई। बंगाली परंपरा में मां दुर्गा को बेटी के रूप में देखा जाता है। मान्यता है कि वे कुछ दिनों के लिए मायके आती हैं और फिर विदा हो जाती हैं। इसी भाव के साथ श्रद्धालुओं ने मां को अगले वर्ष फिर आने का न्योता दिया।
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सिंदूर खेला हमारे लिए केवल रस्म नहीं, बल्कि संस्कृति और परंपराओं को करीब से जानने का अवसर है। -रिया माझी
दुर्गा पूजा का इंतजार पूरे साल रहता है। सिंदूर खेला में सबको खुशियां बांटने का मौका मिलता है। -प्रियंका गुहू रॉय
सिंदूर खेला खूबसूरत परंपरा है। महिलाएं एक-दूसरे को सिंदूर लगाकर सुख-समृद्धि की कामना करती हैं। -मोमिता दास मुखर्जी
ऐसे आयोजनों से नई पीढ़ी को बंगाली संस्कृति और धार्मिक परंपराओं के बारे में जानने का मौका मिलता है। -स्नेहा मोजुनदार
मां दुर्गा की विदाई भावुक कर देती है। प्रार्थना करते हैं कि अगले साल फिर उनका स्वागत करने का अवसर मिले। -सोमेन मोजुनदार
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ग्रेटर नोएडा। आनंदोधारा बंगाली कल्चरल एसोसिएशन की ओर से आयोजित शारदीय दुर्गोत्सव का समापन बुधवार को मां दुर्गा की विदाई के साथ हुआ। इससे पहले महिलाओं ने बंगाली रीति-रिवाज के अनुसार सिंदूर खेला में हिस्सा लिया। महिलाओं ने एक-दूसरे को सिंदूर लगाया। इस दौरान मून स्टार बैंक्वेट हॉल जयकारों और ढाक की थाप से गूंज उठा।
दुर्गा पूजा के अंतिम दिन महिलाओं ने मां दुर्गा को सिंदूर अर्पित कर परंपरा निभाई। उन्होंने एक-दूसरे को सिंदूर लगाकर सुख-समृद्धि और परिवार की खुशहाली की कामना की। ढाक की थाप और शंख ध्वनि के बीच महिलाओं ने त्योहार की खुशियां साझा कीं। बंगाली परंपरा में सिंदूर खेला का विशेष महत्व है। इसे सुहाग, सौभाग्य और आपसी प्रेम का प्रतीक माना जाता है। महिलाओं ने बताया कि यह परंपरा उन्हें एक-दूसरे के करीब लाने के साथ संस्कृति से जुड़ने का अवसर भी देती है।
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सिंदूर खेला और पूजा-अर्चना के बाद मां दुर्गा की प्रतिमा के विसर्जन की प्रक्रिया शुरू हुई। जयकारों और ढाक की थाप के बीच विसर्जन यात्रा निकाली गई। बंगाली परंपरा में मां दुर्गा को बेटी के रूप में देखा जाता है। मान्यता है कि वे कुछ दिनों के लिए मायके आती हैं और फिर विदा हो जाती हैं। इसी भाव के साथ श्रद्धालुओं ने मां को अगले वर्ष फिर आने का न्योता दिया।
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सिंदूर खेला हमारे लिए केवल रस्म नहीं, बल्कि संस्कृति और परंपराओं को करीब से जानने का अवसर है। -रिया माझी
दुर्गा पूजा का इंतजार पूरे साल रहता है। सिंदूर खेला में सबको खुशियां बांटने का मौका मिलता है। -प्रियंका गुहू रॉय
सिंदूर खेला खूबसूरत परंपरा है। महिलाएं एक-दूसरे को सिंदूर लगाकर सुख-समृद्धि की कामना करती हैं। -मोमिता दास मुखर्जी
ऐसे आयोजनों से नई पीढ़ी को बंगाली संस्कृति और धार्मिक परंपराओं के बारे में जानने का मौका मिलता है। -स्नेहा मोजुनदार
मां दुर्गा की विदाई भावुक कर देती है। प्रार्थना करते हैं कि अगले साल फिर उनका स्वागत करने का अवसर मिले। -सोमेन मोजुनदार

स्नेहा मौजूंदर

स्नेहा मौजूंदर

स्नेहा मौजूंदर