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Noida News: प्रोजेक्ट पूरा होने के बाद बंद करना होगा बैंक अकाउंट
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प्रोजेक्ट पूरा होने के बाद बंद करना होगा बैंक अकाउंट
-यूपी रेरा ने सभी बिल्डरों को दिया आदेश, देनदारी भी करनी होगी खत्म
-अकाउंट बंद होने के बाद यूपी रेरा की वेबसाइट पर प्रोजेक्ट दिखेगा पूरा
-यूपी रेरा ने नियमों का पालन कराने को एसएलबीसी को भी लिखा पत्र
नवीन कुमार
ग्रेटर नोएडा। प्रदेश के बिल्डरों को पूर्णता प्रमाण पत्र मिलने के बाद उन्हें प्रोजेक्ट का बैंक अकाउंट बंद कराना होगा। इस संबंध में उत्तर प्रदेश भूसंपदा विनियामक प्राधिकरण ने सभी बिल्डरों को आदेश जारी किया है। बैंक अकाउंट बंद कराने से पहले सभी तरह की देनदारी खत्म करनी होगी। इसके बाद यूपी रेरा अपनी वेबसाइट पर प्रोजेक्ट को पूर्णता दर्शाएगा। ताकि खरीदारों को निवेश करने से पहले संबंधित प्रोजेक्ट के बारे में जानकारी मिल सके।
यूपी रेरा में इस समय 3360 प्रोजेक्ट पंजीकृत हैं। इनमें से करीब 1400 प्रोजेक्ट पूरे हो चुके हैं। प्रोजेक्ट पूरा होने के बाद बिल्डर से संबंधित प्राधिकरण से पूर्णता प्रमाण पत्र लेना जरूरी है। तभी प्रोजेक्ट को पूरा माना जाता है, लेकिन पूरा होने के बाद बिल्डर को प्रोजेक्ट का बैंक अकाउंट भी बंद कराना जरूरी है, लेकिन ज्यादातर बिल्डर ऐसा नहीं कर रहे हैं। जिस पर यूपी रेरा ने सार्वजनिक नोटिस जारी कर सभी बिल्डर को प्रोजेक्ट पूरा होने के बाद बैंक अकाउंट बंद करने का आदेश दिया है। अफसरों ने बताया कि बिल्डर लापरवाही बरत रहे हैं। उनको सख्त हिदायत दी गई है कि सभी देनदारी खत्म करने के बाद प्रोजेक्ट का अकाउंट बंद कर दें। इसकी सूचना यूपी रेरा को देनी होगी।-- -- -- -- -- -- -- --
बैंक खातों की शर्ताें का पालन कराए एसएलबीसी
प्रदेश के बिल्डर प्रोजेक्टों के बैंक अकाउंट की शर्तों का पालन नहीं कर रहे हैं। इस संबंध में यूपी रेरा ने राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति (एसएलबीसी) को पत्र लिखा है। जिसमें शर्तों का पालन कराने को कहा गया है। यूपी रेरा के अफसरों ने बताया कि प्रोजेक्ट के तीन बैंक अकाउंट (कलेक्शन, सेपरेट व ट्रांजेक्शन अकाउंट) खुलवाने का नियम है। कलेक्शन अकाउंट में पूरा पैसा आएगा। उसमें से 70 प्रतिशत धनराशि सेपरेट अकाउंट में जमा करना होगा। जो केवल निर्माण पर खर्च होगी। बाकी 30 प्रतिशत धनराशि में प्रोजेक्ट के अन्य खर्च पर वहन किया जा सकेगा, लेकिन बिल्डर इनका पालन नहीं कर रहे हैं। अफसरों ने बताया कि अब बिल्डर बैंक को लिखित रूप में अधिकृत करेंगे कि कलेक्शन अकाउंट में आने वाली धनराशि का 70 प्रतिशत हिस्सा सेपरेट अकाउंट में भेजेंगे। इसकी एक प्रतिलिपि पंजीकरण आवेदन के साथ यूपी रेरा में जमा करनी होगी। प्रोजेक्ट का पंजीकरण करने से पहले यूपी रेरा उस पत्र का बैंक के माध्यम से सत्यापन कराएगा। वित्तीय संस्थान और बैंक भी इसकी जानकारी यूपी रेरा को उपलब्ध कराएंगे। एसएलबीसी को बैंकों से नियमों का पालन कराने को कहा गया है।
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बिल्डरों को प्रोजेक्ट के बैंक अकाउंट से जुड़े नियमों का पालन करना होगा। इस संबंध में राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति को भी पत्र भेजा गया है। वहीं, प्रोजेक्ट पूरा होने के बाद बैंक अकाउंट बंद करना भी जरूरी है।
प्रमोद कुमार उपाध्याय, सचिव, यूपी रेरा
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-यूपी रेरा ने सभी बिल्डरों को दिया आदेश, देनदारी भी करनी होगी खत्म
-अकाउंट बंद होने के बाद यूपी रेरा की वेबसाइट पर प्रोजेक्ट दिखेगा पूरा
-यूपी रेरा ने नियमों का पालन कराने को एसएलबीसी को भी लिखा पत्र
नवीन कुमार
ग्रेटर नोएडा। प्रदेश के बिल्डरों को पूर्णता प्रमाण पत्र मिलने के बाद उन्हें प्रोजेक्ट का बैंक अकाउंट बंद कराना होगा। इस संबंध में उत्तर प्रदेश भूसंपदा विनियामक प्राधिकरण ने सभी बिल्डरों को आदेश जारी किया है। बैंक अकाउंट बंद कराने से पहले सभी तरह की देनदारी खत्म करनी होगी। इसके बाद यूपी रेरा अपनी वेबसाइट पर प्रोजेक्ट को पूर्णता दर्शाएगा। ताकि खरीदारों को निवेश करने से पहले संबंधित प्रोजेक्ट के बारे में जानकारी मिल सके।
यूपी रेरा में इस समय 3360 प्रोजेक्ट पंजीकृत हैं। इनमें से करीब 1400 प्रोजेक्ट पूरे हो चुके हैं। प्रोजेक्ट पूरा होने के बाद बिल्डर से संबंधित प्राधिकरण से पूर्णता प्रमाण पत्र लेना जरूरी है। तभी प्रोजेक्ट को पूरा माना जाता है, लेकिन पूरा होने के बाद बिल्डर को प्रोजेक्ट का बैंक अकाउंट भी बंद कराना जरूरी है, लेकिन ज्यादातर बिल्डर ऐसा नहीं कर रहे हैं। जिस पर यूपी रेरा ने सार्वजनिक नोटिस जारी कर सभी बिल्डर को प्रोजेक्ट पूरा होने के बाद बैंक अकाउंट बंद करने का आदेश दिया है। अफसरों ने बताया कि बिल्डर लापरवाही बरत रहे हैं। उनको सख्त हिदायत दी गई है कि सभी देनदारी खत्म करने के बाद प्रोजेक्ट का अकाउंट बंद कर दें। इसकी सूचना यूपी रेरा को देनी होगी।
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बैंक खातों की शर्ताें का पालन कराए एसएलबीसी
प्रदेश के बिल्डर प्रोजेक्टों के बैंक अकाउंट की शर्तों का पालन नहीं कर रहे हैं। इस संबंध में यूपी रेरा ने राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति (एसएलबीसी) को पत्र लिखा है। जिसमें शर्तों का पालन कराने को कहा गया है। यूपी रेरा के अफसरों ने बताया कि प्रोजेक्ट के तीन बैंक अकाउंट (कलेक्शन, सेपरेट व ट्रांजेक्शन अकाउंट) खुलवाने का नियम है। कलेक्शन अकाउंट में पूरा पैसा आएगा। उसमें से 70 प्रतिशत धनराशि सेपरेट अकाउंट में जमा करना होगा। जो केवल निर्माण पर खर्च होगी। बाकी 30 प्रतिशत धनराशि में प्रोजेक्ट के अन्य खर्च पर वहन किया जा सकेगा, लेकिन बिल्डर इनका पालन नहीं कर रहे हैं। अफसरों ने बताया कि अब बिल्डर बैंक को लिखित रूप में अधिकृत करेंगे कि कलेक्शन अकाउंट में आने वाली धनराशि का 70 प्रतिशत हिस्सा सेपरेट अकाउंट में भेजेंगे। इसकी एक प्रतिलिपि पंजीकरण आवेदन के साथ यूपी रेरा में जमा करनी होगी। प्रोजेक्ट का पंजीकरण करने से पहले यूपी रेरा उस पत्र का बैंक के माध्यम से सत्यापन कराएगा। वित्तीय संस्थान और बैंक भी इसकी जानकारी यूपी रेरा को उपलब्ध कराएंगे। एसएलबीसी को बैंकों से नियमों का पालन कराने को कहा गया है।
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बिल्डरों को प्रोजेक्ट के बैंक अकाउंट से जुड़े नियमों का पालन करना होगा। इस संबंध में राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति को भी पत्र भेजा गया है। वहीं, प्रोजेक्ट पूरा होने के बाद बैंक अकाउंट बंद करना भी जरूरी है।
प्रमोद कुमार उपाध्याय, सचिव, यूपी रेरा