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जनता की भावनाओं से खेलना बखूबी जानते हैं केजरीवाल : सीएम
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विधानसभा भवन को फांसी घर बताने के मामले में रेखा गुप्ता ने आप संयोजक को घेरा
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने आप संयोजक अरविंद केजरीवाल पर विधानसभा भवन को फांसी घर बताने के मामले में घेरा। विधानसभा में उन्होंने कहा कि केजरीवाल जनता की भावनाओं से खेलना बखूबी जानते हैं। उनके पास फाइनेंस, साइकोलॉजी और ड्रामा की डिग्री थी।
उन्होंने गरीबों का नेता बनने की पटकथा पहले ही लिख रखी थी। दो कमीजें, मफलर, पुरानी चप्पल व भूखे रहने तक सब कुछ जनता का लुभाने का सोचा-समझा ड्रामा था। जिस इमारत को केजरीवाल ने फांसी घर बताया वह 1912 में बना ऐतिहासिक विधान परिषद भवन है जहां देश के कानून बने और ब्रिटिश भारत की केंद्रीय विधायी परिषद की बैठकें हुईं। यह सब एक सुनियोजित साजिश थी, जिसके जरिये देशभक्ति और बलिदान के नाम पर सहानुभूति बटोरने का नाटक किया गया। फांसी घर की कल्पना महज एक सपना या स्क्रिप्ट का हिस्सा थी जिसका कोई ऐतिहासिक प्रमाण नहीं है। यह हरकत सिर्फ विधानसभा की गरिमा ही नहीं बल्कि शहीदों के बलिदान का भी अपमान है क्योंकि जिस भवन में संविधान, कानून और लोकतंत्र की नींव रखी गई, उसे झूठ और भ्रम का प्रतीक बना देना गंभीर अपराध है। शहीद भगत सिंह की तस्वीरों के साथ केजरीवाल ने अपनी तस्वीर लगाकर खुद को उनका उत्तराधिकारी बताने का हास्यास्पद प्रयास किया।
मुख्यमंत्री गुप्ता ने मांग की कि इस पूरे मामले की जांच कराई जाए। केजरीवाल के खिलाफ एफआईआर दर्ज हो और फांसी घर के प्रचार-प्रसार पर खर्च हुए रुपयों की वसूली की जाए। यह सिर्फ राजनीतिक विरोध का मामला नहीं बल्कि सांविधानिक संस्थानों की प्रतिष्ठा और इतिहास के साथ छेड़छाड़ का गंभीर अपराध है जिसकी सख्त जवाबदेही तय की जानी चाहिए।
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने आप संयोजक अरविंद केजरीवाल पर विधानसभा भवन को फांसी घर बताने के मामले में घेरा। विधानसभा में उन्होंने कहा कि केजरीवाल जनता की भावनाओं से खेलना बखूबी जानते हैं। उनके पास फाइनेंस, साइकोलॉजी और ड्रामा की डिग्री थी।
उन्होंने गरीबों का नेता बनने की पटकथा पहले ही लिख रखी थी। दो कमीजें, मफलर, पुरानी चप्पल व भूखे रहने तक सब कुछ जनता का लुभाने का सोचा-समझा ड्रामा था। जिस इमारत को केजरीवाल ने फांसी घर बताया वह 1912 में बना ऐतिहासिक विधान परिषद भवन है जहां देश के कानून बने और ब्रिटिश भारत की केंद्रीय विधायी परिषद की बैठकें हुईं। यह सब एक सुनियोजित साजिश थी, जिसके जरिये देशभक्ति और बलिदान के नाम पर सहानुभूति बटोरने का नाटक किया गया। फांसी घर की कल्पना महज एक सपना या स्क्रिप्ट का हिस्सा थी जिसका कोई ऐतिहासिक प्रमाण नहीं है। यह हरकत सिर्फ विधानसभा की गरिमा ही नहीं बल्कि शहीदों के बलिदान का भी अपमान है क्योंकि जिस भवन में संविधान, कानून और लोकतंत्र की नींव रखी गई, उसे झूठ और भ्रम का प्रतीक बना देना गंभीर अपराध है। शहीद भगत सिंह की तस्वीरों के साथ केजरीवाल ने अपनी तस्वीर लगाकर खुद को उनका उत्तराधिकारी बताने का हास्यास्पद प्रयास किया।
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मुख्यमंत्री गुप्ता ने मांग की कि इस पूरे मामले की जांच कराई जाए। केजरीवाल के खिलाफ एफआईआर दर्ज हो और फांसी घर के प्रचार-प्रसार पर खर्च हुए रुपयों की वसूली की जाए। यह सिर्फ राजनीतिक विरोध का मामला नहीं बल्कि सांविधानिक संस्थानों की प्रतिष्ठा और इतिहास के साथ छेड़छाड़ का गंभीर अपराध है जिसकी सख्त जवाबदेही तय की जानी चाहिए।
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