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Noida News: महिला मरीज से यौन शोषण के आरोपी स्वास्थ्यकर्मी को नहीं मिली अग्रिम राहत
सार
ग्रेटर नोएडा के भंगेल सीएचसी में महिला मरीज से यौन शोषण के आरोपी स्वास्थ्यकर्मी अमर चौधरी की अग्रिम जमानत याचिका कोर्ट ने खारिज कर दी। अदालत ने प्रथम दृष्टया उसकी संलिप्तता मानी है।
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विस्तार
(अदालत से)
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। सत्र न्यायालय ने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) भंगेल में महिला मरीज से यौन शोषण के मामले में आरोपी स्वास्थ्यकर्मी अमर चौधरी की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी। अदालत ने माना कि मामले में प्रथम दृष्टया आरोपी की संलिप्तता है। इस कारण अग्रिम राहत नहीं दी जा सकती है। मामला नोएडा फेस-2 थाना क्षेत्र में दर्ज है।
अभियोजन पक्ष का आरोप है कि पीड़िता 28 अगस्त को भंगेल सीएचसी में दोपहर करीब 12:30 बजे टीबी की दवा लेने के लिए गई थी। सभी मरीजों के जाने के बाद आरोपी पीड़िता को चेकअप के बहाने बाथरूम में ले गया। आरोपी ने पीड़िता को वहां बंद कर उसके कपड़े उतारने के बाद उसके साथ अश्लील हरकत की। जब पीड़िता ने विरोध किया तो उसे जान से मारने की धमकी दी गई।
वहीं आरोपी की ओर से दलील दी गई कि वह निर्दोष है। उसे झूठे मुकदमे में फंसाया गया है। एफआईआर दर्ज करने में देरी हुई है। जिसका कोई ठोस कारण नहीं है। घटना वाले दिन कमरे में कई अन्य मरीज मौजूद थे। ऐसे में बंद कमरे में ले जाकर शोषण करने का आरोप निराधार है। आरोपी का कोई आपराधिक इतिहास नहीं है। साक्ष्यों और बयानों के आधार पर अदालत ने माना कि गंभीर प्रकृति के अपराध में अभियुक्त की संलिप्तता से इंकार नहीं किया जा सकता। ऐसे में अभियुक्त को अग्रिम जमानत देने का कोई औचित्य नहीं है।
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माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। सत्र न्यायालय ने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) भंगेल में महिला मरीज से यौन शोषण के मामले में आरोपी स्वास्थ्यकर्मी अमर चौधरी की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी। अदालत ने माना कि मामले में प्रथम दृष्टया आरोपी की संलिप्तता है। इस कारण अग्रिम राहत नहीं दी जा सकती है। मामला नोएडा फेस-2 थाना क्षेत्र में दर्ज है।
अभियोजन पक्ष का आरोप है कि पीड़िता 28 अगस्त को भंगेल सीएचसी में दोपहर करीब 12:30 बजे टीबी की दवा लेने के लिए गई थी। सभी मरीजों के जाने के बाद आरोपी पीड़िता को चेकअप के बहाने बाथरूम में ले गया। आरोपी ने पीड़िता को वहां बंद कर उसके कपड़े उतारने के बाद उसके साथ अश्लील हरकत की। जब पीड़िता ने विरोध किया तो उसे जान से मारने की धमकी दी गई।
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वहीं आरोपी की ओर से दलील दी गई कि वह निर्दोष है। उसे झूठे मुकदमे में फंसाया गया है। एफआईआर दर्ज करने में देरी हुई है। जिसका कोई ठोस कारण नहीं है। घटना वाले दिन कमरे में कई अन्य मरीज मौजूद थे। ऐसे में बंद कमरे में ले जाकर शोषण करने का आरोप निराधार है। आरोपी का कोई आपराधिक इतिहास नहीं है। साक्ष्यों और बयानों के आधार पर अदालत ने माना कि गंभीर प्रकृति के अपराध में अभियुक्त की संलिप्तता से इंकार नहीं किया जा सकता। ऐसे में अभियुक्त को अग्रिम जमानत देने का कोई औचित्य नहीं है।
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