फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi NCR ›   Noida News ›   Ayodhya Decision appeasement politics farewell begins

अयोध्या फैसला : तुष्टीकरण के राजनीति का अंत शुरू

Mon, 11 Nov 2019 02:25 PM IST
Trainee Trainee न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Trainee Trainee Updated Mon, 11 Nov 2019 02:25 PM IST
विज्ञापन
Ayodhya Decision  appeasement politics farewell begins
सांकेतिक फोटो - फोटो : amar ujala

रामजन्मभूमि विवाद पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले से दशकों से चल रही मुस्लिम तुष्टीकरण की राजनीति की उल्टी गिनती भी शुरू हो गई। हिंदुत्व की राजनीति के धुर विरोधी दलों ने भी राम मंदिर के पक्ष में दिये गये फैसले का स्वागत किया। माकपा पोलित ब्यूरो ने भी बयान जारी कर सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत किया, जबकि फैसले से असमंजस में घिरीं ममता बनर्जी का अब तक बयान नहीं आया।

विज्ञापन


दरअसल, पिछली सदी के उत्तरार्ध में मुस्लिम तुष्टीकरण और हिंदुत्व की राजनीति का विरोध उफान पर था। तुष्टीकरण की राजनीति के कारण ही अस्सी के दशक में राजीव गांधी सरकार ने शाहबानो मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले को निष्प्रभावी किया था। हालांकि इसके बाद बाबरी मस्जिद का ताला खुलवाकर राजीव गांधी ने बहुसंख्यकों को भी खुश करने का दांव चला, लेकिन नब्बे के दशक में पार्टी फिर से मुस्लिम तुष्टीकरण की राजनीति करने लगी। परिणाम यह हुआ कि जिस हिंदू वोटों के लिए राजीव गांधी ने विवादित परिसर का ताला खोला, उसकी चाबी भाजपा के हाथ लग गई।
विज्ञापन


नब्बे के दशक में जब राम मंदिर आंदोलन उफान पर था तब भाजपा की हिंदुत्व की राजनीति के खिलाफ कांग्रेस समेत तमाम दलों ने मोर्चाबंदी कर दी। दूसरे दलों द्वारा की जा रही मुस्लिम तुष्टीकरण की राजनीति ने भाजपा के हिंदुत्व की राजनीति को खाद पानी देना शुरू किया। भाजपा को इसका अच्छा फल भी मिला और स्थापना के बाद 1984 के लोकसभा के पहले चुनाव में महज दो सीट और 8 फीसदी मत हासिल करने वाली पार्टी पहले सहयोगियों की बदौलत और तीन दशक बाद अपने दम पर बहुमत हासिल करने में कामयाब हो गई।
विज्ञापन
विज्ञापन


सीढ़ी दर सीढ़ी सत्ता के शिखर पर पहुंची भाजपा
1984 में महज दो सीट जीतने वाली भाजपा को 1989 में 86, फिर 161 सीट मिली। इसके बाद 1998 और 1999 में पार्टी को 182 सीटों की बदौलत 13 महीने और 5 साल तक केंद्र की सरकार चलाने का मौका मिला। वर्ष 2014 में पार्टी अपने दम पर बहुमत (282 सीटें) हासिल करने में कामयाब रही। फिर 2019 में 37 फीसदी वोट और 303 सीटें हासिल कर देश की राजनीति में छा गई। कभी ब्राह्मण बनिया और हिंदी पट्टी की पार्टी कही जाने वाली भाजपा एक समय अपने और सहयोगियों की बदौलत 22 राज्यों में शासन करने वाली पार्टी बन गई।

विशेषज्ञ की राय

शाहबानो मामले में सुप्रीम कोर्ट का फैसला पलटने और विवादित परिसर का ताला खुलवाने के बाद कांग्रेस के दुष्चक्र में फंसने का दावा करने वाली वरिष्ठ पत्रकार नीरजा चौधरी ने बताया कि इसका अंजाम यही होना था। कांग्रेस की तुष्टीकरण की राजनीति ने भाजपा के हिंदुत्व की राजनीति का पोषण किया। नब्बे के दशक में मंडल के दौर में हिंदुत्व की राजनीति मजबूत हुई और आगे इसे कोई चुनौती देने वाला नहीं बचा। तुष्टीकरण की राजनीति के खिलाफ समानांतर ध्रुवीकरण की राजनीति मजबूत होती चली गई। नतीजा है कि केंद्र के साथ-साथ ज्यादातर राज्यों में या तो भाजपा की सरकारें हैं या वह मुख्य विपक्ष की भूमिका में आ गई है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed