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प्राधिकरण के सभी विभाग देंगे सीएजी की आपत्तियों का जवाब
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सीएजी की आपत्तियों का जवाब देंगे प्राधिकरण के विभाग
नोएडा। नोएडा और ग्रेटर नोएडा का ऑडिट का काम सीएजी ने पूरा कर लिया है। सीएजी ने प्राथमिक रिपोर्ट दोनों प्राधिकरणों व शासन को सौंप दी है। अब प्राधिकरणों को सीएजी की आपत्तियों पर जवाब देना होगा। जवाब मिलने के बाद अंतिम रिपोर्ट बनेगी, जिसके आधार पर यह पता चल पाएगा कि कहां-कहां गड़बड़ियां हुई हैं।
प्राधिकरण की सीईओ रितु माहेश्वरी ने बताया कि प्राथमिक रिपोर्ट मिली है। कई विभागों के पुराने कार्यों पर सवाल उठाए गए हैं। अब प्राधिकरण के अलग-अलग विभागों से उन आपत्तियों पर जवाब मांगा जाएगा। जवाब के आधार पर अंतिम रिपोर्ट बनेगी, जो कि शासन के पास जाएगी। दरअसल इससे पहले प्राधिकरणों के ऑडिट का काम लोकल फंड ऑडिट के पास था। बाद में गड़बड़ियों की सूचना मिलने पर उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से सीएजी को ऑडिट के लिए लगाया गया। सीएजी ने वर्ष 2005 तक के कार्यों के ऑडिट का काम शुरू किया। जरूरत पड़ने पर सीएजी ने 2005 से पहले की फाइलें भी खंगालीं। बताया तो यह भी गया कि उन्होंने कुछ मामलों में प्राधिकरण की स्थापना के वर्ष 1976 तक की फाइलें मांगीं। बीच में कई बार सीएजी को यह भी आपत्ति रही कि प्राधिकरण की ओर से समय पर कोई सूचना या फाइलें मुहैया नहीं कराई जा रही हैं। इसके अलावा प्राधिकरण के लैंड डिपार्टमेंट सहित दूसरे अन्य विभागों में भी कई प्रकार की गड़बड़ियों की सूचना मिलती रहीं। बाद में शासन की ओर से भी काम जल्द पूरा करने का दबाव बनाया गया। इसके बाद प्राधिकरणों पर भी सहयोग करने का दबाव बनाया गया। तब जाकर यह रिपोर्ट सामने आई है।
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नोएडा। नोएडा और ग्रेटर नोएडा का ऑडिट का काम सीएजी ने पूरा कर लिया है। सीएजी ने प्राथमिक रिपोर्ट दोनों प्राधिकरणों व शासन को सौंप दी है। अब प्राधिकरणों को सीएजी की आपत्तियों पर जवाब देना होगा। जवाब मिलने के बाद अंतिम रिपोर्ट बनेगी, जिसके आधार पर यह पता चल पाएगा कि कहां-कहां गड़बड़ियां हुई हैं।
प्राधिकरण की सीईओ रितु माहेश्वरी ने बताया कि प्राथमिक रिपोर्ट मिली है। कई विभागों के पुराने कार्यों पर सवाल उठाए गए हैं। अब प्राधिकरण के अलग-अलग विभागों से उन आपत्तियों पर जवाब मांगा जाएगा। जवाब के आधार पर अंतिम रिपोर्ट बनेगी, जो कि शासन के पास जाएगी। दरअसल इससे पहले प्राधिकरणों के ऑडिट का काम लोकल फंड ऑडिट के पास था। बाद में गड़बड़ियों की सूचना मिलने पर उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से सीएजी को ऑडिट के लिए लगाया गया। सीएजी ने वर्ष 2005 तक के कार्यों के ऑडिट का काम शुरू किया। जरूरत पड़ने पर सीएजी ने 2005 से पहले की फाइलें भी खंगालीं। बताया तो यह भी गया कि उन्होंने कुछ मामलों में प्राधिकरण की स्थापना के वर्ष 1976 तक की फाइलें मांगीं। बीच में कई बार सीएजी को यह भी आपत्ति रही कि प्राधिकरण की ओर से समय पर कोई सूचना या फाइलें मुहैया नहीं कराई जा रही हैं। इसके अलावा प्राधिकरण के लैंड डिपार्टमेंट सहित दूसरे अन्य विभागों में भी कई प्रकार की गड़बड़ियों की सूचना मिलती रहीं। बाद में शासन की ओर से भी काम जल्द पूरा करने का दबाव बनाया गया। इसके बाद प्राधिकरणों पर भी सहयोग करने का दबाव बनाया गया। तब जाकर यह रिपोर्ट सामने आई है।
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