नोएडा। सेक्टर-28 के फ्लैट नं-250 में रहने वाले कर्नल अशोक कुमार तारा (अवकाशप्राप्त) वर्ष 1971 की जंग में दो जवानों के साथ शेख मुजीब-उर-रहमान के परिवार को बचाने ढाका गए थे। 29 वर्षीय अशोक तारा ढाका के धनमोंदी में मुजीब, उनकी बेटी शेख हसीना और परिवार के अन्य सदस्यों की बचाने में अपनी जान दांव पर लगा दी थी। इसके लिए उन्हें वर्ष 2012 में बांग्लादेश का सबसे बड़ा पुरस्कार फ्रेंड्स ऑफ लिबरेशन वॉर ऑनर्स मिल चुका है। अशोक तारा अशोक चक्र से भी सम्मानित हैं।
अशोक तारा ने बताया कि मुजीब-उर-रहमान के घर के बाहर पाकिस्तानी सेना के जवान मौजूद थे। जो कोई भी घर के पास जाने की कोशिश करता, वो फायरिंग करने लगते थे। ऐसे में तारा जवानों और हथियारों को छोड़कर आगे बढ़े। आगे बढ़ने पर पाकिस्तानी जवानों ने उन्हें रोकने के लिए गोली मारने की धमकी दी। तारा ने उन्हें बताया कि तुम्हारी सेना समर्पण कर चुकी है। जवानों को इस बात पर विश्वास नहीं हुआ। उन्होंने अपने वरिष्ठों से इसकी पुष्टि करने की बात कही। तब तक कर्नल तारा घर के गेट पर पहुंच चुके थे। करीब 25 मिनट तक अशोक तारा और पाक जवानों के बीच बात होती रही। इस बीच पाक सेना के कमांडर ने फायरिंग का आदेश दे दिया, लेकिन तारा अपने रास्ते से नहीं हटे। उन्होंने पाक जवानों से कहा कि अगर वह समर्पण कर देते हैं तो एक अधिकारी होने के नाते वह वादा करते हैं कि उन्हें हेडक्वार्टर तक ले जाएंगे, ताकि वो अपने घर पहुंच सकेें। इस पर जवानों ने समर्पण कर दिया।