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Noida News: केंद्र से कोविड से निपटने की तैयारियों पर मांगा जवाब
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-सैंपल कलेक्शन, सेंटर और परिवहन नीति के न्यूनतम मानक स्थापित करने में देरी पर जताई चिंता
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार से कोविड की अगली लहर की तैयारियों के संबंध में स्टेटस रिपोर्ट मांगा है। कोर्ट ने सैंपल कलेंक्शन, सैंपल सेंटर और परिवहन नीति के लिए न्यूनतम मानकों को स्थापित करने में देरी पर चिंता जताई। न्यायमूर्ति गिरीश कठपालिया ने कहा कि हालांकि यह विश्वास है कि आवश्यक कदम और प्रोटोकॉल लागू हैं, लेकिन इन्हें आधिकारिक तौर पर रिकॉर्ड में लाया जाना चाहिए। मामले की अगली सुनवाई 18 जुलाई को होगी।
कोर्ट ने 28 मई के अपने आदेश में कहा कि कोविड-19 की अगली महामारी अभी खत्म नहीं हुई है और समुदाय में सक्रिय है। ऐसे में 30 मई 2023 की बैठक के बाद उठाए गए कदमों में किसी भी कमी को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। कोर्ट ने केंद्र से तत्काल मानक संचालन प्रक्रियाओं (एसओपी) को अंतिम रूप देने और लागू करने की मांग की। यह मामला डॉ. रोहित जैन द्वारा दायर एक अवमानना याचिका पर सुनवाई के दौरान सामने आया, जिसमें उन्होंने 27 जनवरी 2023 के हाई कोर्ट के एक आदेश का पालन न करने का आरोप लगाया था। उस आदेश में केंद्र को जैन की याचिका को एक प्रतिनिधित्व के रूप में मानकर 12 सप्ताह में तर्कसंगत निर्णय लेने का निर्देश दिया गया था। जैन ने दावा किया कि आदेश के बावजूद, सैंपल कलेक्शन, सैंपल सेंटर और परिवहन के लिए न्यूनतम मानकों पर कोई दिशानिर्देश तैयार नहीं किए गए। कोर्ट ने केंद्र की स्थायी वकील मोनिका अरोड़ा को निर्देश दिया कि वे संबंधित अधिकारियों को कोर्ट के आदेशों से अवगत कराएं और छह सप्ताह के भीतर एक स्थिति रिपोर्ट पेश करें।
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार से कोविड की अगली लहर की तैयारियों के संबंध में स्टेटस रिपोर्ट मांगा है। कोर्ट ने सैंपल कलेंक्शन, सैंपल सेंटर और परिवहन नीति के लिए न्यूनतम मानकों को स्थापित करने में देरी पर चिंता जताई। न्यायमूर्ति गिरीश कठपालिया ने कहा कि हालांकि यह विश्वास है कि आवश्यक कदम और प्रोटोकॉल लागू हैं, लेकिन इन्हें आधिकारिक तौर पर रिकॉर्ड में लाया जाना चाहिए। मामले की अगली सुनवाई 18 जुलाई को होगी।
कोर्ट ने 28 मई के अपने आदेश में कहा कि कोविड-19 की अगली महामारी अभी खत्म नहीं हुई है और समुदाय में सक्रिय है। ऐसे में 30 मई 2023 की बैठक के बाद उठाए गए कदमों में किसी भी कमी को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। कोर्ट ने केंद्र से तत्काल मानक संचालन प्रक्रियाओं (एसओपी) को अंतिम रूप देने और लागू करने की मांग की। यह मामला डॉ. रोहित जैन द्वारा दायर एक अवमानना याचिका पर सुनवाई के दौरान सामने आया, जिसमें उन्होंने 27 जनवरी 2023 के हाई कोर्ट के एक आदेश का पालन न करने का आरोप लगाया था। उस आदेश में केंद्र को जैन की याचिका को एक प्रतिनिधित्व के रूप में मानकर 12 सप्ताह में तर्कसंगत निर्णय लेने का निर्देश दिया गया था। जैन ने दावा किया कि आदेश के बावजूद, सैंपल कलेक्शन, सैंपल सेंटर और परिवहन के लिए न्यूनतम मानकों पर कोई दिशानिर्देश तैयार नहीं किए गए। कोर्ट ने केंद्र की स्थायी वकील मोनिका अरोड़ा को निर्देश दिया कि वे संबंधित अधिकारियों को कोर्ट के आदेशों से अवगत कराएं और छह सप्ताह के भीतर एक स्थिति रिपोर्ट पेश करें।
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