भीषण गर्मी में भी सिर ठंडा रखेगा हेलमेट: एमिटी के शोधकर्ताओं ने बनाया, बाइक चालक और ट्रैफिक पुलिस को होगी राहत
शहर में पिछले साल हीट स्ट्रोक के कई मामले सामने आए थे। हालांकि इस साल शहरवासियों को इस गर्मी से डरने की जरूरत नही है, क्योंकि सेक्टर 125 स्थित एमिटी के शोधकर्ताओं के समूह ने ऐसे हेलमेट को तैयार किया है, जो भीषण गर्मी से आम लोगों को राहत देंगे।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
भीषण गर्मी के कहर का शिकार बनने वाले दोपहिया वाहन चालक व ट्रैफिक पुलिसकर्मी अब आराम से अपने कामकाज व ड्यूटी कर सकेंगे। एमिटी के शोधकर्ताओं ने इनके दृष्टिगत एक विशेष हेलमेट तैयार किया है। पीसीएम पद्धति से तैयार इस हेलमेट में मौजूद विशेष दृव्य भीषण गर्मी में भी चालक के सिर को ठंडा रखेंगे। हीट स्ट्रोक के खतरे को भी कई गुना घटा देंगे।
शहर में पिछले साल भीषण गर्मी पड़ी थी। स्थिति इतनी गंभीर रही कि लोगों का बाहर निकलता तक भी मुश्किल हो गया था। हीट स्ट्रोक के भी कई मामले सामने आए थे। हालांकि इस साल शहरवासियों को इस गर्मी से डरने की जरूरत नही है, क्योंकि सेक्टर 125 स्थित एमिटी के शोधकर्ताओं के समूह ने ऐसे हेलमेट को तैयार किया है, जो भीषण गर्मी से आम लोगों को राहत देंगे। शोधकर्ताओं के समूह के प्रमुख व एडवांस रिसर्च एंड स्टडीज इंस्टीट्यूट विभाग के प्रमुख प्रोफेसर वीके जैन ने बताया कि उन्होंने पीसीएम पद्धति के माध्यम से ऐसा पदार्थ तैयार किया है, जिसे हेलमेट में लगाने पर इस भीषण गर्मी के प्रभाव को काफी हद तक कम किया जा सकता है। आमतौर पर गर्मियों के दिनों में 40-45 डिग्री सेल्सियस या कुछ स्थानों पर तो उससे भी अधिक तक पहुंच जाता है।
ऐसे में इसका उपयोग कर हेलमेट के तापमान को मनुष्य के औसत तापमान से भी कम कर देगा। इस द्रव्य को छोटे छोटे पैकेट में इकट्ठा किया गया है। इसमें ऐसे तत्वों का प्रयोग किया है जो अपने रासायनिक गुणों से भरपूर हैं। यह एक प्रकार का द्रव्य है, जो कि लगातार दो घंटे तक कार्य करेगा। हालांकि इसे दो घंटे बाद हेलमेट से निकालकर इसे यदि पांच मिनट के लिए छांव पर रखा जाए तो यह पुन: उपयोग में लाया जा सकता है।
कम लागत वाला और टिकाऊ है यह तरीका
शोधकर्ताओं का दावा है कि इसमें न तो किसी भी तरह की इलेक्ट्रानिक वस्तु का उपयोग किया गया और न ही हेलमेट के भार को बढ़ाया गया है। हालांकि अभी तक जो तरीके हेलमेट को ठंडा रखने के अपनाए गए, उनमें बैटरी, तारों और अन्य इलेक्ट्रिक वस्तुओं का उपयोग किया गया है, जो अत्यधिक धूप से उत्पन्न होने वाली भीषण गर्मी के दौरान अप्रिय घटना को भी अंजाम दे सकता है। साथ ही वह आमतौर पर महंगे भी होते हैं। लेकिन उनके द्वारा जिस द्रव्य को तैयार किया गया है, वह बड़ी आसानी से हेलमेट में फीड होने के साथ साथ इलेक्ट्रिक उपकरणों से रहित और किफायती भी है। इसे आम व्यक्ति भी आसानी से खरीद सकता है।
मार्केट में लाने के लिए चल रही तैयारी
शोधकर्ताओं ने बताया कि इस विशेष हेलमेट को मार्केट में उतारने की तैयारी की जा रही है। इसके लिए लगातार निजी कंपनियों व सरकारी अफसरों से बातचीत जारी है। जल्द ही उन निजी कंपनियों से मिले फंड के बाद बड़े स्तर पर इसे तैयार कराकर मार्केट में लाया जा सकता है। उनका कहना है कि उनके द्वारा तैयार हेलमेट का मूल्य आम तौर पर हेलमेट के मूल्य के इर्द-गिर्द ही रहेगा।
शोधकर्ताओं के समूह ने भीषण गर्मी में बाहर निकलकर कड़ी धूप में अपनी सेवाएं देने वाले लोगों को राहत देने के लिए पीसीएम तकनीक से ऐसे द्रव्य को तैयार किया है, जिसे हेलमेट में रखकर लोग गर्मी से बचाव के साथ राहत महसूस कर सकेंगे।
-प्रोफेसर वीके जैन, वरिष्ठ वैज्ञानिक, एमिटी विश्वविद्यालय
Shahjahanpur News: यातायात पुलिसकर्मी एसी हेलमेट लगाकर करेंगे ड्यूटी, गर्मी से बचाव के लिए नई पहल