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Noida News: तथ्य छिपाकर किए थे सुपरटेक-सनवर्ल्ड के आवंटन रद्द, होगी कार्रवाई
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हाईकोर्ट में मामला लंबित होने के बावजूद यमुना प्राधिकरण की 26 जून की बोर्ड बैठक में लिया गया था निर्णय
लापरवाही बरतने वाले विधि अधिकारी, महाप्रबंधक बिल्डर, सह प्रबंधक सहित कई पर विभागीय कार्रवाई की तैयारी
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1493 करोड़ रुपये दोनों बिल्डरों पर बकाया हैं
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा।
यमुना प्राधिकरण (यीडा) के विधि और बिल्डर विभाग की लापरवाही ने बोर्ड बैठक में लिए गए निर्णय की किरकिरी करा दी है। मैसर्स सुपरटेक और मैसर्स सनवर्ल्ड के आवंटन रद्द करने के बोर्ड बैठक के फैसले पर मंगलवार को बिल्डरों ने सीईओ को पत्र भेजकर अपना दावा प्रस्तुत किया। मामले की जांच की गई तो अफसरों के पैरों तले जमीन खिसक गई। हाईकोर्ट में मामला लंबित होने के बावजूद आवंटन रद्द करने के प्रस्ताव पर मुहर लगा दी गई थी। अब आनन-फानन में बोर्ड बैठक के मिनट्स में संशोधन कराया जा रहा है। साथ ही, इस मामले में लापरवाही बरतने वाले विधि अधिकारी, महाप्रबंधक बिल्डर, सह प्रबंधक सहित कई अन्य अधिकारियों पर विभागीय कार्रवाई की तैयारी है।
दरअसल, मैसर्स सुपरटेक और मैसर्स सनवर्ल्ड बिल्डरों पर प्राधिकरण के 1493 करोड़ रुपये बकाया हैं। 26 जून को यीडा की बोर्ड बैठक में हाईकोर्ट में मामला लंबित होने के तथ्य को छिपाकर दोनों बिल्डरों के जमीन आवंटन को रद्द करने का प्रस्ताव रखा गया था। प्रमुख सचिव औद्योगिक विकास अरुण सागर की अध्यक्षता में हुई बोर्ड ने आंवटन रद्द करने की संस्तुति भी कर दी थी। यीडा क्षेत्र के सेक्टर-22डी में मैसर्स सुपरटेक और मैसर्स सनवर्ल्ड इंफ्रास्ट्रक्चर को टाउनशिप विकसित करने के लिए 100-100 एकड़ जमीन आवंटित की गई है। दोनों बिल्डरों ने अभी तक परियोजना को पूरा नहीं किया है। इसमें सनवर्ल्ड ने मौके पर काम ही नहीं किया है और सुपरटेक टाउनशिप में कुछ लोग रहने लगे हैं। सुपरटेक में 3200 और सनवर्ल्ड में 1400 खरीदार हैं। सुपरटेक पर 677 करोड़ रुपये और सनवर्ल्ड इंफ्रास्ट्रक्चर पर 816 करोड़ रुपये बकाया हैं। विभाग की ओर से बकाया जमा करने के लिए बार-बार नोटिस देने के बाद भी बिल्डरों ने पैसे जमा नहीं किए। वहीं, बिल्डर-खरीदारों की समस्याओं के निस्तारण के लिए गठित अमिताभ कांत कमेटी की सिफारिशों का लाभ लेने के लिए भी दोनों बिल्डर आगे नहीं आए। इस पर प्राधिकरण ने कार्रवाई की तैयारी शुरू की।
बिना फाइल की जांच कर बोर्ड के लिए प्रस्ताव दिया
बोर्ड बैठक के लिए सभी विभागों से अहम प्रस्ताव मांगे गए थे। इसमें बिल्डर विभाग ने बिना फाइल की जांच किए ही आवंटन निरस्त करने से संबंधित प्रस्ताव को बोर्ड बैठक में शामिल करा दिया। प्राधिकरण के लॉ व बिल्डर विभाग ने अधिकारियों का बताया था कि इनका कोर्ट में कोई विवाद नहीं है। इस पर बोर्ड बैठक ने दोनों बिल्डरों के आवंटन निरस्त करने की संस्तुति प्रदान कर दी। हालांकि, आवंटन निरस्त की कार्रवाई में खरीदारों के हितों का ध्यान रखा गया था। यही कारण है कि आवासीय हिस्से को छोड़ दिया गया था।
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हाईकोर्ट के साथ ही शासन में भी चल रही सुनवाई
आवंटन निरस्त होने की सूचना पर बिल्डरों ने पक्ष रखा और बताया कि मामला हाईकोर्ट में विचाराधीन है। ऐसे में कार्रवाई नहीं की जा सकती। साथ ही, न्यायालय के ही आदेश पर शासन में भी सुनवाई चल रही है। यमुना प्राधिकरण के सीईओ डॉ़ अरुणवीर सिंह ने लॉ फर्म से राय ली तो मामला सही पाया गया। नियमानुसार कोर्ट में मामला लंबित होने पर आवंटन निरस्त की कार्रवाई नहीं की जा सकती है। अदालत ने भी कहा कि सुनवाई के दौरान कार्रवाई नहीं हो सकती। इस पर संज्ञान लेते हुए सीईओ ने विभागीय जांच के आदेश दिए हैं।
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गलत तथ्यों और हाईकोर्ट में मामला विचाराधीन होने के बावजूद सुपरटेक और सनवर्ल्ड बिल्डर के आवंटन निरस्त करने का प्रस्ताव बोर्ड में शामिल किया गया। इस पूरी प्रक्रिया में लॉ और बिल्डर विभाग की बड़ी लापरवाही सामने आई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए विभागीय जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई होगी। - डॉ़ अरुणवीर सिंह, सीईओ, यीडा
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लापरवाही बरतने वाले विधि अधिकारी, महाप्रबंधक बिल्डर, सह प्रबंधक सहित कई पर विभागीय कार्रवाई की तैयारी
1493 करोड़ रुपये दोनों बिल्डरों पर बकाया हैं
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा।
यमुना प्राधिकरण (यीडा) के विधि और बिल्डर विभाग की लापरवाही ने बोर्ड बैठक में लिए गए निर्णय की किरकिरी करा दी है। मैसर्स सुपरटेक और मैसर्स सनवर्ल्ड के आवंटन रद्द करने के बोर्ड बैठक के फैसले पर मंगलवार को बिल्डरों ने सीईओ को पत्र भेजकर अपना दावा प्रस्तुत किया। मामले की जांच की गई तो अफसरों के पैरों तले जमीन खिसक गई। हाईकोर्ट में मामला लंबित होने के बावजूद आवंटन रद्द करने के प्रस्ताव पर मुहर लगा दी गई थी। अब आनन-फानन में बोर्ड बैठक के मिनट्स में संशोधन कराया जा रहा है। साथ ही, इस मामले में लापरवाही बरतने वाले विधि अधिकारी, महाप्रबंधक बिल्डर, सह प्रबंधक सहित कई अन्य अधिकारियों पर विभागीय कार्रवाई की तैयारी है।
दरअसल, मैसर्स सुपरटेक और मैसर्स सनवर्ल्ड बिल्डरों पर प्राधिकरण के 1493 करोड़ रुपये बकाया हैं। 26 जून को यीडा की बोर्ड बैठक में हाईकोर्ट में मामला लंबित होने के तथ्य को छिपाकर दोनों बिल्डरों के जमीन आवंटन को रद्द करने का प्रस्ताव रखा गया था। प्रमुख सचिव औद्योगिक विकास अरुण सागर की अध्यक्षता में हुई बोर्ड ने आंवटन रद्द करने की संस्तुति भी कर दी थी। यीडा क्षेत्र के सेक्टर-22डी में मैसर्स सुपरटेक और मैसर्स सनवर्ल्ड इंफ्रास्ट्रक्चर को टाउनशिप विकसित करने के लिए 100-100 एकड़ जमीन आवंटित की गई है। दोनों बिल्डरों ने अभी तक परियोजना को पूरा नहीं किया है। इसमें सनवर्ल्ड ने मौके पर काम ही नहीं किया है और सुपरटेक टाउनशिप में कुछ लोग रहने लगे हैं। सुपरटेक में 3200 और सनवर्ल्ड में 1400 खरीदार हैं। सुपरटेक पर 677 करोड़ रुपये और सनवर्ल्ड इंफ्रास्ट्रक्चर पर 816 करोड़ रुपये बकाया हैं। विभाग की ओर से बकाया जमा करने के लिए बार-बार नोटिस देने के बाद भी बिल्डरों ने पैसे जमा नहीं किए। वहीं, बिल्डर-खरीदारों की समस्याओं के निस्तारण के लिए गठित अमिताभ कांत कमेटी की सिफारिशों का लाभ लेने के लिए भी दोनों बिल्डर आगे नहीं आए। इस पर प्राधिकरण ने कार्रवाई की तैयारी शुरू की।
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बिना फाइल की जांच कर बोर्ड के लिए प्रस्ताव दिया
बोर्ड बैठक के लिए सभी विभागों से अहम प्रस्ताव मांगे गए थे। इसमें बिल्डर विभाग ने बिना फाइल की जांच किए ही आवंटन निरस्त करने से संबंधित प्रस्ताव को बोर्ड बैठक में शामिल करा दिया। प्राधिकरण के लॉ व बिल्डर विभाग ने अधिकारियों का बताया था कि इनका कोर्ट में कोई विवाद नहीं है। इस पर बोर्ड बैठक ने दोनों बिल्डरों के आवंटन निरस्त करने की संस्तुति प्रदान कर दी। हालांकि, आवंटन निरस्त की कार्रवाई में खरीदारों के हितों का ध्यान रखा गया था। यही कारण है कि आवासीय हिस्से को छोड़ दिया गया था।
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हाईकोर्ट के साथ ही शासन में भी चल रही सुनवाई
आवंटन निरस्त होने की सूचना पर बिल्डरों ने पक्ष रखा और बताया कि मामला हाईकोर्ट में विचाराधीन है। ऐसे में कार्रवाई नहीं की जा सकती। साथ ही, न्यायालय के ही आदेश पर शासन में भी सुनवाई चल रही है। यमुना प्राधिकरण के सीईओ डॉ़ अरुणवीर सिंह ने लॉ फर्म से राय ली तो मामला सही पाया गया। नियमानुसार कोर्ट में मामला लंबित होने पर आवंटन निरस्त की कार्रवाई नहीं की जा सकती है। अदालत ने भी कहा कि सुनवाई के दौरान कार्रवाई नहीं हो सकती। इस पर संज्ञान लेते हुए सीईओ ने विभागीय जांच के आदेश दिए हैं।
गलत तथ्यों और हाईकोर्ट में मामला विचाराधीन होने के बावजूद सुपरटेक और सनवर्ल्ड बिल्डर के आवंटन निरस्त करने का प्रस्ताव बोर्ड में शामिल किया गया। इस पूरी प्रक्रिया में लॉ और बिल्डर विभाग की बड़ी लापरवाही सामने आई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए विभागीय जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई होगी। - डॉ़ अरुणवीर सिंह, सीईओ, यीडा