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18 हजार वर्ग मीटर भूखंड का आवंटन निरस्त, 13 बिल्डर रडार पर
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ग्रेटर नोएडा। एसोटेक इंफ्रास्ट्रक्चर पर बड़ी कार्रवाई करते हुए ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने 18 हजार वर्गमीटर भूखंड का आवंटन निरस्त कर दिया है। बिल्डर ने 15 साल बाद भी निर्माण करना तो दूर ग्रुप हाउसिंग प्रोजेक्ट का नक्शा तक पास नहीं कराया। इस कार्रवाई के बाद परियोजनाओं में देरी करने वाले बिल्डरों में अफरातफरी का माहौल बन गया है। वहीं, ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने ऐसे 13 बिल्डरों की सूची तैयार की है। इन पर भी कार्रवाई की तलवार लटक गई है।
ग्रुप हाउसिंग विभाग के ओएसडी सौम्य श्रीवास्तव ने बताया कि बीआरएस छह स्कीम के जरिये साल 2006 में एसोटेक इंफ्रास्ट्रक्चर को सेक्टर पाई में 18,141 वर्ग मीटर के भूखंड संख्या सात का आवंटन किया गया था। बिल्डर ने उसी साल लीज डीड कराकर आवंटित भूखंड को अपने कब्जे में ले लिया था। प्राधिकरण ने बिल्डर को छह साल में निर्माण कार्य पूरा कर अधिभोग प्रमाणपत्र लेने का समय दिया था। तय समयसीमा में बिल्डर ने निर्माण कार्य पूरा नहीं किया और नक्शा भी पास नहीं कराया। इसके अलावा बिल्डर ने समय वृद्धि के लिए भी आवेदन नहीं किया। इसे देखते हुए प्राधिकरण ने भू-आवंटन को निरस्त कर दिया है। ओएसडी ने बताया कि लीजडीड कराने के 15 वर्ष बाद किसी तरह की रियायत देने का प्रावधान नहीं है। बिल्डर को अधिभोग प्रमाणपत्र लेना जरूरी था, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। अब इस जमीन को नए सिरे से योजना लाकर आवंटित किया जाएगा। भूखंड की एवज में जमा राशि का 25 फीसदी जब्त कर बाकी बिल्डर को लौटाई जाएगी।
बुकिंग कराने वाले निवेशकों की भी नहीं दी जानकारी
प्राधिकरण के अधिकारियों ने बताया कि बिल्डर ने ग्रुप हाउसिंग परियोजना का न तो नक्शा पास कराया और न ही निर्माण शुरू कराया। ऐसे में फ्लैटों की बुकिंग की संभावना नहीं है। हालांकि, इस संबंध में बिल्डर से कई बार जानकारी मांगी गई लेकिन बिल्डर ने कोई जवाब नहीं दिया। अगर बुकिंग कराने वाला कोई निवेशक सामने आता है तो शिकायत के आधार पर जांच कर उसका पैसा वापस कराया जाएगा।
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बिल्डर को नुकसान, प्राधिकरण को फायदा
आवंटन रद्द होने से बिल्डर को नुकसान होगा। वहीं, ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण को अरबों रुपये का फायदा होगा। चूंकि जब बिल्डर को जमीन आवंटित हुई थी तब अब आवंटन दर कम थी। अब आवंटन दर काफी बढ़ गई है। ई-नीलामी के माध्यम से दोबारा आवंटन होगा।
मंत्री के आने से पहले बड़ी कार्रवाई
औद्योगिक विकास मंत्री नंद गोपाल गुप्ता नंदी सोमवार को प्राधिकरणों की समीक्षा बैठक लेने आ रहे हैं। पिछली बैठक में मंत्री को प्राधिकरण पर चढ़े भारी भरकम कर्ज की जानकारी दी गई थी। प्राधिकरण का अरबों रुपया दबाए बैठे बिल्डरों पर कार्रवाई करने के निर्देश मंत्री ने दिए थे। ऐसे में इसे मंत्री के दोबारा आने से पहले की कार्रवाई से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि, अधिकारियों का कहना है कि इस तरह के 13 से अधिक भूखंड निरस्तीकरण की सूची में है। इनमें बीपीओ और संस्थागत भूखंड भी शामिल हैं।
ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण से भूखंड आवंटन होने के बाद समय पर काम शुरू न करने वाले बिल्डरों और अन्य आवंटियों पर सख्त कार्रवाई की जा रही है। अभी और कई ऐसे बिल्डर, संस्थागत और बीपीओ पर कार्रवाई होनी है। इन्हें चिह्नित करने का काम जारी है।
-सुरेंद्र सिंह, सीईओ ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण एवं मंडलायुक्त
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ग्रुप हाउसिंग विभाग के ओएसडी सौम्य श्रीवास्तव ने बताया कि बीआरएस छह स्कीम के जरिये साल 2006 में एसोटेक इंफ्रास्ट्रक्चर को सेक्टर पाई में 18,141 वर्ग मीटर के भूखंड संख्या सात का आवंटन किया गया था। बिल्डर ने उसी साल लीज डीड कराकर आवंटित भूखंड को अपने कब्जे में ले लिया था। प्राधिकरण ने बिल्डर को छह साल में निर्माण कार्य पूरा कर अधिभोग प्रमाणपत्र लेने का समय दिया था। तय समयसीमा में बिल्डर ने निर्माण कार्य पूरा नहीं किया और नक्शा भी पास नहीं कराया। इसके अलावा बिल्डर ने समय वृद्धि के लिए भी आवेदन नहीं किया। इसे देखते हुए प्राधिकरण ने भू-आवंटन को निरस्त कर दिया है। ओएसडी ने बताया कि लीजडीड कराने के 15 वर्ष बाद किसी तरह की रियायत देने का प्रावधान नहीं है। बिल्डर को अधिभोग प्रमाणपत्र लेना जरूरी था, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। अब इस जमीन को नए सिरे से योजना लाकर आवंटित किया जाएगा। भूखंड की एवज में जमा राशि का 25 फीसदी जब्त कर बाकी बिल्डर को लौटाई जाएगी।
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बुकिंग कराने वाले निवेशकों की भी नहीं दी जानकारी
प्राधिकरण के अधिकारियों ने बताया कि बिल्डर ने ग्रुप हाउसिंग परियोजना का न तो नक्शा पास कराया और न ही निर्माण शुरू कराया। ऐसे में फ्लैटों की बुकिंग की संभावना नहीं है। हालांकि, इस संबंध में बिल्डर से कई बार जानकारी मांगी गई लेकिन बिल्डर ने कोई जवाब नहीं दिया। अगर बुकिंग कराने वाला कोई निवेशक सामने आता है तो शिकायत के आधार पर जांच कर उसका पैसा वापस कराया जाएगा।
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बिल्डर को नुकसान, प्राधिकरण को फायदा
आवंटन रद्द होने से बिल्डर को नुकसान होगा। वहीं, ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण को अरबों रुपये का फायदा होगा। चूंकि जब बिल्डर को जमीन आवंटित हुई थी तब अब आवंटन दर कम थी। अब आवंटन दर काफी बढ़ गई है। ई-नीलामी के माध्यम से दोबारा आवंटन होगा।
मंत्री के आने से पहले बड़ी कार्रवाई
औद्योगिक विकास मंत्री नंद गोपाल गुप्ता नंदी सोमवार को प्राधिकरणों की समीक्षा बैठक लेने आ रहे हैं। पिछली बैठक में मंत्री को प्राधिकरण पर चढ़े भारी भरकम कर्ज की जानकारी दी गई थी। प्राधिकरण का अरबों रुपया दबाए बैठे बिल्डरों पर कार्रवाई करने के निर्देश मंत्री ने दिए थे। ऐसे में इसे मंत्री के दोबारा आने से पहले की कार्रवाई से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि, अधिकारियों का कहना है कि इस तरह के 13 से अधिक भूखंड निरस्तीकरण की सूची में है। इनमें बीपीओ और संस्थागत भूखंड भी शामिल हैं।
ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण से भूखंड आवंटन होने के बाद समय पर काम शुरू न करने वाले बिल्डरों और अन्य आवंटियों पर सख्त कार्रवाई की जा रही है। अभी और कई ऐसे बिल्डर, संस्थागत और बीपीओ पर कार्रवाई होनी है। इन्हें चिह्नित करने का काम जारी है।
-सुरेंद्र सिंह, सीईओ ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण एवं मंडलायुक्त