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Noida News: बाढ़ के बाद कीचड़ में डूबी मेढ़, किसान तलाश रहे खेत

Mon, 15 Sep 2025 10:38 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Mon, 15 Sep 2025 10:38 PM IST
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After the flood, the embankment is submerged in mud
-प्रशासन से खेतों की नपाई कराकर मेड़बंदी की योजना बना रहे किसान
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संवाद न्यूज एजेंसी

ग्रेटर नोएडा। यमुना में बाढ़ से डूब इलाकों के खेतों में रेतीली कीच़ड चढ़ने से खेतों की मेढ़बंदी ढक गई है। जिसको हटाना मुश्किल है। किसान अपने खेतों को तलाश करने में जुटे है। फसल खराब होने से किसानों को आर्थिक क्षति हुई है। वहीं कई किसानों को खेत भी नहीं मिल रहे है। कुछ किसान प्रशासन के माध्यम से अपने खेतों की नपाई कराकर मेड़बंदी कराने का मन बना रहे है।


गौतमबुद्धनगर के यमुना नदी के नजदीक डूब क्षेत्र में तिलवाडा, मकनपुर, झुप्पा, जगनपुर, अट्टा फतेहपुर समेत छह से अधिक गांवों में यमुना नदी का जलस्तर बढ़ने से बाढ़ आई थी। बाढ़ से डूब इलाकों में कई-कई फुट पानी भरने से किसानों की फसल नष्ट हो गई। करीब एक माह तक डूब इलाके में बाढ़ रही। बाढ़ के चलते किसानों को राहत शिविरों में रखा गया था। कई स्थानों पर जल स्तर कम हो गया है। जल स्तर कम होने के बाद खेतों में दो-दो फुट तक कीचड़ है। कीचड़ से सभी आसपास के खेत समतल दिखाई दे रहे है। कई खेतों की मेढ़बंदी नहीं रही है। जिन स्थानों पर खेतों की मेंढ़ दिखाई नहीं दे रहे है, वे किसान परेशान है। खेतों को तलाश करने में जुटे है। कई किसानों के द्वारा अपने कृषि के कागजात के हिसाब से अपनी जमीन की नाप कराने की तैयारी कर रहे है। किसान को अपनी फसल के साथ जमीन की चिंता भी सता रही है।
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पानी के बहाव से बदल जाते है खेत


दनकौर के किसान सुनील प्रधान का कहना है कि जिन स्थानों पर अधिक पानी भरा हुआ था। उन स्थानों पर अधिकांश खेतों की मेड़ टूट गई है। किसान अपने खेत की पहचान नहीं कर पा रहे है। किसान अनुमान के आधार पर ही अपने खेत की पहचान करने का प्रयास कर रहे है। अनुमान से ही अपनी मेड़ को दुरुस्त करने में जुटे हैं।
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बोले किसान
जगनपुर गांव निवासी नरेंद्र भड़ाना का कहना है कि अभी पुश्ता से सटे हुए किसान अपने खेतों की पहचान कर पा रहे है। यमुना नदी के नजदीक अधिक जल स्तर वाले हिस्से में खेतों की पहचान नहीं हो पा रही है। खेतों की नपाई कराने पर ही मेड़बंदी हो पाएगी।


सदर तहसील के अफजलपुर गांव निवासी योगेश भाटी का कहना है कि उसकी 13 बीघा जमीन है। बाढ़ के बाद खेत कहा है उसको पता नहीं चल रहा है। अपनी जमीन की नपाई के लिए सर्वे विभाग से मदद लेगा। तहसील में लिखित में शिकायत की जा चुकी है।
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