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Noida News: लूट-चोरी की योजना बनाते पकड़ा गया युवक साढ़े चार साल बाद बरी
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(अदालत से)
— स्वतंत्र गवाह न होने और रवानगी जीडी पेश न करने पर कोर्ट ने पुलिस की कार्रवाई को माना संदिग्ध
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। अपर सत्र न्यायाधीश की अदालत ने लूट व चोरी की योजना बनाने और अवैध चाकू रखने के आरोप में साढ़े चार साल से अधिक समय से जेल बंद में मोरना गांव सेक्टर-35 नोएडा निवासी मनोज कुमार को बरी कर दिया।mमुकदमा सेक्टर-24 कोतवाली नोएडा में दर्ज है। पुलिस ने मनोज कुमार और उसके साथी आफताब को जनवरी 2021 में सेक्टर-12 नोएडा से पकड़ा था। पुलिस का दावा था कि दोनों पार्क में चोरी और लूट की योजना बना रहे थे। मामले में अधिवक्ता नहीं होने पर तीनों ने जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अधीन आने वाले लीगल एड डिफेंस काउंसिल सिस्टम (एलएडीसीएस) से निशुल्क कानूनी परामर्श के लिए गुहार लगाई थी।
न्यायाधीश ने अपने निर्णय में कहा कि अभियोजन द्वारा पेश की गई कहानी कई बिंदुओं पर संदेहास्पद है। अदालत ने कहा कि धारा-398 के तहत सजा तब दी जा सकती है जब आरोपी घातक हथियार के साथ लूट या डकैती का प्रयास करे। अभियोजन पक्ष यह साबित करने में असफल रहा कि आरोपी किसी गिरोह का सदस्य था या पूर्व में चोरी-डकैती के मामलों में शामिल रहा। अदालत ने कहा कि स्वतंत्र गवाह न होने, थाने से रवानगी का रिकॉर्ड न होने और स्थल की परिस्थिति संदिग्ध होने से बरामदगी पर भरोसा नहीं किया जा सकता। अदालत ने मनोज को दोषमुक्त कर दिया।
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— स्वतंत्र गवाह न होने और रवानगी जीडी पेश न करने पर कोर्ट ने पुलिस की कार्रवाई को माना संदिग्ध
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। अपर सत्र न्यायाधीश की अदालत ने लूट व चोरी की योजना बनाने और अवैध चाकू रखने के आरोप में साढ़े चार साल से अधिक समय से जेल बंद में मोरना गांव सेक्टर-35 नोएडा निवासी मनोज कुमार को बरी कर दिया।mमुकदमा सेक्टर-24 कोतवाली नोएडा में दर्ज है। पुलिस ने मनोज कुमार और उसके साथी आफताब को जनवरी 2021 में सेक्टर-12 नोएडा से पकड़ा था। पुलिस का दावा था कि दोनों पार्क में चोरी और लूट की योजना बना रहे थे। मामले में अधिवक्ता नहीं होने पर तीनों ने जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अधीन आने वाले लीगल एड डिफेंस काउंसिल सिस्टम (एलएडीसीएस) से निशुल्क कानूनी परामर्श के लिए गुहार लगाई थी।
न्यायाधीश ने अपने निर्णय में कहा कि अभियोजन द्वारा पेश की गई कहानी कई बिंदुओं पर संदेहास्पद है। अदालत ने कहा कि धारा-398 के तहत सजा तब दी जा सकती है जब आरोपी घातक हथियार के साथ लूट या डकैती का प्रयास करे। अभियोजन पक्ष यह साबित करने में असफल रहा कि आरोपी किसी गिरोह का सदस्य था या पूर्व में चोरी-डकैती के मामलों में शामिल रहा। अदालत ने कहा कि स्वतंत्र गवाह न होने, थाने से रवानगी का रिकॉर्ड न होने और स्थल की परिस्थिति संदिग्ध होने से बरामदगी पर भरोसा नहीं किया जा सकता। अदालत ने मनोज को दोषमुक्त कर दिया।
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