फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi NCR ›   Noida News ›   A unique pool of faith in Yamuna City; belief holds that merely bathing in it cures skin diseases

Noida News: यमुना सिटी में विश्वास का आनोखा तालाब, मान्यता नहाने मात्र से ठीक होते हैं चर्म रोग

Fri, 14 Aug 2026 08:18 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Fri, 14 Aug 2026 08:18 PM IST
विज्ञापन
A unique pool of faith in Yamuna City; belief holds that merely bathing in it cures skin diseases
नरेंद्र कुमार यादव
विज्ञापन

यमुना सिटी। विज्ञान और आधुनिकता के इस दौर में आज भी कुछ ऐसी लोक मान्यताएं और परंपराएं जीवित हैं, जो लोगों को हैरत में डाल देती हैं। जेवर क्षेत्र में एक ऐसा ही तालाब स्थित है, जिसे लेकर क्षेत्र के लोगों में अटूट विश्वास है। स्थानीय लोगों का मानना है कि इस तालाब में केवल एक बार स्नान करने से गंभीर से गंभीर चर्म रोग ठीक हो जाते हैं। सैकड़ों वर्षों से चली आ रही इस अनोखी परंपरा को आज की युवा पीढ़ी भी निभा रही है।
यह तालाब मुतैना और भट्टा गांव के बीच है, जिसे स्थानीय भाषा में कोड़िया तालाब कहा जाता है। इस तालाब का नाम ही इसके पीछे छिपे रहस्य को दर्शाता है। आसपास के ग्रामीणों और दूर-दराज से आने वाले लोगों का विश्वास है कि इस तालाब के पानी में कुछ ऐसे चमत्कारी गुण हैं, जो त्वचा की हर बीमारी को जड़ से खत्म कर देते हैं।
विज्ञापन

तालाब में नहाकर छोड़ जाते हैं कपड़े
स्नान करने के बाद की यह मान्यता है कि पहने हुए कपड़े लोग अपने साथ घर लेकर वापस नहीं जाएंगे। परंपरा के अनुसार, पुराने कपड़े तालाब के किनारे खड़े पेड़ों की टहनियों पर टांगने होते हैं और नए कपड़े पहनकर जाना होता है। मान्यता है कि इसके बाद इंसान की त्वचा की बीमारी हमेशा के लिए ठीक हो जाती है। कोड़िया तालाब के किनारों पर खड़े पेड़ों पर हजारों की संख्या में पुराने कपड़े लटके हुए दिखाई देते हैं, जो दूर से ही इस अनोखी परंपरा की कहानी सुना रहे थे।
विज्ञापन
विज्ञापन


यह बोले गांव के लोग
कोड़िया तालाब की मान्यता काफी पुरानी है और आसपास के क्षेत्र के लोग अब भी इस मान्यता पर विश्वास करते हैं।
-गजेंद्र सिंह
मान्यता है कि इस तालाब में नहाकर अब भी लोग अपने चर्म रोग से मुक्ति पा सकते हैं। इसलिए दूर-दूर से लोग यहां स्नान करने के लिए आते हैं।
संजय सिंह
तालाब में नहाने के बाद रोगी अपने वस्त्र वहीं उतार कर आते हैं, ताकि चर्म रोग वापस न हो सके। लोग अपने कपड़े तालाब के किनारे स्थित पेड़ों पर ही टांग देते हैं। -ललित कुमार

हमारे बुजुर्ग भी इस तालाब पर आते थे और अपने बुजुर्गों की बातों पर लोग अब भी विश्वास करते हुए यहां आते हैं। यह परंपरा कई दशकों से क्षेत्र में चली आ रही है।
-सागर सिंह
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed