{"_id":"6a22cc55cd42cbf5c40ad826","slug":"a-new-story-of-happiness-is-being-created-from-waste-clothes-noida-news-c-1-noi1095-4361407-2026-06-05","type":"story","status":"publish","title_hn":"Noida News: बेकार कपड़ों से बन रही खुशियों की नई कहानी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Noida News: बेकार कपड़ों से बन रही खुशियों की नई कहानी
विज्ञापन
यूपीआईडी की अंशिका पुराने कपड़ों से तैयार कर रहीं सजावट की सामग्री
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। उत्तर प्रदेश इंस्टीट्यूट ऑफ डिजाइन (यूपीआईडी) की अंतिम वर्ष की छात्रा अंशिका मौर्य अपने अभिनव प्रोजेक्ट के माध्यम से अनुपयोगी कपड़ों को उपयोग में लाकर पर्यावरण संरक्षण में योगदान दे रही हैं। अंशिका अपने प्रोजेक्ट अपसाइक्लिंग एंड मेटेरियल रिक्लेमेशन इन टेक्सटाइल डिजाइन के तहत पुराने कपड़ों, फैब्रिक स्क्रैप और बेकार हो चुके वस्त्रों से पार्टी डेकोरेशन सामग्री तैयार कर रही हैं। इन सजावटी उत्पादों में रंग-बिरंगे फैब्रिक बैनर, हैंगिंग्स और अन्य आकर्षक सजावट सामग्री शामिल हैं, जिन्हें कई बार इस्तेमाल किया जा सकता है।
प्रोजेक्ट में पैचवर्क, लेयरिंग और फैब्रिक रिकंस्ट्रक्शन जैसी टेक्सटाइल तकनीकों का प्रयोग किया गया है। अंशिका का कहना है कि हर वर्ष दुनिया भर में लाखों टन वस्त्र कचरा लैंडफिल में पहुंचता है, जिससे पर्यावरण पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। इसलिए यह परियोजना समय की मांग है।
परियोजना में अंशिका का मार्गदर्शन अतिथि संकाय की आकांक्षा वाधवानी ने किया। संस्थान के निदेशक डॉ. कुमार संभव ने बताया कि संस्थान में कई नवाचार विकसित किए जा रहे हैं, जो पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। उत्तर प्रदेश इंस्टीट्यूट ऑफ डिजाइन (यूपीआईडी) की अंतिम वर्ष की छात्रा अंशिका मौर्य अपने अभिनव प्रोजेक्ट के माध्यम से अनुपयोगी कपड़ों को उपयोग में लाकर पर्यावरण संरक्षण में योगदान दे रही हैं। अंशिका अपने प्रोजेक्ट अपसाइक्लिंग एंड मेटेरियल रिक्लेमेशन इन टेक्सटाइल डिजाइन के तहत पुराने कपड़ों, फैब्रिक स्क्रैप और बेकार हो चुके वस्त्रों से पार्टी डेकोरेशन सामग्री तैयार कर रही हैं। इन सजावटी उत्पादों में रंग-बिरंगे फैब्रिक बैनर, हैंगिंग्स और अन्य आकर्षक सजावट सामग्री शामिल हैं, जिन्हें कई बार इस्तेमाल किया जा सकता है।
प्रोजेक्ट में पैचवर्क, लेयरिंग और फैब्रिक रिकंस्ट्रक्शन जैसी टेक्सटाइल तकनीकों का प्रयोग किया गया है। अंशिका का कहना है कि हर वर्ष दुनिया भर में लाखों टन वस्त्र कचरा लैंडफिल में पहुंचता है, जिससे पर्यावरण पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। इसलिए यह परियोजना समय की मांग है।
विज्ञापन
परियोजना में अंशिका का मार्गदर्शन अतिथि संकाय की आकांक्षा वाधवानी ने किया। संस्थान के निदेशक डॉ. कुमार संभव ने बताया कि संस्थान में कई नवाचार विकसित किए जा रहे हैं, जो पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देते हैं।
विज्ञापन