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मेडिकल कॉलेज में सुरक्षा कर्मियों ने किया विरोध, लगाए गंभीर आरोप
Updated Fri, 16 Nov 2018 10:43 PM IST
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मेडिकल कॉलेज में सुरक्षा कर्मियों ने किया विरोध
- एजेंसी पर लगाए पैसे लेकर भर्ती करने के आरोप
अमर उजाला ब्यूरो,
नूंह। जिले के लोगों के स्वास्थ्य की देखरेख के लिए करीब साढ़े पांच सौ करोड़ रुपये की लागत से बनाया गया शहीद हसन खां मेवाती मेडिकल कॉलेज एक बार फिर विवादों में है। शुक्रवार को मेडिकल कॉलेज सिक्योरिटी गार्ड की नई एजेंसी द्वारा पुराने गार्डों को हटाकर नए गार्ड लगाने का कर्मचारियों ने विरोध किया। उन्होंने एजेंसी पर पैसे लेकर नए कर्मचारियों की भर्ती करने का गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि इस मामले में कॉलेज प्रशासन के शामिल होने से भी इंकार नहीं किया जा सकता। इसलिए कॉलेज निदेशक इस मामले में हस्तक्षेप करने से पीछे हट रही है। मामले को लेकर कई घंटे कॉलेज में उहापोह की स्थिति रही।
जिले के शहीद हसन खां मेवाती मेडिकल कॉलेज में सिक्योरिटी गार्ड का टेंडर अब से पहले सैनिक नाम की एजेंसी पर था लेकिन अब यह टेंडर एसआईएस एजेंसी को सौंपा गया है। अब से पहले मेडिकल कॉलेज कभी इएसआई, पीएफ सहित कई प्रकार की धांधलियों को लेकर सुर्खियों में रहता था। इसके अलावा यहां अन्य कई मामलों में भी धांधली की आशंका को लेकर मामला विधानसभा तक में भी उठा था। जिसके चलते तत्कालीन निदेशक डा. संसारचंद को अपने पद से त्यागपत्र देना पड़ा। इसके बाद निदेशक की जिम्मेदारी डा. यामिनी को सौंप दी गई है।
बहाली नहीं हुई तो करेंगे धरना प्रदर्शन
पिछले करीब पांच वर्ष से यहां सिक्योरिटी गार्ड लियाकत अली, सलीम अहमद, मोहम्मद इरफान, राजबीर, सतनाम, गुरनाम, मुस्तकीम, सद्दाम, नौशाद, राजेश, नरेश, रहीस, रेखा, कविता, बंटी, सरिता, गुनिता का आरोप है कि वे यहां शुरू से काम कर रहे हैं। अब से पहले उनकी ठेकेदार सैनिक सिक्योरिटी एजेंसी थी। लेकिन अब यह टेंडर एसआईएस ने ले लिया है। उक्त एजेंसी ने आते ही सारे पुराने कर्मचारियों को हटा दिया और बाहर से लाए नए कर्मचारी भर्ती कर लिए। नए कर्मचारियों से तीस से पैंतीस हजार रुपये लगाने के लिए गए हैं और जो कर्मचारी पुराने लगे हुए थे उनसे भी पंद्रह-पंद्रह हजार रुपये मांगे हैं। कुछ कर्मचारियों ने रोजगार छिनने के डर से पैसे दे दिए। जिन्होंने नहीं दिए उन्हें नौकरी से हटा दिया गया। कर्मचारियों ने चेतावनी देते हुए कहा कि उन्हें नौकरी पर नहीं रखा गया तो वे धरना प्रदर्शन करेंगे। कर्मचारियों का आरोप था कि इस मामले में निदेशक डा. यामिनी ने कर्मचारियों से मिलने से इंकार कर दिया तथा उनका रवैया नकारात्मक था।
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जो शर्त टेंडर में हैं, हम उनके अनुसार दसवीं कक्षा पास, पांच फीट सात इंच कद वाले कर्मचारियों को ले रहे हैं। जो लोग पैसे मांगने का आरोप लगा रहे हैं वो गलत हैं। हमें टेंडर में कॉलेज प्रशासन ने बाध्य किया हुआ है। - अमित कुमार, अस्टिेंट ब्रांच हेड, एसआईएस
हमने एजेंसी को बता दिया है कि उनकी शिकायतें आ रही हैं। उन्हें तुरंत ठीक करें, अगर ऐसा नहीं किया जाता है तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। डा. यामिनी, कॉलेज निदेशक
फोटो - मेडिकल कॉलेज में हड़ताल पर बैठे कर्मचारी।
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- एजेंसी पर लगाए पैसे लेकर भर्ती करने के आरोप
अमर उजाला ब्यूरो,
नूंह। जिले के लोगों के स्वास्थ्य की देखरेख के लिए करीब साढ़े पांच सौ करोड़ रुपये की लागत से बनाया गया शहीद हसन खां मेवाती मेडिकल कॉलेज एक बार फिर विवादों में है। शुक्रवार को मेडिकल कॉलेज सिक्योरिटी गार्ड की नई एजेंसी द्वारा पुराने गार्डों को हटाकर नए गार्ड लगाने का कर्मचारियों ने विरोध किया। उन्होंने एजेंसी पर पैसे लेकर नए कर्मचारियों की भर्ती करने का गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि इस मामले में कॉलेज प्रशासन के शामिल होने से भी इंकार नहीं किया जा सकता। इसलिए कॉलेज निदेशक इस मामले में हस्तक्षेप करने से पीछे हट रही है। मामले को लेकर कई घंटे कॉलेज में उहापोह की स्थिति रही।
जिले के शहीद हसन खां मेवाती मेडिकल कॉलेज में सिक्योरिटी गार्ड का टेंडर अब से पहले सैनिक नाम की एजेंसी पर था लेकिन अब यह टेंडर एसआईएस एजेंसी को सौंपा गया है। अब से पहले मेडिकल कॉलेज कभी इएसआई, पीएफ सहित कई प्रकार की धांधलियों को लेकर सुर्खियों में रहता था। इसके अलावा यहां अन्य कई मामलों में भी धांधली की आशंका को लेकर मामला विधानसभा तक में भी उठा था। जिसके चलते तत्कालीन निदेशक डा. संसारचंद को अपने पद से त्यागपत्र देना पड़ा। इसके बाद निदेशक की जिम्मेदारी डा. यामिनी को सौंप दी गई है।
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बहाली नहीं हुई तो करेंगे धरना प्रदर्शन
पिछले करीब पांच वर्ष से यहां सिक्योरिटी गार्ड लियाकत अली, सलीम अहमद, मोहम्मद इरफान, राजबीर, सतनाम, गुरनाम, मुस्तकीम, सद्दाम, नौशाद, राजेश, नरेश, रहीस, रेखा, कविता, बंटी, सरिता, गुनिता का आरोप है कि वे यहां शुरू से काम कर रहे हैं। अब से पहले उनकी ठेकेदार सैनिक सिक्योरिटी एजेंसी थी। लेकिन अब यह टेंडर एसआईएस ने ले लिया है। उक्त एजेंसी ने आते ही सारे पुराने कर्मचारियों को हटा दिया और बाहर से लाए नए कर्मचारी भर्ती कर लिए। नए कर्मचारियों से तीस से पैंतीस हजार रुपये लगाने के लिए गए हैं और जो कर्मचारी पुराने लगे हुए थे उनसे भी पंद्रह-पंद्रह हजार रुपये मांगे हैं। कुछ कर्मचारियों ने रोजगार छिनने के डर से पैसे दे दिए। जिन्होंने नहीं दिए उन्हें नौकरी से हटा दिया गया। कर्मचारियों ने चेतावनी देते हुए कहा कि उन्हें नौकरी पर नहीं रखा गया तो वे धरना प्रदर्शन करेंगे। कर्मचारियों का आरोप था कि इस मामले में निदेशक डा. यामिनी ने कर्मचारियों से मिलने से इंकार कर दिया तथा उनका रवैया नकारात्मक था।
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जो शर्त टेंडर में हैं, हम उनके अनुसार दसवीं कक्षा पास, पांच फीट सात इंच कद वाले कर्मचारियों को ले रहे हैं। जो लोग पैसे मांगने का आरोप लगा रहे हैं वो गलत हैं। हमें टेंडर में कॉलेज प्रशासन ने बाध्य किया हुआ है। - अमित कुमार, अस्टिेंट ब्रांच हेड, एसआईएस
हमने एजेंसी को बता दिया है कि उनकी शिकायतें आ रही हैं। उन्हें तुरंत ठीक करें, अगर ऐसा नहीं किया जाता है तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। डा. यामिनी, कॉलेज निदेशक
फोटो - मेडिकल कॉलेज में हड़ताल पर बैठे कर्मचारी।