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अनियमित कॉलोनियों को नियमित करने की तैयारी शुरू हुई
Updated Mon, 31 Jul 2017 11:22 PM IST
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अनियमित कॉलोनियों को नियमित करने की तैयारी शुरू
फरीदाबाद। मुंबई के बाद फरीदाबाद में सबसे ज्यादा स्लम क्षेत्र माना जाता है, लेकिन प्रदेश सरकार ने अब इस दाग को धोने की कवायद शुरू कर दी है। मुख्यमंत्री मनोहर लाल की घोषणा के बाद फरीदाबाद की अनधिकृत कॉलोनियों को नियमित करने की तैयारी शुरू हो गई है। सर्वे के आधार पर 29 अनियमित कॉलोनियों को नियमित करने का प्रस्ताव नगर निगम ने तैयार किया था, जिनमें से 9 कॉलोनियों को नियमित करने की मंजूरी मिल गई है।
हालांकि, नगर निगम ने अभी इन कॉलोनियों के नाम घोषित नहीं किए हैं। चर्चा इस बात की है कि इन नियमित होने वाले कॉलोनियों की सूची में और भी नामों को शामिल कराने के बाद इसे जारी किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने 23 जुलाई को नगर निगम सभागार फरीदाबाद में जनता दरबार के दौरान जिले की सभी अनधिकृत कॉलोनियों को नियमित करने की घोषणा की थी। इस दौरान उन्होंने यह शर्त रखी थी कि जो भी कॉलोनी विकास शुल्क जमा कराएगी, उसे नियमित करा दिया जाएगा। इसके बाद इस प्रकार की कॉलोनियों में रहने वाले लाखों लोगों की आंखों में चमक आ गई है। हर किसी को भरोसा है कि जल्द ही उनकी भी कॉलोनी के दिन बहुरेंगे। फरीदाबाद की अनधिकृत कॉलोनियों में रहने वाले अधिकतर लोग उत्तर प्रदेश, बिहार सहित अन्य राज्यों के हैं। स्थानीय लोग भी बड़ी संख्या में इन कॉलोनियों में रहते हैं।
देना होगा विकास शुल्क
मुख्यमंत्री ने सलाह दी थी कि इस प्रकार की कॉलोनियों को वैध कराने के लिए 1250 रुपये प्रति स्क्वायर मीटर की दर से विकास शुल्क अदा करना होगा। इसके बाद ही इन्हें नियमित करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। ऐसी कॉलोनियों में रहने वालों को अपने-अपने यहां आरडब्ल्यूए या एसोसिएशन का गठन करने की हिदायत भी दी गई है। इनके नाम से बैंक में अकाउंट भी खुलवाया जाए। जिसमें इस प्रकार का शुल्क जमा कराया जा सके। अगर इन सभी कॉलोनियों की 50 फीसदी आबादी जब यह विकास शुल्क जमा करा देगी तो वहां पर विकास कार्य शुरू करा दिए जाएंगे। इससे वहां पर सीवर, पानी, बिजली, सड़क व वर्षा जल निकासी की सुविधा को बेहतर बनाया जाएगा।
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सालभर पहले ही हो गया था सर्वे
सरकार के निर्देश पर नगर निगम ने 50 प्रतिशत से अधिक विकसित हो चुकी कॉलोनियों का सर्वे सालभर पहले हंी हो गया था। राज्य सरकार ने जुलाई 2015 में 50 प्रतिशत से ज्यादा विकसित हो चुकी अवैध कॉलोनियों के सर्वे कराने का ऐलान किया था। इसके बाद शहरी स्थानीय निकाय विभाग ने जुलाई में नोटिफिकेशन जारी कर सभी नगर निगमों से मौजूद अवैध कॉलोनियों की सर्वे रिपोर्ट तैयार कर सरकार के पास भेजने को कहा था।नवंबर 2015 तक सभी जिलों को अपनी सर्वे रिपोर्ट सरकार के पास भेजनी थी। लेकिन इस काम में नगर निगम पीछे रह गया।
34 थी कॉलोनियों की संख्या
निगम ने निजी एजेंसी के जरिए अब 50 प्रतिशत और उससे अधिक विकसित हो चुकी कॉलोनियों का सर्वे किया था। प्राइवेट एजेंसी द्वारा किए गए सर्वे के अनुसार एनआईटी व ओल्ड फरीदाबाद में 21 और बल्लभगढ़ में 13 कॉलोनियों को चिन्हित किया गया है। कुल मिला कर 34 अवैध कॉलोनियां निगम के 1700 एकड़ जमीन पर बसी हुई है।
कोट
अनियमित कॉलोनियों का सर्वे पहले ही कराया जा चुका है। इसी आधार पर करीब 29 कॉलोनियों के नाम को नियमित करने के लिए सरकार के पास भेजा गया था। इसमें से नौ कॉलोनियों को वैध करने की मंजूरी मिल चुकी है। इस सूची में और भी कॉलोनियों का नाम शामिल कराया जाएगा। इसके बाद इनके नामों की घोषणा होगी।
- देवेंद्र चौधरी, सीनियर डिप्टी मेयर
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फरीदाबाद। मुंबई के बाद फरीदाबाद में सबसे ज्यादा स्लम क्षेत्र माना जाता है, लेकिन प्रदेश सरकार ने अब इस दाग को धोने की कवायद शुरू कर दी है। मुख्यमंत्री मनोहर लाल की घोषणा के बाद फरीदाबाद की अनधिकृत कॉलोनियों को नियमित करने की तैयारी शुरू हो गई है। सर्वे के आधार पर 29 अनियमित कॉलोनियों को नियमित करने का प्रस्ताव नगर निगम ने तैयार किया था, जिनमें से 9 कॉलोनियों को नियमित करने की मंजूरी मिल गई है।
हालांकि, नगर निगम ने अभी इन कॉलोनियों के नाम घोषित नहीं किए हैं। चर्चा इस बात की है कि इन नियमित होने वाले कॉलोनियों की सूची में और भी नामों को शामिल कराने के बाद इसे जारी किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने 23 जुलाई को नगर निगम सभागार फरीदाबाद में जनता दरबार के दौरान जिले की सभी अनधिकृत कॉलोनियों को नियमित करने की घोषणा की थी। इस दौरान उन्होंने यह शर्त रखी थी कि जो भी कॉलोनी विकास शुल्क जमा कराएगी, उसे नियमित करा दिया जाएगा। इसके बाद इस प्रकार की कॉलोनियों में रहने वाले लाखों लोगों की आंखों में चमक आ गई है। हर किसी को भरोसा है कि जल्द ही उनकी भी कॉलोनी के दिन बहुरेंगे। फरीदाबाद की अनधिकृत कॉलोनियों में रहने वाले अधिकतर लोग उत्तर प्रदेश, बिहार सहित अन्य राज्यों के हैं। स्थानीय लोग भी बड़ी संख्या में इन कॉलोनियों में रहते हैं।
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देना होगा विकास शुल्क
मुख्यमंत्री ने सलाह दी थी कि इस प्रकार की कॉलोनियों को वैध कराने के लिए 1250 रुपये प्रति स्क्वायर मीटर की दर से विकास शुल्क अदा करना होगा। इसके बाद ही इन्हें नियमित करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। ऐसी कॉलोनियों में रहने वालों को अपने-अपने यहां आरडब्ल्यूए या एसोसिएशन का गठन करने की हिदायत भी दी गई है। इनके नाम से बैंक में अकाउंट भी खुलवाया जाए। जिसमें इस प्रकार का शुल्क जमा कराया जा सके। अगर इन सभी कॉलोनियों की 50 फीसदी आबादी जब यह विकास शुल्क जमा करा देगी तो वहां पर विकास कार्य शुरू करा दिए जाएंगे। इससे वहां पर सीवर, पानी, बिजली, सड़क व वर्षा जल निकासी की सुविधा को बेहतर बनाया जाएगा।
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सालभर पहले ही हो गया था सर्वे
सरकार के निर्देश पर नगर निगम ने 50 प्रतिशत से अधिक विकसित हो चुकी कॉलोनियों का सर्वे सालभर पहले हंी हो गया था। राज्य सरकार ने जुलाई 2015 में 50 प्रतिशत से ज्यादा विकसित हो चुकी अवैध कॉलोनियों के सर्वे कराने का ऐलान किया था। इसके बाद शहरी स्थानीय निकाय विभाग ने जुलाई में नोटिफिकेशन जारी कर सभी नगर निगमों से मौजूद अवैध कॉलोनियों की सर्वे रिपोर्ट तैयार कर सरकार के पास भेजने को कहा था।नवंबर 2015 तक सभी जिलों को अपनी सर्वे रिपोर्ट सरकार के पास भेजनी थी। लेकिन इस काम में नगर निगम पीछे रह गया।
34 थी कॉलोनियों की संख्या
निगम ने निजी एजेंसी के जरिए अब 50 प्रतिशत और उससे अधिक विकसित हो चुकी कॉलोनियों का सर्वे किया था। प्राइवेट एजेंसी द्वारा किए गए सर्वे के अनुसार एनआईटी व ओल्ड फरीदाबाद में 21 और बल्लभगढ़ में 13 कॉलोनियों को चिन्हित किया गया है। कुल मिला कर 34 अवैध कॉलोनियां निगम के 1700 एकड़ जमीन पर बसी हुई है।
कोट
अनियमित कॉलोनियों का सर्वे पहले ही कराया जा चुका है। इसी आधार पर करीब 29 कॉलोनियों के नाम को नियमित करने के लिए सरकार के पास भेजा गया था। इसमें से नौ कॉलोनियों को वैध करने की मंजूरी मिल चुकी है। इस सूची में और भी कॉलोनियों का नाम शामिल कराया जाएगा। इसके बाद इनके नामों की घोषणा होगी।
- देवेंद्र चौधरी, सीनियर डिप्टी मेयर