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प्राइवेट और सरकारी एजेंसियों पर रेरा हुआ सख्त
Updated Thu, 01 Nov 2018 05:28 AM IST
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निजी के साथ सरकारी एजेंसियों पर भी रेरा सख्त
नोएडा, ग्रेनो और यमुना प्राधिकरण को निगरानी समिति बनाने के निर्देश
- गौतमबुद्ध नगर के तीन और पश्चिमी यूपी के जिलों के विकास प्राधिकरणों के साथ अधिकारियों की बैठक
अमर उजाला ब्यूरो
नोएडा। उत्तर प्रदेश रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (रेरा) के अधिकारियों के साथ गौतमबुद्ध नगर और पश्चिमी यूपी के अन्य जिलों के औद्योगिक और विकास प्राधिकरणों की बैठक हुई। इसमें रेरा के अधिकारियों ने सख्त रुख अख्तियार करते हुए कई अहम निर्देश दिए। रेरा का कहना है कि जिस तरह प्राइवेट प्रमोटर काम में लापरवाही कर रहे हैं और उन पर कार्रवाई की बात चल रही है, उसी प्रकार सरकारी एजेंसियों पर भी कार्रवाई हो सकती है। लापरवाही करने पर दोनों के खिलाफ एक ही नियम के तहत कार्रवाई हो सकती है। सरकारी एजेंसियों के खिलाफ भी कई प्रकार की शिकायतें मिल रहीं हैं।
इस बैठक में नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरणों को निर्देश देते हुए अलग से एक-एक निगरानी समिति बनाने को कहा गया। दरअसल, नोएडा में 51 और ग्रेटर नोएडा में 48 प्रोजेक्टों का ऑडिट किया गया था। ऑडिटर ने कुछ प्रस्ताव दिए थे। रेरा के अधिकारियों का कहना है कि इन प्रस्तावों पर कितना काम हुआ है और प्रोजेक्ट किस तरह से चल रहे हैं, इस पर निगरानी रखनी है। जरूरत पड़ने पर रेरा को भी अवगत कराने को कहा गया है, ताकि निर्णय लिया जा सके।
इस मौके पर रेरा के चेयरमैन राजीव कुमार, सचिव अबरार अहमद, सदस्य बलविंदर कुमार और कल्पना मिश्रा के अलावा नोएडा प्राधिकरण के सीईओ आलोक टंडन, ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के सीईओ नरेंद्र भूषण और यमुना प्राधिकरण के सीईओ अरुणवीर सिंह, मुरादाबाद, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, हापुड़-पिलखुवा, गाजियाबाद, मेरठ, बुलंदशहर, खुर्जा, अलीगढ़, आगरा, फिरोजाबाद, मथुरा, वृंदावन सहित पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई जिलों के विकास प्राधिकरणों के अधिकारी मौजूद रहे।
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अपंजीकृत प्रोजेक्टों की करनी होगी पहचान
रेरा के अधिकारियों ने औद्योगिक और विकास प्राधिकरणों के अधिकारियों से कहा कि वह अपने-अपने जिलों में बिना रजिस्ट्रेशन के चल रहे प्रोजेक्टों की पहचान करें और रेरा की ओर से लांच मोबाइल ऐप पर उनका विवरण डालें। इससे उनकी लोकेशन का पता चलेगा। यहां शिकायतें भी लिखी जा सकती हैं। रेरा की ओर से ऐसे प्रोजेक्टों पर कार्रवाई होगी।
को-प्रमोटर को लाने के लिए कवायद
रेरा ने सभी प्राधिकरणों के अधिकारियों से कहा कि ऐसे कई प्रोजेक्ट हैं, जहां काफी जमीनें खाली पड़ी हैं। बिल्डर की ओर से वहां बेहद कम निर्माण किया गया है। ऐसी जमीनों को वापस लेने की कोशिश होनी चाहिए। साथ ही को-प्रमोटर को लाने की कवायद भी होनी चाहिए।
अवैध सोसायटी पर लगेगी लगाम
रेरा के पदाधिकारियों ने बताया कि कई जिलों में अवैध तरीके से सोसायटी बनाकर सदस्यों से निर्माण के लिए पैसे लिए जा रहे हैं। इनमें लोगों को ठगा जा रहा है। इसकी शिकायतें मिलने पर रेरा को अवगत कराना होगा।
जल्द पूरे करें प्रोजेक्ट, नहीं तो कार्रवाई
रेरा ने कहा कि प्रोजेक्ट पूरे नहीं होने की लगातार शिकायतें मिल रही हैं। इनको जल्द पूरा कराएं, क्योंकि बाद में कार्रवाई के लिए मजबूर होना पड़ेगा।
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निजी के साथ सरकारी एजेंसियों पर भी रेरा सख्त
नोएडा, ग्रेनो और यमुना प्राधिकरण को निगरानी समिति बनाने के निर्देश
- गौतमबुद्ध नगर के तीन और पश्चिमी यूपी के जिलों के विकास प्राधिकरणों के साथ अधिकारियों की बैठक
अमर उजाला ब्यूरो
नोएडा। उत्तर प्रदेश रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (रेरा) के अधिकारियों के साथ गौतमबुद्ध नगर और पश्चिमी यूपी के अन्य जिलों के औद्योगिक और विकास प्राधिकरणों की बैठक हुई। इसमें रेरा के अधिकारियों ने सख्त रुख अख्तियार करते हुए कई अहम निर्देश दिए। रेरा का कहना है कि जिस तरह प्राइवेट प्रमोटर काम में लापरवाही कर रहे हैं और उन पर कार्रवाई की बात चल रही है, उसी प्रकार सरकारी एजेंसियों पर भी कार्रवाई हो सकती है। लापरवाही करने पर दोनों के खिलाफ एक ही नियम के तहत कार्रवाई हो सकती है। सरकारी एजेंसियों के खिलाफ भी कई प्रकार की शिकायतें मिल रहीं हैं।
इस बैठक में नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरणों को निर्देश देते हुए अलग से एक-एक निगरानी समिति बनाने को कहा गया। दरअसल, नोएडा में 51 और ग्रेटर नोएडा में 48 प्रोजेक्टों का ऑडिट किया गया था। ऑडिटर ने कुछ प्रस्ताव दिए थे। रेरा के अधिकारियों का कहना है कि इन प्रस्तावों पर कितना काम हुआ है और प्रोजेक्ट किस तरह से चल रहे हैं, इस पर निगरानी रखनी है। जरूरत पड़ने पर रेरा को भी अवगत कराने को कहा गया है, ताकि निर्णय लिया जा सके।
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इस मौके पर रेरा के चेयरमैन राजीव कुमार, सचिव अबरार अहमद, सदस्य बलविंदर कुमार और कल्पना मिश्रा के अलावा नोएडा प्राधिकरण के सीईओ आलोक टंडन, ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के सीईओ नरेंद्र भूषण और यमुना प्राधिकरण के सीईओ अरुणवीर सिंह, मुरादाबाद, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, हापुड़-पिलखुवा, गाजियाबाद, मेरठ, बुलंदशहर, खुर्जा, अलीगढ़, आगरा, फिरोजाबाद, मथुरा, वृंदावन सहित पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई जिलों के विकास प्राधिकरणों के अधिकारी मौजूद रहे।
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अपंजीकृत प्रोजेक्टों की करनी होगी पहचान
रेरा के अधिकारियों ने औद्योगिक और विकास प्राधिकरणों के अधिकारियों से कहा कि वह अपने-अपने जिलों में बिना रजिस्ट्रेशन के चल रहे प्रोजेक्टों की पहचान करें और रेरा की ओर से लांच मोबाइल ऐप पर उनका विवरण डालें। इससे उनकी लोकेशन का पता चलेगा। यहां शिकायतें भी लिखी जा सकती हैं। रेरा की ओर से ऐसे प्रोजेक्टों पर कार्रवाई होगी।
को-प्रमोटर को लाने के लिए कवायद
रेरा ने सभी प्राधिकरणों के अधिकारियों से कहा कि ऐसे कई प्रोजेक्ट हैं, जहां काफी जमीनें खाली पड़ी हैं। बिल्डर की ओर से वहां बेहद कम निर्माण किया गया है। ऐसी जमीनों को वापस लेने की कोशिश होनी चाहिए। साथ ही को-प्रमोटर को लाने की कवायद भी होनी चाहिए।
अवैध सोसायटी पर लगेगी लगाम
रेरा के पदाधिकारियों ने बताया कि कई जिलों में अवैध तरीके से सोसायटी बनाकर सदस्यों से निर्माण के लिए पैसे लिए जा रहे हैं। इनमें लोगों को ठगा जा रहा है। इसकी शिकायतें मिलने पर रेरा को अवगत कराना होगा।
जल्द पूरे करें प्रोजेक्ट, नहीं तो कार्रवाई
रेरा ने कहा कि प्रोजेक्ट पूरे नहीं होने की लगातार शिकायतें मिल रही हैं। इनको जल्द पूरा कराएं, क्योंकि बाद में कार्रवाई के लिए मजबूर होना पड़ेगा।