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एटीएम हैक करके नकदी निकालने वाले गिरोह के 6 गिरफ्तार
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पकडे गए आरोपी।
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नोएडा। स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) और नोएडा पुलिस ने एटीएम को हैक कर करोड़ों रुपये नकदी निकालने वाले गिरोह के 6 बदमाशों को गिरफ्तार किया है। बुधवार को सेक्टर-18 की मल्टीलेवल पार्किंग के पास से पकड़े गए बदमाशों की पहचान सीतापुर के सीताकुंड निवासी अमित शुक्ला, कानुपर देहात के बाबूपुर निवासी प्रत्यूष, कानपुर निवासी कृष्णकांत, अनूप कुमार, आशीष और रिंकू यादव के रूप में हुई। इनमें से चार आरोपी कानपुर के गांव नौबादपुर निवासी हैं। आरोपियों के कब्जे से करीब 19 हजार नकद, 54 डेबिट कार्ड, 3 मोबाइल और स्विफ्ट डिजायर कार बरामद हुई है।
एडीसीपी रणविजय सिंह और एसटीएफ के एसपी राजकुमार मिश्रा ने बताया कि 15 दिन पहले आरबीएल बैंक के खातों से करीब साढे़ 22 लाख रुपये निकालने और फिर क्लेम करके वापस मंगाने का मामला सामने आया था। जांच में सामने आया कि कानपुर का एक गिरोह एटीएम से पैसा निकालता है। वह एटीमए मशीन से मैसेज भेजकर लेनदेन प्रक्रिया को फेल बता देते थे। गिरोह के बदमाश रुपयों को खाते में वापस डालने की मांग करता था। एटीएम से निकासी असफल देख बैंक की ओर से इस तरह करीब साढ़े 22 लाख रुपये ग्राहकों को वापस दे दिए गए थे।
बैंक की जांच में पैसे निकलने और क्लेम भी लेने की बात सामने आई। संदेह होने पर सेक्टर-20 कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। इस मामले में पुलिस और एसटीएफ ने जांच की तो गैंग का पर्दाफाश हुआ और इनके मोबाइल नंबर आदि सर्विलांस पर लगाए गए। बुधवार को भी गैंग के बदमाश कानपुर से नोएडा नकदी निकालने आए थे। इसी दौरान एसटीएफ और सेक्टर-20 थाना पुलिस ने उन्हें धर दबोचा। अधिकारियों ने बताया कि प्रत्यूष, कृष्णकांत और अनूप तीनों ने धोखाधड़ी के मामले में मध्यप्रदेश के सागर में 2020 में गिरफ्तार हुए थे। दो माह पहले ही तीनों जेल से बाहर आए थे।
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यू-ट्यूब से सीखा मशीन को हैक करना
आरोपियों ने यू-ट्यूब पर वीडियो देखकर एटीएम से पैसा निकालने और मशीन की तकनीकी प्रक्रिया की जानकारी हासिल की थी। गैंग का सरगना बीएससी पास प्रत्यूष है। उसने यू-ट़यूब पर एटीएम हैक करने और फिर लेन देन असफल होने का मैसेज भेजने की जानकारी हासिल की थी। आरोपियों ने इसी तरह से आरबीएल बैंक के ही करीब साढ़े 22 लाख रुपये धोखाधड़ी करके निकाल लिए थे। पुलिस के मुताबिक आरोपियों ने एटीएम हैक कर अब तक करोड़ों रुपये निकाली है।
किराए पर लेते थे एटीएम कार्ड, 15 दिन के देते थे 6 हजार
गिरोह के बदमाश अपने किसी जानकार से उसका डेबिट कार्ड किराए पर लेते थे। इसकी एवज में उन्हें 15 दिन के पांच से छह हजार रुपये दिए जाते थे। संबंधित व्यक्ति के एकाउंट में पहले खुद ही पैसे डालते थे और फिर उसके एटीएम से निकालते थे। बाद में ट्रांजक्शन फेल दिखाकर बैंक से भी निकाली गई रकम को क्लेम कर लेते थे। पुलिस के मुताबिक कानपुर में उनके घर के आसपास के गांव के लोग नया खाता खुलवाकर आरोपियों को एटीएम कार्ड दे देते थे।
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एडीसीपी रणविजय सिंह और एसटीएफ के एसपी राजकुमार मिश्रा ने बताया कि 15 दिन पहले आरबीएल बैंक के खातों से करीब साढे़ 22 लाख रुपये निकालने और फिर क्लेम करके वापस मंगाने का मामला सामने आया था। जांच में सामने आया कि कानपुर का एक गिरोह एटीएम से पैसा निकालता है। वह एटीमए मशीन से मैसेज भेजकर लेनदेन प्रक्रिया को फेल बता देते थे। गिरोह के बदमाश रुपयों को खाते में वापस डालने की मांग करता था। एटीएम से निकासी असफल देख बैंक की ओर से इस तरह करीब साढ़े 22 लाख रुपये ग्राहकों को वापस दे दिए गए थे।
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बैंक की जांच में पैसे निकलने और क्लेम भी लेने की बात सामने आई। संदेह होने पर सेक्टर-20 कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। इस मामले में पुलिस और एसटीएफ ने जांच की तो गैंग का पर्दाफाश हुआ और इनके मोबाइल नंबर आदि सर्विलांस पर लगाए गए। बुधवार को भी गैंग के बदमाश कानपुर से नोएडा नकदी निकालने आए थे। इसी दौरान एसटीएफ और सेक्टर-20 थाना पुलिस ने उन्हें धर दबोचा। अधिकारियों ने बताया कि प्रत्यूष, कृष्णकांत और अनूप तीनों ने धोखाधड़ी के मामले में मध्यप्रदेश के सागर में 2020 में गिरफ्तार हुए थे। दो माह पहले ही तीनों जेल से बाहर आए थे।
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यू-ट्यूब से सीखा मशीन को हैक करना
आरोपियों ने यू-ट्यूब पर वीडियो देखकर एटीएम से पैसा निकालने और मशीन की तकनीकी प्रक्रिया की जानकारी हासिल की थी। गैंग का सरगना बीएससी पास प्रत्यूष है। उसने यू-ट़यूब पर एटीएम हैक करने और फिर लेन देन असफल होने का मैसेज भेजने की जानकारी हासिल की थी। आरोपियों ने इसी तरह से आरबीएल बैंक के ही करीब साढ़े 22 लाख रुपये धोखाधड़ी करके निकाल लिए थे। पुलिस के मुताबिक आरोपियों ने एटीएम हैक कर अब तक करोड़ों रुपये निकाली है।
किराए पर लेते थे एटीएम कार्ड, 15 दिन के देते थे 6 हजार
गिरोह के बदमाश अपने किसी जानकार से उसका डेबिट कार्ड किराए पर लेते थे। इसकी एवज में उन्हें 15 दिन के पांच से छह हजार रुपये दिए जाते थे। संबंधित व्यक्ति के एकाउंट में पहले खुद ही पैसे डालते थे और फिर उसके एटीएम से निकालते थे। बाद में ट्रांजक्शन फेल दिखाकर बैंक से भी निकाली गई रकम को क्लेम कर लेते थे। पुलिस के मुताबिक कानपुर में उनके घर के आसपास के गांव के लोग नया खाता खुलवाकर आरोपियों को एटीएम कार्ड दे देते थे।