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सालों द्वार बहनोंई को 17 दिन बाद मामला हलकी धाराओं के तहत दर्र्ज
Updated Wed, 22 Aug 2018 10:40 PM IST
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बहनोई से मारपीट का मामला 17 दिन बाद हल्की धाराओं के तहत दर्र्ज
-पुलिस ने आरोपियों का सहयोग करने के लिए अपहरण की नहीं लगाई धाराएं
अमर उजाला ब्यूरो
पुन्हाना। कस्बा पिनगवां से आम लोगों के सामने अपहरण करके सालों द्वारा अपने बहनोई को ले जाने और तीन दिन तक अमानवीय यातनाएं देने के मामले में 17 दिन बाद मुकदमा तो दर्ज किया गया है, लेकिन आरोपियों को फायदा पहुंचाने के लिए मामूली धाराएं लगाई गई हैं। वहीं पीड़ित पक्ष ने इस मामले की मेवात पुलिस कप्तान से शिकायत करने की बात कही है। पीड़ित पक्ष का आरोप है कि राजनीतिक दबाव के चलते पिनगवां पुलिस ने अपहरण और अमानवीय यातनाएं देने जैसी धाराएं नहीं लगाई गई हैं।
गांव शाहचौखा निवासी ऐजाज ने बताया कि उसकी पत्नी को साथ ना भेजने को लेकर उसकी ससुराल वालों से अनबन चल रही थी। गत पांच अगस्त को वह गांव के ही ओसामा के साथ घरेलू कार्य से पिनगवां गया हुआ था। जब वह ढांणा मोड़ पर पहुंचा, तो उसके सालों सहित कई लोगों ने उनको पकड़ लिया और जबरदस्ती मोटरसाइकिल सहित ढांणा ले गए। उसके साले इस्राइल, इस्माइल, इब्राहीम और रज्जाक ने घर पर पहले तो मारपीट की और बाद में दूसरे दिन वे उसे जंगल में ले गए, जहां उससे मिट्टी के ट्रेक्टर भरवाए गए और जब पानी मांगा तो मूत्र पिलाने की कोशिश की गई। उसके साथ गलत काम करने की नीयत से सारे कपडे़ उतरवा लिए गए। लेकिन मौके पर मौजूद लोगों के कहने पर वे गलत काम करने से रुक गए। उसे तीन दिन तक बंधक बनाकर रखा गया और तीनों दिन उसके साथ मारपीट की गई। ये सब उसकी पत्नी के इशारे पर किया गया। तीन दिन बाद पुलिस से बर्खास्त दो पुलिस कर्मियों ने उसको पिनगवां थाने पहुंचाया, जहां उससे थाना प्रभारी ने जबरदस्ती उसके अन्य साथी उसामा से दो शिकायत लिखवाई, जिनमें एक में कार्रवाई करने जिसमें अपहरण आदि यातनाओं का जिक्र नहीं था। तीन दिन फैसले के नाम पर लिखवाकर उससे हस्ताक्षर करा लिए गए थे। उसने थाना प्रभारी से काफी मना किया कि जब तक परिजन नहीं आ जाते, वह कुछ नहीं लिखेगा। लेकिन थाना प्रभारी ने उसकी एक नहीं सुनी।
वहीं पीड़ित के पिता हाजी इस्माइल का कहना है कि उन्होंने पहले ही दिन पुलिस को अपहरण करने की शिकायत दी थी। पिनगवां पुलिस ने 16 दिन तक तो राजनीतिक दवाब के चलते मुकदमा ही दर्ज नहीं किया। मीडिया में खबरें आने के बाद पुलिस ने खानापूर्ति के लिए मुकदमा तो दर्ज कर दिया, लेकिन ऐसी धाराएं लगाई गई, जिससे आरोपी गिरफ्तारी के दिन ही छूट सकते हैं।
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-पुलिस ने आरोपियों का सहयोग करने के लिए अपहरण की नहीं लगाई धाराएं
अमर उजाला ब्यूरो
पुन्हाना। कस्बा पिनगवां से आम लोगों के सामने अपहरण करके सालों द्वारा अपने बहनोई को ले जाने और तीन दिन तक अमानवीय यातनाएं देने के मामले में 17 दिन बाद मुकदमा तो दर्ज किया गया है, लेकिन आरोपियों को फायदा पहुंचाने के लिए मामूली धाराएं लगाई गई हैं। वहीं पीड़ित पक्ष ने इस मामले की मेवात पुलिस कप्तान से शिकायत करने की बात कही है। पीड़ित पक्ष का आरोप है कि राजनीतिक दबाव के चलते पिनगवां पुलिस ने अपहरण और अमानवीय यातनाएं देने जैसी धाराएं नहीं लगाई गई हैं।
गांव शाहचौखा निवासी ऐजाज ने बताया कि उसकी पत्नी को साथ ना भेजने को लेकर उसकी ससुराल वालों से अनबन चल रही थी। गत पांच अगस्त को वह गांव के ही ओसामा के साथ घरेलू कार्य से पिनगवां गया हुआ था। जब वह ढांणा मोड़ पर पहुंचा, तो उसके सालों सहित कई लोगों ने उनको पकड़ लिया और जबरदस्ती मोटरसाइकिल सहित ढांणा ले गए। उसके साले इस्राइल, इस्माइल, इब्राहीम और रज्जाक ने घर पर पहले तो मारपीट की और बाद में दूसरे दिन वे उसे जंगल में ले गए, जहां उससे मिट्टी के ट्रेक्टर भरवाए गए और जब पानी मांगा तो मूत्र पिलाने की कोशिश की गई। उसके साथ गलत काम करने की नीयत से सारे कपडे़ उतरवा लिए गए। लेकिन मौके पर मौजूद लोगों के कहने पर वे गलत काम करने से रुक गए। उसे तीन दिन तक बंधक बनाकर रखा गया और तीनों दिन उसके साथ मारपीट की गई। ये सब उसकी पत्नी के इशारे पर किया गया। तीन दिन बाद पुलिस से बर्खास्त दो पुलिस कर्मियों ने उसको पिनगवां थाने पहुंचाया, जहां उससे थाना प्रभारी ने जबरदस्ती उसके अन्य साथी उसामा से दो शिकायत लिखवाई, जिनमें एक में कार्रवाई करने जिसमें अपहरण आदि यातनाओं का जिक्र नहीं था। तीन दिन फैसले के नाम पर लिखवाकर उससे हस्ताक्षर करा लिए गए थे। उसने थाना प्रभारी से काफी मना किया कि जब तक परिजन नहीं आ जाते, वह कुछ नहीं लिखेगा। लेकिन थाना प्रभारी ने उसकी एक नहीं सुनी।
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वहीं पीड़ित के पिता हाजी इस्माइल का कहना है कि उन्होंने पहले ही दिन पुलिस को अपहरण करने की शिकायत दी थी। पिनगवां पुलिस ने 16 दिन तक तो राजनीतिक दवाब के चलते मुकदमा ही दर्ज नहीं किया। मीडिया में खबरें आने के बाद पुलिस ने खानापूर्ति के लिए मुकदमा तो दर्ज कर दिया, लेकिन ऐसी धाराएं लगाई गई, जिससे आरोपी गिरफ्तारी के दिन ही छूट सकते हैं।
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