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Noida News: एनआईओएस में पांच साल में 4,440 श्रवण बाधित विद्यार्थियों ने लिया दाखिला
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-सांकेतिक भाषा के प्रति भी बढ़ा रुझान, 2021 में तीन से बढ़कर 2025 में 106 हुई विद्यार्थियों की संख्या
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। सुनने में असमर्थ और कम सुनने वाले विद्यार्थियों के लिए सुलभ शिक्षा के विकल्पों के प्रति रुझान बढ़ रहा है। राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान (एनआईओएस) में वर्ष 2021 से 2025 के बीच ऐसे 4,440 विद्यार्थियों ने 10वीं और 12वीं की पढ़ाई के लिए दाखिला लिया। संस्थान के आंकड़ों के अनुसार, इस अवधि में विभिन्न दिव्यांगताओं से जुड़े कुल 24,899 अभ्यर्थियों ने प्रवेश लिया। इनमें श्रवण संबंधी दिव्यांगता वाले विद्यार्थियों की संख्या सबसे अधिक रही।
सांकेतिक भाषा की पढ़ाई में बढ़ी दिलचस्पी :
श्रवण बाधित विद्यार्थियों के लिए पढ़ाई के दौरान संवाद और विषयों को समझना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। इसे ध्यान में रखते हुए एनआईओएस ने भारतीय सांकेतिक भाषा को पाठ्यक्रम में शामिल किया है। इसकी खास बात यह है कि यह विषय केवल श्रवण बाधित विद्यार्थियों तक सीमित नहीं है। कक्षा 10वीं और 12वीं का कोई भी विद्यार्थी इसे विषय के रूप में चुन सकता है।
संस्थान के आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2021 में भारतीय सांकेतिक भाषा के पाठ्यक्रम में केवल तीन विद्यार्थियों ने प्रवेश लिया था। वर्ष 2025 में यह संख्या बढ़कर 106 हो गई। वहीं, वर्ष 2026 के सत्र में अब तक 35 विद्यार्थी दाखिला ले चुके हैं। यह आंकड़े सांकेतिक भाषा सीखने के प्रति विद्यार्थियों की बढ़ती रुचि को दर्शाते हैं।
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सीखने संबंधी अक्षमता वाले 4,066 विद्यार्थियों ने लिया प्रवेश : वर्ष 2021 से 2025 के बीच सीखने संबंधी अक्षमता वाले 4,066 और बौद्धिक दिव्यांगता वाले 3,872 विद्यार्थियों ने दाखिला लिया। इसके अलावा चलने-फिरने संबंधी दिव्यांगता वाले 2,637, ऑटिज्म से प्रभावित 1,835 और बौद्धिक विकास संबंधी दिव्यांगता वाले 2,334 अभ्यर्थियों ने प्रवेश लिया। इस अवधि में कुल 27 प्रकार की दिव्यांगताओं से जुड़े विद्यार्थियों ने संस्थान में दाखिला लिया।
समावेशी शिक्षा पर जोर :
संस्थान के पदाधिकारियों के अनुसार, एनआईओएस का उद्देश्य विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने के साथ उनकी परिस्थितियों और क्षमताओं के अनुरूप आगे बढ़ने का अवसर उपलब्ध कराना है। समावेशी शिक्षा के तहत दिव्यांगता और विशेष शैक्षिक जरूरतों वाले विद्यार्थियों को लचीली एवं सुलभ शिक्षा प्रदान करने पर जोर दिया जा रहा है। इसका उद्देश्य उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के साथ सम्मानजनक भविष्य की दिशा में आगे बढ़ने के अवसर उपलब्ध कराना है।
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माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। सुनने में असमर्थ और कम सुनने वाले विद्यार्थियों के लिए सुलभ शिक्षा के विकल्पों के प्रति रुझान बढ़ रहा है। राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान (एनआईओएस) में वर्ष 2021 से 2025 के बीच ऐसे 4,440 विद्यार्थियों ने 10वीं और 12वीं की पढ़ाई के लिए दाखिला लिया। संस्थान के आंकड़ों के अनुसार, इस अवधि में विभिन्न दिव्यांगताओं से जुड़े कुल 24,899 अभ्यर्थियों ने प्रवेश लिया। इनमें श्रवण संबंधी दिव्यांगता वाले विद्यार्थियों की संख्या सबसे अधिक रही।
सांकेतिक भाषा की पढ़ाई में बढ़ी दिलचस्पी :
श्रवण बाधित विद्यार्थियों के लिए पढ़ाई के दौरान संवाद और विषयों को समझना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। इसे ध्यान में रखते हुए एनआईओएस ने भारतीय सांकेतिक भाषा को पाठ्यक्रम में शामिल किया है। इसकी खास बात यह है कि यह विषय केवल श्रवण बाधित विद्यार्थियों तक सीमित नहीं है। कक्षा 10वीं और 12वीं का कोई भी विद्यार्थी इसे विषय के रूप में चुन सकता है।
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संस्थान के आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2021 में भारतीय सांकेतिक भाषा के पाठ्यक्रम में केवल तीन विद्यार्थियों ने प्रवेश लिया था। वर्ष 2025 में यह संख्या बढ़कर 106 हो गई। वहीं, वर्ष 2026 के सत्र में अब तक 35 विद्यार्थी दाखिला ले चुके हैं। यह आंकड़े सांकेतिक भाषा सीखने के प्रति विद्यार्थियों की बढ़ती रुचि को दर्शाते हैं।
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सीखने संबंधी अक्षमता वाले 4,066 विद्यार्थियों ने लिया प्रवेश : वर्ष 2021 से 2025 के बीच सीखने संबंधी अक्षमता वाले 4,066 और बौद्धिक दिव्यांगता वाले 3,872 विद्यार्थियों ने दाखिला लिया। इसके अलावा चलने-फिरने संबंधी दिव्यांगता वाले 2,637, ऑटिज्म से प्रभावित 1,835 और बौद्धिक विकास संबंधी दिव्यांगता वाले 2,334 अभ्यर्थियों ने प्रवेश लिया। इस अवधि में कुल 27 प्रकार की दिव्यांगताओं से जुड़े विद्यार्थियों ने संस्थान में दाखिला लिया।
समावेशी शिक्षा पर जोर :
संस्थान के पदाधिकारियों के अनुसार, एनआईओएस का उद्देश्य विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने के साथ उनकी परिस्थितियों और क्षमताओं के अनुरूप आगे बढ़ने का अवसर उपलब्ध कराना है। समावेशी शिक्षा के तहत दिव्यांगता और विशेष शैक्षिक जरूरतों वाले विद्यार्थियों को लचीली एवं सुलभ शिक्षा प्रदान करने पर जोर दिया जा रहा है। इसका उद्देश्य उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के साथ सम्मानजनक भविष्य की दिशा में आगे बढ़ने के अवसर उपलब्ध कराना है।