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Noida News: 15 साल से न्याय की आस में भटक रहे 2.7 लाख फ्लैट खरीदार

Tue, 19 Mar 2024 01:20 AM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Tue, 19 Mar 2024 01:20 AM IST
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2.7 lakh flat buyers wandering in hope of justice for 15 years
15 साल से न्याय की आस में भटक रहे 2.7 लाख फ्लैट खरीदार
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गौतमबुद्ध नगर संसदीय क्षेत्र से तीन बार चुने गए सांसद, नहीं सुलझा बिल्डर-खरीदार का मामला

माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। बीते 15 साल से जिले के 2.7 लाख फ्लैट खरीदार न्याय की आस में भटक रहे हैं। इस दौरान कई सरकारें आईं और चली गईं। कई बार लोकसभा और विधानसभा के चुनाव हुए। साल 2009 से 2024 तक प्रदेश में भाजपा, बसपा और सपा की सरकारें भी रहीं, लेकिन कोई भी फ्लैट खरीदारों को उनका हक नहीं दिला सका। एक बार फिर लोकसभा चुनाव की रणभेरी बज चुकी है। ऐसे में इस बार भी खरीदारों का मुद्दा अहम होगा। चुनाव में फ्लैट खरीदारों के बाबत राजनैतिक पार्टियों के अपने-अपने दावे होंगे, लेकिन इन दावों को पूरा कराने की चुनौती भी होगी। प्रस्तुत है रिपोर्ट...
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खरीदारों पर घर का किराया और ईएमआई का बोझ
जिले के हजारों ऐसे खरीदार हैं, जिन पर फ्लैट में निवेश करने के बाद दोतरफा मार पड़ी है। एक ओर उनको घर का किराया देना पड़ रहा है तो दूसरी ओर बैंक से लिए गए लोन की ईएमआई भी भरनी पड़ रही है। ग्रेनो वेस्ट निवासी श्वेता भारती बताती हैं, उनको अब तक आम्रपाली सेंचुरियन पार्क में घर नहीं मिला। अभी किराये पर रह रही हैं और ईएमआई भी भरनी पड़ रही है। खास बात यह कि इनमें से कई निवेशक अब इस दुनिया में नहीं हैं। उनके परिवार का कहना है कि उनके लिए सबसे बड़ा सपना अपना घर होना था, जो उनके जीवन काल में नहीं मिल पाया।
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ईएमआई भरने के लिए टैक्सी चलाने को मजबूर
फ्लैट में निवेश करने वाले कई नाम ऐसे भी हैं जिन्होंने बुकिंग तो करा दी, लेकिन काेरोना की वजह से उनका काम छूट गया। इसके बाद उन पर दुखों का पहाड़ टूट गया। ऐसे निवेशक नाम नहीं छापने की शर्त पर बताते हैं कि वह घर चलाने और ईएमआई भरने के लिए टैक्सी चला रहे हैं। वहीं, कुछ लोग छोटे-मोटे काम करने को भी मजबूर हैं। उनका साफ कहना है कि फ्लैट में निवेश करना उनकी जीवन की सबसे बड़ी भूल साबित हुई। कई लोगों ने अपने पैसे रिफंड के लिए भी आवेदन किया है। उनका कहना है कि जीवन भर की कमाई ऐसे ही नहीं गंवाई जा सकती है।
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आम्रपाली के कार्यालय के बाहर लगातार दो माह तक हुआ था प्रदर्शन
आम्रपाली के खरीदारों ने सेक्टर-62 में लगातार दो माह तक धरना दिया था। उस दौरान सरकार के मंत्री से लेकर विधायक-सांसद और प्राधिकरण के अधिकारी तक धरनास्थल पर पहुंचे। उन्होंने धरनारत खरीदारों को मनाने की कोशिश की, लेकिन बात नहीं बनी। आम्रपाली के कार्यालय के बाहर गेट पर तंबू लगाकर जमे रहे। इसके बाद तत्कालीन सरकार ने मंत्रियों की एक उच्चस्तरीय समिति बनाने की घोषणा की। समिति ने काम शुरू किया, लेकिन परिणाम देने में असफल रही, हालांकि कई माह तक प्राधिकरण के अधिकारी लखनऊ की दौड़ लगाते रहे।

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लाखों में खरीदार, रजिस्ट्री हो रही सैकड़ों में
जिले में करीब 2.7 लाख फ्लैट खरीदारों को अपने घरों पर कब्जे और रजिस्ट्री का इंतजार है, लेकिन प्राधिकरण की ओर से लाख प्रयास करने के बावजूद भी रजिस्ट्री का आंकड़ा नहीं बढ़ रहा है। सरकार के अमिताभ कांत समिति की सिफारिशों को लागू करने के बाद भी बड़े बिल्डरों की ओर से रजिस्ट्री और घरों के अधूरे निर्माण पूरे करने को लेकर किसी तरह की संजीदगी नहीं दिखाई जा रही है। आलम यह है कि लाखों की रजिस्ट्री होनी है और सैकड़ों में रजिस्ट्री की योजना बनाई जा रही है।

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सपा-बसपा भी कुछ नहीं कर पाई

सपा-बसपा काल की यह परेशानी अब तक बनी हुई है। साल 2007 से लेकर 2017 तक दोनों पार्टियों की सरकारें रहीं। इसी दौरान बिल्डरों की ओर से खरीदारों के पैसे लेकर फंड के डायवर्जन का फर्जीवाड़ा किया गया। इनको पकड़ने के लिए अधिकारियों ने कुछ भी नहीं किया। धरना-प्रदर्शन के दौरान फ्लैट खरीदारों की एक नहीं सुनी गई। किसी की भी निगरानी नहीं हुई। ऐसे में पूरा मामला फंसता चला गया।

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प्राधिकरणों की लापरवाही भी रही हावी
बिल्डर-खरीदार मामले में प्राधिकरणों की लापरवाही भी पूरी तरह से हावी रही। प्राधिकरणों ने बिल्डरों को बिना परखे जमीन की कुल कीमत की 10 प्रतिशत राशि लेकर आवंटन कर दिया। बिल्डरों को समय के साथ किस्तें जमा करनी थीं और निर्माण कार्य पूरे करने थे, लेकिन बिल्डरों ने खरीदारों के पैसे दूसरी परियोजनाओं में लगा दिए और मामला फंस गया।

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बिल्डर-खरीदार आंकड़ा
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नोएडा में अब तक नहीं मिला घर - 1,03,973 खरीदार
ग्रेटर नोएडा में अब तक नहीं मिले घर - 1,65,404 खरीदार
यमुना में अब तक नहीं मिले घर - 4,500 खरीदार

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जिले की डिफॉल्टर परियोजनाएं
नोएडा प्राधिकरण - 87 परियोजनाएं
ग्रेनो प्राधिकरण - 96 परियोजनाएं
यमुना प्राधिकरण - 14 परियोजनाएं
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प्रदेश में पहले की सरकारों की लापरवाही का खामियाजा फ्लैट खरीदारों को भुगतना पड़ा है। भाजपा की सरकार आने के बाद उनकी उम्मीदाें को पूरा करने के लिए भरसक प्रयास किए गए हैं। आने वाले समय में सभी की रजिस्ट्री कराने का रोडमैप तैयार हो गया है। इस कड़ी में काम भी शुरू हो चुका है। - डॉ. महेश शर्मा, प्रत्याशी, भाजपा

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लोग कई वर्षों से रजिस्ट्री के लिए चक्कर लगा रहे हैं। कई सोसाइटियों में रजिस्ट्री नहीं हुई है। जहां लोग रहे हैं वहां भी सुविधाओं का अभाव है। - अन्नू खान, अध्यक्ष, नेफोमा

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यहां रजिस्ट्री बहुत बड़ा मुद्दा है। योगी सरकार ने सहूलियत तो दी, लेकिन अधिकांश बिल्डर रजिस्ट्री के लिए आगे नहीं आ रहे हैं। सरकार को इन पर सख्ती करनी चाहिए। - अभिषेक कुमार, अध्यक्ष, नेफोवा
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