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पशुधन बीमा योजना के तहत 21 हजार 430 पशुओं का किया बीमा
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नूंह। उपायुक्त धीरेंद्र खड़गटा ने शुक्रवार को बताया कि जिले में पंडित दीनदयाल उपाध्याय पशुधन बीमा योजना के तहत चालू वित्त वर्ष में 21, 430 मवेशियों का बीमा किया जा चुका है। इसमें सामान्य जाति के व्यक्तियों के 20, 555 और अनुसूचित जाति के व्यक्तियों के 734 मवेशियों का बीमा किया गया। इसके अलावा बीपीएल परिवार के व्यक्तियों के 141 मवेशियों का बीमा हुआ।
उन्होंने बताया कि योजना के तहत मवेशियों की तीन कैटेगरी एपीएल, बीपीएल और एससी बनाई गई है। एपीएल और बीपीएल कैटेगरी वालों से 100 रुपये प्रति मवेशी बीमा प्रीमियम की धनराशि ली जाती है। शेष प्रीमियम धनराशि सरकार द्वारा वहन की जाती है। एससी कैटेगरी वालों की बीमा प्रीमियम धनराशि सरकार द्वारा पूरी वहन की जाती है। इसी प्रकार पशुधन क्रेडिट कार्ड योजना के तहत जिले में 3608 मवेशियों के स्वास्थ्य प्रमाण पत्र और बीमा पॉलिसी संबंधित बैंकों में जमा करवाई जा चुकी है। इस योजना के तहत लाभार्थी को कम ब्याज दर पर एक मुश्त धनराशि दी जाती है। उन्होंने बताया कि मवेशी पालक 1, 60000 रुपये तक का ऋण बिना गारंटी के ले सकते हैं। 3 लाख रुपये तक का ऋण 7 फीसदी वार्षिक साधारण ब्याज दर पर दिया जाता है। समय पर ब्याज दर का भुगतान करते रहने पर भारत सरकार की ओर से 3 फीसदी ब्याज दर का अनुदान दिया जाता है।
उपायुक्त ने बताया कि रफ्तार योजना के तहत अनुसूचित जाति की 40 फीसदी आबादी वाले गांवों में मवेशियों को पीने के पानी के लिए 36 पानी की खेलें (होदी) बनाने का लक्ष्य रखा गया है। इनमें से अब तक 27 होदी बनाई जा चुकी है। पशुपालन विभाग के उप निदेशक डॉ. नरेंद्र सिंह ने बताया कि अब सरकार ने मवेशी पालक की सुविधा के लिए एक मुश्त धनराशि दी जाती है।
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उन्होंने बताया कि योजना के तहत मवेशियों की तीन कैटेगरी एपीएल, बीपीएल और एससी बनाई गई है। एपीएल और बीपीएल कैटेगरी वालों से 100 रुपये प्रति मवेशी बीमा प्रीमियम की धनराशि ली जाती है। शेष प्रीमियम धनराशि सरकार द्वारा वहन की जाती है। एससी कैटेगरी वालों की बीमा प्रीमियम धनराशि सरकार द्वारा पूरी वहन की जाती है। इसी प्रकार पशुधन क्रेडिट कार्ड योजना के तहत जिले में 3608 मवेशियों के स्वास्थ्य प्रमाण पत्र और बीमा पॉलिसी संबंधित बैंकों में जमा करवाई जा चुकी है। इस योजना के तहत लाभार्थी को कम ब्याज दर पर एक मुश्त धनराशि दी जाती है। उन्होंने बताया कि मवेशी पालक 1, 60000 रुपये तक का ऋण बिना गारंटी के ले सकते हैं। 3 लाख रुपये तक का ऋण 7 फीसदी वार्षिक साधारण ब्याज दर पर दिया जाता है। समय पर ब्याज दर का भुगतान करते रहने पर भारत सरकार की ओर से 3 फीसदी ब्याज दर का अनुदान दिया जाता है।
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उपायुक्त ने बताया कि रफ्तार योजना के तहत अनुसूचित जाति की 40 फीसदी आबादी वाले गांवों में मवेशियों को पीने के पानी के लिए 36 पानी की खेलें (होदी) बनाने का लक्ष्य रखा गया है। इनमें से अब तक 27 होदी बनाई जा चुकी है। पशुपालन विभाग के उप निदेशक डॉ. नरेंद्र सिंह ने बताया कि अब सरकार ने मवेशी पालक की सुविधा के लिए एक मुश्त धनराशि दी जाती है।
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