फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi NCR ›   Noida News ›   कैसे बचे हरियाली

शहर की मिट्टी को बांधकर रखने वाले हरित पेड़ हो रहे गायब

Sun, 22 Jul 2018 12:05 PM IST
आशुतोष दुबे, अमर उजाला,नोएडा
आशुतोष दुबे, अमर उजाला,नोएडा Updated Sun, 22 Jul 2018 12:05 PM IST
विज्ञापन
कैसे बचे हरियाली

शाहबेरी में बिल्डिंग गिरने की वजह सिर्फ घटिया निर्माण सामग्री या लापरवाही ही नहीं, बल्कि बदलता वातावरण भी है। शहर की मिट्टी को बांधकर रखने वाले हरित पेड़ ही गायब होते जा रहे हैं। हर साल लाखों पौधे लगाने के दावे तो किए जाते हैं, लेकिन कितने पौधे बढ़े या घटे हैं इसका कोई आंकड़ा नहीं है। भूजल दोहन भी लगातार किया जा रहा है। नदियों का स्तर घट रहा है। यही वजह है कि हमारी जमीन नीचे से खोखली होती जा रही है।

विज्ञापन


नोएडा शहर 19,600 हेक्टेयर जमीन पर बसा है। इसका महज 17 प्रतिशत भाग में ही हरियाली है जबकि मानकों के तहत यह दायरा करीब 23 फीसदी से अधिक होना चाहिए। गांवों को हरित की संज्ञा दी गई, लेकिन यहां की जमीनों पर दूर-दूर तक रिहायशी इमारतें ही दिख रही हैं। इसमें अधिकांश इमारत शाहबेरी जैसे हादसों के लिए तैयार हैं। यही नहीं सेक्टरों व सोसाइटी में 20 से 25 मंजिल तक की इमारतें खड़ी हैं। यहां सांस लेना तक दूभर है।
विज्ञापन


बिल्डरों ने बड़ी इमारतें को खड़ी कर दी है, लेकिन हरित क्षेत्र की बात करें तो यहां की इमारतों के बीच 5 प्रतिशत भी हरियाली नहीं है। कई स्थानों पर तो एक भी हरित पौधा नहीं है। इससे यहां मिट्टी का कटाव बढ़ता जा रहा है, जबकि नोएडा भूकंप जोन-4 में आता है यानी यहां भूकंप का एक तेज झटका भी बड़े हादसे का सबब बन सकता है।
विज्ञापन
विज्ञापन


हरित क्षेत्र न होने की वजह से सोसाइटियों में ऑक्सीजन का स्तर कम होता जा रहा है। एक आदमी को अपने जीवन काल में 400 पौधे लगाने चाहिए, लेकिन बिल्डर हो या सोसाइटी के निवासी वह इन बातों से जागरूक नहीं है। हरियाली नहीं होने से वायु प्रदूषण बढ़ता जा रहा है।

धड़ल्ले से हो रहा खनन
शाहबेरी गांव में इमारत गिरी, यहां भी खुदाई का काम किया जा रहा था, लेकिन इसकी अनुमति किसी से नहीं ली गई थी। यह हाल सिर्फ शाहबेरी का नहीं, बल्कि दिन ढलते ही गांवों में मिट्टी काटने का काम धड़ल्ले से किया जा रहा है। रातों-रात सैकड़ों ट्रक मिट्टी एक स्थान से दूसरे स्थान पर पहुंचाई जा रही है।


बिल्डर रुपये लेकर बड़ी इमारतें खड़ी करता जा रहा है, लेकिन यहां हरियाली शून्य है। कंस्ट्रक्शन बहुत ही निम्न स्तर का है। ऐसे में बड़ी इमारतों में खुदाई करना गलत है। शाहबेरी में इसी कारण बिल्डिंग भरभरा कर गिर गई। - विक्रांत तोंगड़, पर्यावरण विद्

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed