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Noida News: संशोधित ... गिरफ्तारी पर 19 और पोस्टमार्टम में 21 साल दर्शायी किशोर की आयु
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गिरफ्तारी पर 19 और पोस्टमार्टम में 21 साल दर्शायी आयु
- नाबालिग से जुड़े मामले में कई बार बरतीं गईं लापरवाही
- रिहाई रजिस्टर देख जेल प्रशासन ने कहा 21 को हुई मौत
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। 13 अप्रैल को फेज-1 थाने से चाकू समेत गिरफ्तार कर जेल भेजे गए कथित नाबालिग की मौत के मामले में कई बार लापरवाही बरती गई। किशोर की गिरफ्तारी के दौरान उसकी आयु 19 साल दशार्यी गई थी। परिजनों का कहना है कि पोस्टमार्टम के दौरान किशोर को 21 साल का दर्शाया गया। इसके अलावा जेल प्रशासन ने किशोर की जमानत 21 अप्रैल को और परवाना अगले दिन आने के कारण रिहाई 22 अप्रैल बताई थी। आमतौर पर रिहाई अगले दिन ही होती है। जबकि अस्पताल में मौत की तिथि 21 अप्रैल बताई गई थी।
अमर उजाला में समाचार प्रकाशित होने के बाद जेल प्रशासन ने रिहाई रजिस्टर की जांच कराई। इसके बाद जेल प्रशासन ने भी किशोर की मौत की तिथि 21 अप्रैल बताई है। परिवार के लोग किशोर की पीटकर हत्या का आरोप लगा रहे हैं। जबकि जेल प्रशासन ने बीमारी से मौत का दावा किया है। किशोर के भाई विनीत ने बताया कि 14 अप्रैल को वह जेल में छोटे भाई से मिलने गया था। उसने कहा था कि कैसे भी करके उसे जेल से छुड़ा लो उसे फंसाया गया है। इसके बाद जमानत होने के बाद 21 अप्रैल की रात वह अपने भाई को रिहा कराने जेल पहुंचा तो उसे बताया गया कि छोटे भाई की तबीयत खराब होने पर मेरठ अस्पताल में भर्ती कराया गया है। विनीत 21 अप्रैल को देर रात मेरठ के अस्पताल पहुंचा तो उसे बताया गया कि छोटे भाई की मौत हो चुकी है। इसके बाद पोस्टमार्टम में काफी देरी हुई। पोस्टमार्टम 23 अप्रैल को किया गया। परिजनों का कहना है कि अब तक पोस्टमार्टम रिपोर्ट की जानकारी उन्हें नहीं दी गई है। पुलिस के अलावा जेल के स्तर से भी लापरवाही बरती गई है। उन्होंने जेल में बंदियो के हमले में मौत की आशंका जताई है और कहा कि इस मामले की न्यायिक जांच और कार्रवाई की जानी चाहिए।
परिजन के सवाल ...
- पुलिस ने गिरफ्तारी की सूचना क्यों नहीं दी।
- बीमारी की सूचना कॉल कर क्यों नहीं दी।
- बाल किसने और क्यों काटे, चोट के निशान कैसे लगे।
- आयु के संबंध में परिजन से पुष्टि क्यों नहीं की गई।
- मौत की तिथि को लेकर असमंजस क्यों हुआ।
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बंदी की बीमारी की सूचना उसके भाई को दी गई। तभी उसका भाई मेरठ अस्पताल पहुंचा था। 21 अप्रैल को जमानत मिली लेकिन 22 अप्रैल को परवाना आने पर मौत से लगभग आधा घंटा पहले अस्पताल में उपचार के दौरान रिहाई की गई। हेपेटाइटिस बी व सी आदि के कारण लिवर खराब होने से रिहाई के आधे घंटे बाद बंदी की मौत हुई है। किशोर के बाल जेल में नहीं काटे गए। जेल प्रशासन की तरफ से कोई लापरवाही नहीं बरती गई।
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- अरुण प्रताप सिंह, जेल अधीक्षक गौतमबुद्धनगर
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- नाबालिग से जुड़े मामले में कई बार बरतीं गईं लापरवाही
- रिहाई रजिस्टर देख जेल प्रशासन ने कहा 21 को हुई मौत
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। 13 अप्रैल को फेज-1 थाने से चाकू समेत गिरफ्तार कर जेल भेजे गए कथित नाबालिग की मौत के मामले में कई बार लापरवाही बरती गई। किशोर की गिरफ्तारी के दौरान उसकी आयु 19 साल दशार्यी गई थी। परिजनों का कहना है कि पोस्टमार्टम के दौरान किशोर को 21 साल का दर्शाया गया। इसके अलावा जेल प्रशासन ने किशोर की जमानत 21 अप्रैल को और परवाना अगले दिन आने के कारण रिहाई 22 अप्रैल बताई थी। आमतौर पर रिहाई अगले दिन ही होती है। जबकि अस्पताल में मौत की तिथि 21 अप्रैल बताई गई थी।
अमर उजाला में समाचार प्रकाशित होने के बाद जेल प्रशासन ने रिहाई रजिस्टर की जांच कराई। इसके बाद जेल प्रशासन ने भी किशोर की मौत की तिथि 21 अप्रैल बताई है। परिवार के लोग किशोर की पीटकर हत्या का आरोप लगा रहे हैं। जबकि जेल प्रशासन ने बीमारी से मौत का दावा किया है। किशोर के भाई विनीत ने बताया कि 14 अप्रैल को वह जेल में छोटे भाई से मिलने गया था। उसने कहा था कि कैसे भी करके उसे जेल से छुड़ा लो उसे फंसाया गया है। इसके बाद जमानत होने के बाद 21 अप्रैल की रात वह अपने भाई को रिहा कराने जेल पहुंचा तो उसे बताया गया कि छोटे भाई की तबीयत खराब होने पर मेरठ अस्पताल में भर्ती कराया गया है। विनीत 21 अप्रैल को देर रात मेरठ के अस्पताल पहुंचा तो उसे बताया गया कि छोटे भाई की मौत हो चुकी है। इसके बाद पोस्टमार्टम में काफी देरी हुई। पोस्टमार्टम 23 अप्रैल को किया गया। परिजनों का कहना है कि अब तक पोस्टमार्टम रिपोर्ट की जानकारी उन्हें नहीं दी गई है। पुलिस के अलावा जेल के स्तर से भी लापरवाही बरती गई है। उन्होंने जेल में बंदियो के हमले में मौत की आशंका जताई है और कहा कि इस मामले की न्यायिक जांच और कार्रवाई की जानी चाहिए।
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परिजन के सवाल ...
- पुलिस ने गिरफ्तारी की सूचना क्यों नहीं दी।
- बीमारी की सूचना कॉल कर क्यों नहीं दी।
- बाल किसने और क्यों काटे, चोट के निशान कैसे लगे।
- आयु के संबंध में परिजन से पुष्टि क्यों नहीं की गई।
- मौत की तिथि को लेकर असमंजस क्यों हुआ।
बंदी की बीमारी की सूचना उसके भाई को दी गई। तभी उसका भाई मेरठ अस्पताल पहुंचा था। 21 अप्रैल को जमानत मिली लेकिन 22 अप्रैल को परवाना आने पर मौत से लगभग आधा घंटा पहले अस्पताल में उपचार के दौरान रिहाई की गई। हेपेटाइटिस बी व सी आदि के कारण लिवर खराब होने से रिहाई के आधे घंटे बाद बंदी की मौत हुई है। किशोर के बाल जेल में नहीं काटे गए। जेल प्रशासन की तरफ से कोई लापरवाही नहीं बरती गई।
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- अरुण प्रताप सिंह, जेल अधीक्षक गौतमबुद्धनगर