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उद्यमी-----------
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कारोबार विस्तार को तरस
रहे शहर के सैकड़ों उद्यमी
- एमएसएमई ने मुद्दे को प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी के समक्ष रखा
अमर उजाला ब्यूरो
नोएडा। कारोबार विस्तार को लेकर शहर के हजारों उद्यमी तरस रहे हैं। उनकी सुनने वाला कोई नहीं है। प्राधिकरण से लेकर जिला प्रशासन में उद्यमी संगठन इसे लेकर गुहार लगा चुके हैं। मुख्यमंत्री व प्रमुख सचिव तक शिकायती पत्र जा चुके हैं। एमएसएमई ने एक बार फिर इस मुद्दे को प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी के समक्ष रखा है।
1976 में औद्योगिक विकास के नाम पर शहर की स्थापना की गई थी। यहां उद्योगों को तीन फेज में बसाया गया। लुभावने व भविष्य की परिकल्पना को देखते हुए उद्यमियों ने दिल्ली, हरियाणा को छोड़कर नोएडा में अपने उद्योग लगाए। लेकिन यहां उद्यम का विस्तार तो नहीं किया गया, बल्कि प्रॉपर्टी डीलरों ने यहां के बाजार को घेर लिया। उनका धड़ल्ले से विस्तार हुआ। फरवरी-2018 में लखनऊ में आयोजित ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी में करोड़ों रुपये के निवेश पर हस्ताक्षर किए गए, जिसमें एमएसएमई उद्यमियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा।
एमएसएमई इंडस्ट्रियल एसोसिएशन अध्यक्ष सुरेंद्र नाहटा ने बताया कि यहां के उद्यमी लाखों लोगों को रोजगार दे रहे हैं। उद्योग लगाते समय प्राधिकरण ने इन उद्यमियों को 114, 171, 200, 208, 250, 400 या उससे अधिक वर्ग मीटर के औद्योगिक भूखंड आवंटित किए। इन सभी के परिवारों का विस्तार भी हुआ। लेकिन प्राधिकरण ने निवेश करने वाले उद्यमियों को इनकी जरूरत के मुताबिक उद्योगों का विस्तार करने के लिए औद्योगिक भूखंड आवंटित नहीं किए। उन्होंने मंगलवार को प्राधिकरण से मांग की कि पुराने उद्यमियों को विस्तार के लिए भूखंड का आवंटन किया जाए, ताकि वह शहर में निवेश बढ़ा सकें।
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उद्यम विस्तार के लिए वर्षों से उद्योग लगाने वाले उद्यमियों को उनके अनुसार व साक्षात्कार के जरिये भूखंड आवंटित होने चाहिए। ताकि वह अपनी समस्या प्राधिकरण के समक्ष रख सकें। साथ ही निवेश को दोगुना या उससे कहीं ज्यादा कर सकें। समस्या यह है आवंटन ऐसे स्थानों पर मिल रहा है, जहां जरूरत नहीं है।
- सुरेंद्र नाहटा, अध्यक्ष, एमएसएमई इंडस्ट्रियल एसोसिएशन
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रहे शहर के सैकड़ों उद्यमी
- एमएसएमई ने मुद्दे को प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी के समक्ष रखा
अमर उजाला ब्यूरो
नोएडा। कारोबार विस्तार को लेकर शहर के हजारों उद्यमी तरस रहे हैं। उनकी सुनने वाला कोई नहीं है। प्राधिकरण से लेकर जिला प्रशासन में उद्यमी संगठन इसे लेकर गुहार लगा चुके हैं। मुख्यमंत्री व प्रमुख सचिव तक शिकायती पत्र जा चुके हैं। एमएसएमई ने एक बार फिर इस मुद्दे को प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी के समक्ष रखा है।
1976 में औद्योगिक विकास के नाम पर शहर की स्थापना की गई थी। यहां उद्योगों को तीन फेज में बसाया गया। लुभावने व भविष्य की परिकल्पना को देखते हुए उद्यमियों ने दिल्ली, हरियाणा को छोड़कर नोएडा में अपने उद्योग लगाए। लेकिन यहां उद्यम का विस्तार तो नहीं किया गया, बल्कि प्रॉपर्टी डीलरों ने यहां के बाजार को घेर लिया। उनका धड़ल्ले से विस्तार हुआ। फरवरी-2018 में लखनऊ में आयोजित ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी में करोड़ों रुपये के निवेश पर हस्ताक्षर किए गए, जिसमें एमएसएमई उद्यमियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा।
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एमएसएमई इंडस्ट्रियल एसोसिएशन अध्यक्ष सुरेंद्र नाहटा ने बताया कि यहां के उद्यमी लाखों लोगों को रोजगार दे रहे हैं। उद्योग लगाते समय प्राधिकरण ने इन उद्यमियों को 114, 171, 200, 208, 250, 400 या उससे अधिक वर्ग मीटर के औद्योगिक भूखंड आवंटित किए। इन सभी के परिवारों का विस्तार भी हुआ। लेकिन प्राधिकरण ने निवेश करने वाले उद्यमियों को इनकी जरूरत के मुताबिक उद्योगों का विस्तार करने के लिए औद्योगिक भूखंड आवंटित नहीं किए। उन्होंने मंगलवार को प्राधिकरण से मांग की कि पुराने उद्यमियों को विस्तार के लिए भूखंड का आवंटन किया जाए, ताकि वह शहर में निवेश बढ़ा सकें।
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उद्यम विस्तार के लिए वर्षों से उद्योग लगाने वाले उद्यमियों को उनके अनुसार व साक्षात्कार के जरिये भूखंड आवंटित होने चाहिए। ताकि वह अपनी समस्या प्राधिकरण के समक्ष रख सकें। साथ ही निवेश को दोगुना या उससे कहीं ज्यादा कर सकें। समस्या यह है आवंटन ऐसे स्थानों पर मिल रहा है, जहां जरूरत नहीं है।
- सुरेंद्र नाहटा, अध्यक्ष, एमएसएमई इंडस्ट्रियल एसोसिएशन