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ओवरलोड डंपरों पर रोक के लिए सीएम विंडो में दी शिकायत
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ओवरलोड डंपरों पर रोक के लिए सीएम विंडो में दी शिकायत
फिरोजपुर झिरका। दिल्ली-अलवर मार्ग पर ओवरलोड डंपरों की आवाजाही को सड़क हादसों का कारण बताते हुए सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस पर रोक लगाने की मांग की है। मामले में जल्द कार्रवाई नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी भी दी है। सरकार और जिला प्रशासन की ओर से ओवरलोड डंपरों पर पूरी तरह पाबंदी लगाने के आदेश के बाद भी ओवर लोड डंपरों की आवाजाही पर अभी तक रोक नहीं लगाया जा सका है। इससे लोगों को जान-जोखिम में डालकर आना-जाना करना पड़ रहा है। इस संबंध में सामाजिक कार्यकर्ताओं ने सीएम विंडो पर शिकायत देकर इस पर रोक लगाने की मांग की है। इन्होंने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही इस पर नहीं रोक लगाया गया तो वे स्थानीय पुलिस के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन करेंगे। सामाजिक कार्यकर्ता उमर मोहम्मद, जाकिर हुसैन, खलील, नसीम अहमद, जावेद, नसीब खां, फखरुद्दीन ने सीएम विंडो को भेजी शिकायत में बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने हरियाणा के सभी पहाड़ों के खनन पर वर्ष 1998 से रोक लगा रखा है। राजस्थान से ओवरलोड डंपर मेवात की सीमा से गुजरते हैं।
हरियाणा की सीमा में इन डंपरों के प्रवेश पर रोक लगाने के लिए पुलिस की ओर से तिगरा, मुण्डाका समेत तीन नांके लगाए गए हैं। सामाजिक कार्यकर्ता जाकिर ने बताया कि इसकी वजह से पिछले चार साल में जिले के कई लोगों की सड़क दुर्घटना में मौत हो चुकी है। उन्होंने इसके लिए पुलिस पर मिलीभगत का भी आरोप लगाया। खालिद ने कहा कि ओवरलोड डंपरों के कारण रात में दिल्ली अलवर मार्ग से छोटे वाहनों का गुजरना जान को जोखिम में डालने के समान है। उन्होंने मुख्यमंत्री से इस पर रोक लगाने की अपील करते हुए चेतावनी दी है कि यदि जल्द इस पर कार्रवाई नहीं की गई तो बड़ा आंदोलन किया जाएगा।
इस संबंध में फिरोजपुर झिरका थाना प्रभारी ने कहा कि पुलिस जितना हो सकता है ओवरलोड डंपरों पर रोक लगा रही है। पुलिस नांके अपराध को रोकने के लिए लगाए गए हैं। उन्होंने पुलिस पर मिलीभगत के आरोप को अनुचित बताया।
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फिरोजपुर झिरका। दिल्ली-अलवर मार्ग पर ओवरलोड डंपरों की आवाजाही को सड़क हादसों का कारण बताते हुए सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस पर रोक लगाने की मांग की है। मामले में जल्द कार्रवाई नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी भी दी है। सरकार और जिला प्रशासन की ओर से ओवरलोड डंपरों पर पूरी तरह पाबंदी लगाने के आदेश के बाद भी ओवर लोड डंपरों की आवाजाही पर अभी तक रोक नहीं लगाया जा सका है। इससे लोगों को जान-जोखिम में डालकर आना-जाना करना पड़ रहा है। इस संबंध में सामाजिक कार्यकर्ताओं ने सीएम विंडो पर शिकायत देकर इस पर रोक लगाने की मांग की है। इन्होंने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही इस पर नहीं रोक लगाया गया तो वे स्थानीय पुलिस के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन करेंगे। सामाजिक कार्यकर्ता उमर मोहम्मद, जाकिर हुसैन, खलील, नसीम अहमद, जावेद, नसीब खां, फखरुद्दीन ने सीएम विंडो को भेजी शिकायत में बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने हरियाणा के सभी पहाड़ों के खनन पर वर्ष 1998 से रोक लगा रखा है। राजस्थान से ओवरलोड डंपर मेवात की सीमा से गुजरते हैं।
हरियाणा की सीमा में इन डंपरों के प्रवेश पर रोक लगाने के लिए पुलिस की ओर से तिगरा, मुण्डाका समेत तीन नांके लगाए गए हैं। सामाजिक कार्यकर्ता जाकिर ने बताया कि इसकी वजह से पिछले चार साल में जिले के कई लोगों की सड़क दुर्घटना में मौत हो चुकी है। उन्होंने इसके लिए पुलिस पर मिलीभगत का भी आरोप लगाया। खालिद ने कहा कि ओवरलोड डंपरों के कारण रात में दिल्ली अलवर मार्ग से छोटे वाहनों का गुजरना जान को जोखिम में डालने के समान है। उन्होंने मुख्यमंत्री से इस पर रोक लगाने की अपील करते हुए चेतावनी दी है कि यदि जल्द इस पर कार्रवाई नहीं की गई तो बड़ा आंदोलन किया जाएगा।
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इस संबंध में फिरोजपुर झिरका थाना प्रभारी ने कहा कि पुलिस जितना हो सकता है ओवरलोड डंपरों पर रोक लगा रही है। पुलिस नांके अपराध को रोकने के लिए लगाए गए हैं। उन्होंने पुलिस पर मिलीभगत के आरोप को अनुचित बताया।
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