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कृषि शिक्षा
Updated Tue, 21 Aug 2018 11:36 PM IST
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किताबी ज्ञान के बाद खेती फायदे का सौदा
कृषि में पढ़ाई के कई विकल्प, नौकरी और व्यवसाय की खुलेगी राह
प्रगति मिश्रा
नोएडा। आम के आम और गुठलियों के भी दाम यह कहावत तो आपने सुनी ही होगी। लेकिन जो लोग आम या कोई और फल सब्जी उगाते हैं, कई बार उन्हें अपने हिस्से के दाम भी नहीं मिल पाते हैं। भारत एक कृषि प्रधान देश है। लेकिन कृषि के तरीके आज भी हमारे देश में पुराने ही हैं। जिसके चलते खेती, किसानी से जुड़े लोगों को ज्यादा लाभ नहीं मिल पाता है। कृषि से जुड़े अधिकांश लोग इस क्षेत्र में बुजुर्गों के अनुभव एवं अपनी मेहनत से आगे बढ़ते हैं। यदि इस क्षेत्र में थोड़ा ज्ञान हासिल कर लिया जाए तो लाभ की संभावनाएं बढ़ जाती हैं। एमिटी एग्रीकल्चर इंस्टीट्यूट के शिक्षक अभिषेक शुक्ला के अनुसार, कृषि ऐसा क्षेत्र है जिसकी उपयोगिता कभी कम नहीं होती है।
कृषि के क्षेत्र में हाई स्कूल से लेकर परास्नातक, पीएचडी आदि कोर्स करने के विकल्प मौजूद हैं। जिन लोगों का व्यवसाय कृषि है और वह इसी क्षेत्र में जीवनयापन करना चाहते हैं, तो आम कोर्स करने की बजाय कृषि से पढ़ाई का विकल्प चुन सकते हैं। इस विषय से पढ़कर खेतों की पैदावार बढ़ाने के लिए नए गुर सीख सकते हैं। यदि कृषि व्यापक स्तर पर सही जानकारी के साथ किया जाए, तो यह व्यवसाय से कम नहीं है। यह ऐसा क्षेत्र है जिसकी जरूरत कभी खत्म नहीं होती है। ऐसे में इसमें आगे बढ़ने की अपार संभावनाएं हैं।
एनआईओएस (नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ओपन स्कूल) के चेयरमैन प्रो. चंद्र भूषण के अनुसार, कृषि से जुड़े लोगों के लिए जानकारी का अभाव अक्सर नुकसान का कारण बनता है। जैसे आम धारणा है कि खेत में खाद अच्छा डालो तो फसल अच्छी होगी। लेकिन जमीन अलग-अलग तरह की होती है। उनकी जरूरतें अलग होती हैं। यदि जरूरत से अधिक खाद मिले तो फसल को फायदे की जगह नुकसान भी पहुंच सकता है। इसी तरह फसल को कितना पानी देना है, कब देना है आदि बातें जानना बहुत जरूरी हैं। ओपन स्कूल में कृषि विषय में ही हाईस्कूल और इंटरमीडिएट करने का विकल्प दिया जाता है। यदि छात्र इस विषय से ही आगे पढ़ाई करना चाहते हैं तो अन्य संस्थानों में इंटर के बाद दाखिला लेने का विकल्प रहता है। कृषि विषय के छात्र इसी विषय से स्नातक, परास्नातक आदि कोर्स कर सकते हैं।
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अतिरिक्त कमाई के भी मिलेंगे मौके
प्रो. चंद्र भूषण शर्मा के अनुसार, छात्रों को अतिरिक्त कमाई करने के भी कई मौके मिलते हैं। कृषि का एक निश्चित समय होता है। उस समयावधि तक किसानों के पास बहुत काम होता है और वह हर वक्त व्यस्त रहते हैं। उसके बाद कई महीने ऐसे होते हैं जब उनके पास काफी वक्त होता है। वक्त का सही इस्तेमाल कर अतिरिक्त कमाई करने के लिए हम उन्हें ट्रेनिंग देते हैं। हम छात्रों को मुर्गी पालन, मधुमक्खी पालन आदि की जानकारी भी देते हैं।
जॉब और स्टार्ट अप के रास्ते भी खुलेंगे
अभिषेक शुक्ला के अनुसार, कृषि की पढ़ाई का उद्देश्य सिर्फ खेती करना ही नहीं है। बीएससी एग्रीकल्चर का कोर्स करने तीन तरह के छात्र आते हैं। एक जो कृषि के गुण सीखकर पैतृक कृषि में हाथ बटाते हैं। एक जो इसी विषय से परास्नातक कोर्स एमबीए, एमसीए करते हैं । साथ ही कुछ ऐसे छात्र होते हैं जो इस क्षेत्र में रिसर्च को प्रमुखता देते हैं, कई बार छात्र विदेशी विश्वविद्यालयों द्वारा स्नातक के बाद कराए जाने वाले कोर्सों में भी दिलचस्पी लेते हैं। इस कोर्स के बाद जॉब की भी कमी नहीं है। कई कंपनियां एग्रीकल्चर से स्नातक, परास्नातक कोर्स करने वालों को अच्छे पैकेज पर जॉब ऑफर करती हैं।
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कृषि में पढ़ाई के कई विकल्प, नौकरी और व्यवसाय की खुलेगी राह
प्रगति मिश्रा
नोएडा। आम के आम और गुठलियों के भी दाम यह कहावत तो आपने सुनी ही होगी। लेकिन जो लोग आम या कोई और फल सब्जी उगाते हैं, कई बार उन्हें अपने हिस्से के दाम भी नहीं मिल पाते हैं। भारत एक कृषि प्रधान देश है। लेकिन कृषि के तरीके आज भी हमारे देश में पुराने ही हैं। जिसके चलते खेती, किसानी से जुड़े लोगों को ज्यादा लाभ नहीं मिल पाता है। कृषि से जुड़े अधिकांश लोग इस क्षेत्र में बुजुर्गों के अनुभव एवं अपनी मेहनत से आगे बढ़ते हैं। यदि इस क्षेत्र में थोड़ा ज्ञान हासिल कर लिया जाए तो लाभ की संभावनाएं बढ़ जाती हैं। एमिटी एग्रीकल्चर इंस्टीट्यूट के शिक्षक अभिषेक शुक्ला के अनुसार, कृषि ऐसा क्षेत्र है जिसकी उपयोगिता कभी कम नहीं होती है।
कृषि के क्षेत्र में हाई स्कूल से लेकर परास्नातक, पीएचडी आदि कोर्स करने के विकल्प मौजूद हैं। जिन लोगों का व्यवसाय कृषि है और वह इसी क्षेत्र में जीवनयापन करना चाहते हैं, तो आम कोर्स करने की बजाय कृषि से पढ़ाई का विकल्प चुन सकते हैं। इस विषय से पढ़कर खेतों की पैदावार बढ़ाने के लिए नए गुर सीख सकते हैं। यदि कृषि व्यापक स्तर पर सही जानकारी के साथ किया जाए, तो यह व्यवसाय से कम नहीं है। यह ऐसा क्षेत्र है जिसकी जरूरत कभी खत्म नहीं होती है। ऐसे में इसमें आगे बढ़ने की अपार संभावनाएं हैं।
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एनआईओएस (नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ओपन स्कूल) के चेयरमैन प्रो. चंद्र भूषण के अनुसार, कृषि से जुड़े लोगों के लिए जानकारी का अभाव अक्सर नुकसान का कारण बनता है। जैसे आम धारणा है कि खेत में खाद अच्छा डालो तो फसल अच्छी होगी। लेकिन जमीन अलग-अलग तरह की होती है। उनकी जरूरतें अलग होती हैं। यदि जरूरत से अधिक खाद मिले तो फसल को फायदे की जगह नुकसान भी पहुंच सकता है। इसी तरह फसल को कितना पानी देना है, कब देना है आदि बातें जानना बहुत जरूरी हैं। ओपन स्कूल में कृषि विषय में ही हाईस्कूल और इंटरमीडिएट करने का विकल्प दिया जाता है। यदि छात्र इस विषय से ही आगे पढ़ाई करना चाहते हैं तो अन्य संस्थानों में इंटर के बाद दाखिला लेने का विकल्प रहता है। कृषि विषय के छात्र इसी विषय से स्नातक, परास्नातक आदि कोर्स कर सकते हैं।
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अतिरिक्त कमाई के भी मिलेंगे मौके
प्रो. चंद्र भूषण शर्मा के अनुसार, छात्रों को अतिरिक्त कमाई करने के भी कई मौके मिलते हैं। कृषि का एक निश्चित समय होता है। उस समयावधि तक किसानों के पास बहुत काम होता है और वह हर वक्त व्यस्त रहते हैं। उसके बाद कई महीने ऐसे होते हैं जब उनके पास काफी वक्त होता है। वक्त का सही इस्तेमाल कर अतिरिक्त कमाई करने के लिए हम उन्हें ट्रेनिंग देते हैं। हम छात्रों को मुर्गी पालन, मधुमक्खी पालन आदि की जानकारी भी देते हैं।
जॉब और स्टार्ट अप के रास्ते भी खुलेंगे
अभिषेक शुक्ला के अनुसार, कृषि की पढ़ाई का उद्देश्य सिर्फ खेती करना ही नहीं है। बीएससी एग्रीकल्चर का कोर्स करने तीन तरह के छात्र आते हैं। एक जो कृषि के गुण सीखकर पैतृक कृषि में हाथ बटाते हैं। एक जो इसी विषय से परास्नातक कोर्स एमबीए, एमसीए करते हैं । साथ ही कुछ ऐसे छात्र होते हैं जो इस क्षेत्र में रिसर्च को प्रमुखता देते हैं, कई बार छात्र विदेशी विश्वविद्यालयों द्वारा स्नातक के बाद कराए जाने वाले कोर्सों में भी दिलचस्पी लेते हैं। इस कोर्स के बाद जॉब की भी कमी नहीं है। कई कंपनियां एग्रीकल्चर से स्नातक, परास्नातक कोर्स करने वालों को अच्छे पैकेज पर जॉब ऑफर करती हैं।