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- काम न रोकने पर एनजीटी में दी जा सकती है चुनौती
Updated Sat, 08 Dec 2018 11:39 PM IST
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ध्वस्तीकरण का काम रोकने की अपील
दक्षिणी दिल्ली में सात सरकारी कॉलोनियों के पुनर्विकास का मामला
एनजीओ ने कहा, काम न रोकने पर एनजीटी में दी जाएगी चुनौती
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दक्षिणी दिल्ली में सात सरकारी कॉलोनियों के पुनर्विकास मामले मे गैर सरकारी संस्था चेतना ने पुन: सरोजनी नगर और त्यागराज कॉलोनी में पुराने भवनों को गिराने के काम पर रोक लगाने की अपील की है।
चेतना ने शनिवार को राष्ट्रीय भवन निर्माण निगम (एनबीसीसी) और केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (सीपीडब्ल्यूडी) को खत लिखा है। इसमें कहा गया है कि भवनों के धवस्तीकरण का काम दिल्ली उच्च न्यायालय और नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के जरिए यथास्थिति रखने के आदेश का उल्लंघन है। चेतना ने प्राधिकरणों को चेताया है कि यदि वे काम पर रोक नहीं लगाते हैं तो यह मामला एनजीटी में फिर से उठाया जाएगा।
चेतना के अध्यक्ष व अधिवक्ता अनिल सूद ने कहा कि दिल्ली उच्च न्यायालय और एनजीटी ने अपने आदेश में यह स्पष्ट किया था कि परियोजना प्रस्तावक सुनवाई तक यथास्थिति बरकरार रखें। इसके बावजूद परियोजना प्रस्तावकों के जरिए भवनों के धवस्तीकरण का काम जारी है। यह स्पष्ट तौर पर आदेश का उल्लंघन है। एनजीटी जाने से पहले इन दोनों प्राधिकरणों को इस मामले में सूचित कर दिया गया है। यदि प्राधिकरण काम पर रोक नहीं लगाते हैं तो इसे एनजीटी में उठाया जाएगा।
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दक्षिणी दिल्ली में सात सरकारी कॉलोनियों के पुनर्विकास का मामला
एनजीओ ने कहा, काम न रोकने पर एनजीटी में दी जाएगी चुनौती
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दक्षिणी दिल्ली में सात सरकारी कॉलोनियों के पुनर्विकास मामले मे गैर सरकारी संस्था चेतना ने पुन: सरोजनी नगर और त्यागराज कॉलोनी में पुराने भवनों को गिराने के काम पर रोक लगाने की अपील की है।
चेतना ने शनिवार को राष्ट्रीय भवन निर्माण निगम (एनबीसीसी) और केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (सीपीडब्ल्यूडी) को खत लिखा है। इसमें कहा गया है कि भवनों के धवस्तीकरण का काम दिल्ली उच्च न्यायालय और नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के जरिए यथास्थिति रखने के आदेश का उल्लंघन है। चेतना ने प्राधिकरणों को चेताया है कि यदि वे काम पर रोक नहीं लगाते हैं तो यह मामला एनजीटी में फिर से उठाया जाएगा।
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चेतना के अध्यक्ष व अधिवक्ता अनिल सूद ने कहा कि दिल्ली उच्च न्यायालय और एनजीटी ने अपने आदेश में यह स्पष्ट किया था कि परियोजना प्रस्तावक सुनवाई तक यथास्थिति बरकरार रखें। इसके बावजूद परियोजना प्रस्तावकों के जरिए भवनों के धवस्तीकरण का काम जारी है। यह स्पष्ट तौर पर आदेश का उल्लंघन है। एनजीटी जाने से पहले इन दोनों प्राधिकरणों को इस मामले में सूचित कर दिया गया है। यदि प्राधिकरण काम पर रोक नहीं लगाते हैं तो इसे एनजीटी में उठाया जाएगा।
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