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यमुना एक्सप्रेसवे पर चिकित्सा बीमा के साथ शुरू होगा सफर, ये है योजना
अरविंद सिंह, अमर उजाला, ग्रेटर नोएडा
Updated Thu, 06 Dec 2018 01:11 AM IST
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यमुना एक्सप्रेसवे पर सफर करने वालों के लिए यीडा ने अच्छी पहल की है। एक्सप्रेसवे पर चढ़ते ही वाहन चालकों का चिकित्सा बीमा हो जाएगा। सफर के दौरान अगर सड़क हादसा हो जाता है तो वाहन चालक के इलाज का खर्च नहीं लगेगा, बल्कि इंश्योरेंस कंपनी वहन करेगी। इसके एवज में वाहन चालक को टोल के साथ सिर्फ दो-चार रुपये ही देने होंगे। इस मसले पर यीडा की इंश्योरेंस कंपनियों से बातचीत चल रही है और बहुत जल्द यह सुविधा मिल सकती है।
दरअसल, यमुना एक्सप्रेसवे पर वाहनों की संख्या लगातार बढ़ रही है। 2012 में 29.51 लाख वाहन साल भर में गुजरे थे। 2016 में बढ़कर 1.85 करोड़ और 2017 में दो करोड़ से अधिक वाहन गुजरे हैं। इस साल यह संख्या और भी बढ़ सकती है। 2012 में इसके शुरू होने के बाद से अब तक पांच हजार से अधिक हादसे हुए हैं। इसकी बड़ी वजह ओवर स्पीड है। 2012 में 3.87 लाख वाहन ने गति सीमा को तोड़ी थी, जो 2017 में बढ़कर 24.45 लाख पर पहुंच गई।
प्राधिकरण के मुताबिक, कई बार ऐसी स्थिति बन जाती है कि हादसा ग्रस्त व्यक्ति के पास निजी अस्पताल में इलाज के लिए पैसे नहीं होते। उनके पास कोई मेडिकल कार्ड भी नहीं होता। इससे उन्हें इलाज में परेशानी हो जाती है। अगर किसी के साथ हादसा होता है तो उसे अच्छे निजी अस्पताल में इलाज कराने में परेशानी न हो, इसे देखते हुए बीमा कराने का फैसला लिया गया है।
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टोल कंपनियों से बातचीत चल रही है। ग्रेटर नोएडा या आगरा की तरफ से चढ़ते ही जैसे टोल शुल्क देगा उस पर दो-चार रुपये अतिरिक्त शुल्क ले लिया जाएगा। उसके बाद उसका चिकित्सा बीमा का लाभ मिल सकेगा।
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दरअसल, यमुना एक्सप्रेसवे पर वाहनों की संख्या लगातार बढ़ रही है। 2012 में 29.51 लाख वाहन साल भर में गुजरे थे। 2016 में बढ़कर 1.85 करोड़ और 2017 में दो करोड़ से अधिक वाहन गुजरे हैं। इस साल यह संख्या और भी बढ़ सकती है। 2012 में इसके शुरू होने के बाद से अब तक पांच हजार से अधिक हादसे हुए हैं। इसकी बड़ी वजह ओवर स्पीड है। 2012 में 3.87 लाख वाहन ने गति सीमा को तोड़ी थी, जो 2017 में बढ़कर 24.45 लाख पर पहुंच गई।
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प्राधिकरण के मुताबिक, कई बार ऐसी स्थिति बन जाती है कि हादसा ग्रस्त व्यक्ति के पास निजी अस्पताल में इलाज के लिए पैसे नहीं होते। उनके पास कोई मेडिकल कार्ड भी नहीं होता। इससे उन्हें इलाज में परेशानी हो जाती है। अगर किसी के साथ हादसा होता है तो उसे अच्छे निजी अस्पताल में इलाज कराने में परेशानी न हो, इसे देखते हुए बीमा कराने का फैसला लिया गया है।
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टोल कंपनियों से बातचीत चल रही है। ग्रेटर नोएडा या आगरा की तरफ से चढ़ते ही जैसे टोल शुल्क देगा उस पर दो-चार रुपये अतिरिक्त शुल्क ले लिया जाएगा। उसके बाद उसका चिकित्सा बीमा का लाभ मिल सकेगा।
यमुना एक्सप्रेसवे पर हुए हादसे
वर्ष हादसे मौतें
2012 275 33
2013 896 148
2014 771 98
2015 919 99
2016 1219 105
2017 763 110
जनवरी से अगस्त तक हादसे
माह हादसे मौत घायल
जनवरी 37 4 78
फरवरी 32 4 91
मार्च 39 11 108
अप्रैल 54 11 143
मई 94 7 147
जून 85 10 212
जुलाई 62 19 152
अगस्त 31 5 84
इंश्योरेंस कंपनियों से बातचीत चल रही हैं। उन्हें यह प्रस्ताव समझ में आ गया है। किसी कंपनी के साथ जल्द ही करार कर लिया जाएगा। इसके बाद एक्सप्रेसवे पर सफर करने वाले हर वाहन चालक का बीमा हो सकेगा।
- डॉ. अरुणवीर सिंह, सीईओ यमुना प्राधिकरण
वर्ष हादसे मौतें
2012 275 33
2013 896 148
2014 771 98
2015 919 99
2016 1219 105
2017 763 110
जनवरी से अगस्त तक हादसे
माह हादसे मौत घायल
जनवरी 37 4 78
फरवरी 32 4 91
मार्च 39 11 108
अप्रैल 54 11 143
मई 94 7 147
जून 85 10 212
जुलाई 62 19 152
अगस्त 31 5 84
इंश्योरेंस कंपनियों से बातचीत चल रही हैं। उन्हें यह प्रस्ताव समझ में आ गया है। किसी कंपनी के साथ जल्द ही करार कर लिया जाएगा। इसके बाद एक्सप्रेसवे पर सफर करने वाले हर वाहन चालक का बीमा हो सकेगा।
- डॉ. अरुणवीर सिंह, सीईओ यमुना प्राधिकरण