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राहुल व केजरीवाल की नजदीकी दे रही सियासी उलटफेर का संकेत
Updated Sat, 01 Dec 2018 07:08 AM IST
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राहुल, केजरीवाल की नजदीकी दे रही सियासी उलटफेर का संकेत
- किसान रैली में कांग्रेस व आप के सुप्रीमो पहली बार साथ-साथ मंच पर दिखे
-दोनों के बीच तल्ख सियासी रिश्तों में सुधार आने की बढ़ी उम्मीद
संतोष कुमार
नई दिल्ली। किसान रैली कांग्रेस व आम आदमी पार्टी (आप) के बीच अंदरखाने में पक रही सियासी खिचड़ी की तरफ भी इशारा कर गई। लंबे अर्से बाद शुक्रवार को कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने आप संयोजक व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के साथ न सिर्फ मंच साझा किया, बल्कि दोनों के बीच जुगलबंदी भी दिखी। सियासी पंडित बता रहे हैं कि दोनों की मुलाकात दिल्ली के सियासी समीकरण में बड़ा उलट-फेर कर सकती है।
इससे पहले कांग्रेस व आप सुप्रीमो एक साथ मंच पर नहीं दिखे हैं। यहां तक कि मौका होने के बाद भी कांग्रेस ने कई बार मंच साझा करने से इंकार तक कर दिया था। जबकि कांग्रेस के सियासी संकट में फंसने पर आप सुर में सुर मिलाती रही। मसला चाहे बहुमत न होने के बाद भी मणिपुर व गोवा में भाजपा के सरकार बनाने का हो या उत्तराखंड व अरूणाचल प्रदेश में पहले की कांग्रेसी सरकारों को भंग करने का। यहां तक कि समर्थन न मांगने के बाद भी आप ने राष्ट्रपति व उपराष्ट्रपति के चुनाव में भी कांग्रेस उम्मीदवार का समर्थन किया था। लेकिन दिल्ली सरकार पर संकट आने पर कांग्रेस चुप्पी साधती रही।
आप के मिजाज में तल्खी बिहार के मुजफ्फरपुर कांड के खिलाफ राष्ट्रीय जनता दल की तरफ से बुलाए गए विरोध प्रदर्शन के दौरान बढ़ी। तेजस्वी यादव के बुलावे पर इसमें मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल व राज्यसभा सदस्य संजय सिंह भी शामिल हुए थे। सूत्र बताते हैं कि उस वक्त कांग्रेस की तरफ से आयोजकों को फोन से सूचना मिली कि केजरीवाल के मंच पर रहने तक राहुल गांधी जंतर मंतर नहीं पहुंचेंगे। ऐसे में इशारे-इशारे में केजरीवाल को मंच से विदा कर दिया गया। उसके बाद राहुल गांधी विरोध प्रदर्शन में पहुंचे। इससे पहले इसी तरह का वाकया कर्नाटक में मुख्यमंत्री पद की शपथ ग्रहण समारोह में भी दिखा। राहुल गांधी ने इस दौरान केजरीवाल के साथ मंच साझा नहीं किया था।
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सूत्रों की मानें तो कांग्रेस व आप के बीच दूरी बनने की बड़ी वजह दिल्ली प्रदेश कांग्रेस के नेताओं का रवैया रहा। प्रदेश कांग्रेस के नेता आप के साथ गठबंधन करने के सख्त खिलाफ थे। इससे शुरुआती नरमी के बाद आप ने भी कांग्रेस को लेकर अपना रुख बदल लिया। राज्य सभा उपसभापति चुनाव के दौरान आप ने कांग्रेस प्रत्याशी को वोट देने की जगह चुनाव का बहिष्कार किया। वहीं, सार्वजनिक तौर पर केजरीवाल समेत सभी वरिष्ठ नेताओं ने एलान किया कि कांग्रेस के साथ किसी तरह को गठबंधन नहीं होगा।
जानकार बताते हैं कि लोक सभा चुनाव से पहले संसद मार्ग पर राहुल व केजरीवाल के मंचीय साझेदारी दिल्ली के सियासी समीकरण में उलट-फेर करने का संकेत दे रही है। चुनाव से पहले दोनों दलों में गठजोड़ का रास्ता खुल सकता है। हालांकि, आप सांसद संजय सिंह इस मसले पर खुलकर बोलने से बचते रहे। लेकिन इतना इशारा जरूर किया कि अगर मोदी को रोकना है तो सभी लोगों को अपने अहम त्यागने होंगे।
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- किसान रैली में कांग्रेस व आप के सुप्रीमो पहली बार साथ-साथ मंच पर दिखे
-दोनों के बीच तल्ख सियासी रिश्तों में सुधार आने की बढ़ी उम्मीद
संतोष कुमार
नई दिल्ली। किसान रैली कांग्रेस व आम आदमी पार्टी (आप) के बीच अंदरखाने में पक रही सियासी खिचड़ी की तरफ भी इशारा कर गई। लंबे अर्से बाद शुक्रवार को कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने आप संयोजक व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के साथ न सिर्फ मंच साझा किया, बल्कि दोनों के बीच जुगलबंदी भी दिखी। सियासी पंडित बता रहे हैं कि दोनों की मुलाकात दिल्ली के सियासी समीकरण में बड़ा उलट-फेर कर सकती है।
इससे पहले कांग्रेस व आप सुप्रीमो एक साथ मंच पर नहीं दिखे हैं। यहां तक कि मौका होने के बाद भी कांग्रेस ने कई बार मंच साझा करने से इंकार तक कर दिया था। जबकि कांग्रेस के सियासी संकट में फंसने पर आप सुर में सुर मिलाती रही। मसला चाहे बहुमत न होने के बाद भी मणिपुर व गोवा में भाजपा के सरकार बनाने का हो या उत्तराखंड व अरूणाचल प्रदेश में पहले की कांग्रेसी सरकारों को भंग करने का। यहां तक कि समर्थन न मांगने के बाद भी आप ने राष्ट्रपति व उपराष्ट्रपति के चुनाव में भी कांग्रेस उम्मीदवार का समर्थन किया था। लेकिन दिल्ली सरकार पर संकट आने पर कांग्रेस चुप्पी साधती रही।
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आप के मिजाज में तल्खी बिहार के मुजफ्फरपुर कांड के खिलाफ राष्ट्रीय जनता दल की तरफ से बुलाए गए विरोध प्रदर्शन के दौरान बढ़ी। तेजस्वी यादव के बुलावे पर इसमें मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल व राज्यसभा सदस्य संजय सिंह भी शामिल हुए थे। सूत्र बताते हैं कि उस वक्त कांग्रेस की तरफ से आयोजकों को फोन से सूचना मिली कि केजरीवाल के मंच पर रहने तक राहुल गांधी जंतर मंतर नहीं पहुंचेंगे। ऐसे में इशारे-इशारे में केजरीवाल को मंच से विदा कर दिया गया। उसके बाद राहुल गांधी विरोध प्रदर्शन में पहुंचे। इससे पहले इसी तरह का वाकया कर्नाटक में मुख्यमंत्री पद की शपथ ग्रहण समारोह में भी दिखा। राहुल गांधी ने इस दौरान केजरीवाल के साथ मंच साझा नहीं किया था।
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सूत्रों की मानें तो कांग्रेस व आप के बीच दूरी बनने की बड़ी वजह दिल्ली प्रदेश कांग्रेस के नेताओं का रवैया रहा। प्रदेश कांग्रेस के नेता आप के साथ गठबंधन करने के सख्त खिलाफ थे। इससे शुरुआती नरमी के बाद आप ने भी कांग्रेस को लेकर अपना रुख बदल लिया। राज्य सभा उपसभापति चुनाव के दौरान आप ने कांग्रेस प्रत्याशी को वोट देने की जगह चुनाव का बहिष्कार किया। वहीं, सार्वजनिक तौर पर केजरीवाल समेत सभी वरिष्ठ नेताओं ने एलान किया कि कांग्रेस के साथ किसी तरह को गठबंधन नहीं होगा।
जानकार बताते हैं कि लोक सभा चुनाव से पहले संसद मार्ग पर राहुल व केजरीवाल के मंचीय साझेदारी दिल्ली के सियासी समीकरण में उलट-फेर करने का संकेत दे रही है। चुनाव से पहले दोनों दलों में गठजोड़ का रास्ता खुल सकता है। हालांकि, आप सांसद संजय सिंह इस मसले पर खुलकर बोलने से बचते रहे। लेकिन इतना इशारा जरूर किया कि अगर मोदी को रोकना है तो सभी लोगों को अपने अहम त्यागने होंगे।