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डीजेबी और मुख्य सचिव पर एनजीटी ने लगाया एक करोड़ रुपये का जुर्माना
Updated Wed, 28 Nov 2018 07:11 AM IST
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डीजेबी और मुख्य सचिव पर एक करोड़ का जुर्माना
- सीवेज संयंत्रों से शोधित पानी का इस्तेमाल नहीं करने पर कार्रवाई
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। नेशनल ग्रीन ट्रिब्युनल (एनजीटी) ने आदेश के बावजूद सीवेज संयंत्र के शोधित पानी का इस्तेमाल न करने के लिए दिल्ली जल बोर्ड (डीजेबी) और दिल्ली के मुख्य सचिव पर एक-एक करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है। पीठ ने कहा कि एक महीने के भीतर यदि इस संबंध में कार्ययोजना नहीं बनाई जाती है तो दो-दो करोड़ रुपये जुर्माना लगाया जाएगा। इसके अलावा पीठ ने देश के सभी राज्यों को भी तीन महीने के भीतर अपनी कार्ययोजना तैयार करने का आदेश दिया है।
जस्टिस आदर्श कुमार गोयल की अध्यक्षता वाली पीठ ने मंगलवार को याची महेश चंद्र सक्सेना के मामले में यह आदेश दिया है। पीठ ने कहा कि कई बार यह आदेश दिया गया कि सीवेज संयंत्रों से शोधित जल का इस्तेमाल पार्कों में बागबानी, छिड़काव व अन्य जगहों और जरूरतों के लिए होना चाहिए। इसके बावजूद ऐसा नहीं किया गया। अब एक महीने में केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के पास जुर्माने की राशि जमा करने के साथ ही इस संबंध में कार्ययोजना तैयार होनी चाहिए।
पीठ ने कहा कि राष्ट्रीय राजधानी समेत देश में हर जगह पानी की किल्लत है। जरूरतों को पूरा करने के लिए भू-जल पर बड़ा दबाव है। ऐसे में बेहद जरूरी है कि पानी का सही इस्तेमाल किया जाए। खासतौर से सीवेज संयंत्रों के शोधित जल का दोबारा इस्तेमाल पार्क व अन्य जरूरतों के लिए किया जाना चाहिए।
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- सीवेज संयंत्रों से शोधित पानी का इस्तेमाल नहीं करने पर कार्रवाई
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। नेशनल ग्रीन ट्रिब्युनल (एनजीटी) ने आदेश के बावजूद सीवेज संयंत्र के शोधित पानी का इस्तेमाल न करने के लिए दिल्ली जल बोर्ड (डीजेबी) और दिल्ली के मुख्य सचिव पर एक-एक करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है। पीठ ने कहा कि एक महीने के भीतर यदि इस संबंध में कार्ययोजना नहीं बनाई जाती है तो दो-दो करोड़ रुपये जुर्माना लगाया जाएगा। इसके अलावा पीठ ने देश के सभी राज्यों को भी तीन महीने के भीतर अपनी कार्ययोजना तैयार करने का आदेश दिया है।
जस्टिस आदर्श कुमार गोयल की अध्यक्षता वाली पीठ ने मंगलवार को याची महेश चंद्र सक्सेना के मामले में यह आदेश दिया है। पीठ ने कहा कि कई बार यह आदेश दिया गया कि सीवेज संयंत्रों से शोधित जल का इस्तेमाल पार्कों में बागबानी, छिड़काव व अन्य जगहों और जरूरतों के लिए होना चाहिए। इसके बावजूद ऐसा नहीं किया गया। अब एक महीने में केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के पास जुर्माने की राशि जमा करने के साथ ही इस संबंध में कार्ययोजना तैयार होनी चाहिए।
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पीठ ने कहा कि राष्ट्रीय राजधानी समेत देश में हर जगह पानी की किल्लत है। जरूरतों को पूरा करने के लिए भू-जल पर बड़ा दबाव है। ऐसे में बेहद जरूरी है कि पानी का सही इस्तेमाल किया जाए। खासतौर से सीवेज संयंत्रों के शोधित जल का दोबारा इस्तेमाल पार्क व अन्य जरूरतों के लिए किया जाना चाहिए।
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