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भवन निर्माण में पर्यावरण मंजूरी की छूट पर हाईकोर्ट ने लगाई रोक
Updated Wed, 28 Nov 2018 07:03 AM IST
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भवन निर्माण में पर्यावरण मंजूरी की छूट पर हाईकोर्ट ने लगाई रोक
- केंद्र सरकार ने 14 व 15 नवंबर को जारी की थी अधिसूचना
- एनजीओ ने याचिका दायर कर अधिसूचनाओं को दी है चुनौती
अमर उजाला ब्यूरो,
नई दिल्ली। हाईकोर्ट ने 50 हजार वर्ग मीटर तक की निर्मित क्षेत्र वाली भवन परियोजनाओं तथा डेढ़ लाख वर्ग मीटर तक की औद्योगिक शेड, शैक्षणिक संस्थानों एवं अस्पताल परियोजनाओं को पर्यावरणीय मंजूरी से छूट देने संबंधित दो अधिसूचनाओं पर रोक लगा दी है। इससे रियल एस्टेट कंपनियों का निर्माण का रास्ता साफ हो गया था।
केंद्र सरकार ने 14 व 15 नवंबर को अधिसूचना जारी कर यह छूट प्रदान की थी। केंद्र सरकार ने स्थानीय निकायों को ही निर्माण की मंजूरी देने का अधिकार दे दिया था जबकि पहले यह मंजूरी राज्य स्तरीय पर्यावरण समिति अथवा जरूरत पड़ने पर पर्यावरण मंत्रालय देता था। इस छूट से संबंधित एक्सक्लूसिव खबर अमर उजाला ने 18 नवंबर 2018 को प्रकाशित की थी।
न्यायमूर्ति रवींद्र भट्ट और न्यायमूर्ति प्रतीक जालान की खंडपीठ ने एक एनजीओ की याचिका पर सुनवाई करते हुए दोनों अधिसूचनाओं पर रोक लगा दी। खंडपीठ ने मंत्रालय से इस मामले में 19 फरवरी 2018 को जवाब मांगा है।
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याचिका दायर कर एनजीओ सोशल एक्शन फोर फॉरेस्ट एंड एनवायर्नमेंट (सेफ) ने आरोप लगाया है अधिसूचना जीवन एवं निजी स्वतंत्रता तथा कानून के समक्ष समानता के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करती हैं। आरोप है कि इन दो हालिया अधिसूचनाओं ने 14 सितंबर 2006 को जारी अधिसूचनाओं में व्यापक संशोधन कर दिया है। मौजूदा प्रावधानों के तहत 20 हजार वर्गमीटर निर्मित क्षेत्र से अधिक क्षेत्र वाली सारी परियोजनाओं को पर्यावरणीय मंजूरी लेनी होती हैं।
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- केंद्र सरकार ने 14 व 15 नवंबर को जारी की थी अधिसूचना
- एनजीओ ने याचिका दायर कर अधिसूचनाओं को दी है चुनौती
अमर उजाला ब्यूरो,
नई दिल्ली। हाईकोर्ट ने 50 हजार वर्ग मीटर तक की निर्मित क्षेत्र वाली भवन परियोजनाओं तथा डेढ़ लाख वर्ग मीटर तक की औद्योगिक शेड, शैक्षणिक संस्थानों एवं अस्पताल परियोजनाओं को पर्यावरणीय मंजूरी से छूट देने संबंधित दो अधिसूचनाओं पर रोक लगा दी है। इससे रियल एस्टेट कंपनियों का निर्माण का रास्ता साफ हो गया था।
केंद्र सरकार ने 14 व 15 नवंबर को अधिसूचना जारी कर यह छूट प्रदान की थी। केंद्र सरकार ने स्थानीय निकायों को ही निर्माण की मंजूरी देने का अधिकार दे दिया था जबकि पहले यह मंजूरी राज्य स्तरीय पर्यावरण समिति अथवा जरूरत पड़ने पर पर्यावरण मंत्रालय देता था। इस छूट से संबंधित एक्सक्लूसिव खबर अमर उजाला ने 18 नवंबर 2018 को प्रकाशित की थी।
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न्यायमूर्ति रवींद्र भट्ट और न्यायमूर्ति प्रतीक जालान की खंडपीठ ने एक एनजीओ की याचिका पर सुनवाई करते हुए दोनों अधिसूचनाओं पर रोक लगा दी। खंडपीठ ने मंत्रालय से इस मामले में 19 फरवरी 2018 को जवाब मांगा है।
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याचिका दायर कर एनजीओ सोशल एक्शन फोर फॉरेस्ट एंड एनवायर्नमेंट (सेफ) ने आरोप लगाया है अधिसूचना जीवन एवं निजी स्वतंत्रता तथा कानून के समक्ष समानता के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करती हैं। आरोप है कि इन दो हालिया अधिसूचनाओं ने 14 सितंबर 2006 को जारी अधिसूचनाओं में व्यापक संशोधन कर दिया है। मौजूदा प्रावधानों के तहत 20 हजार वर्गमीटर निर्मित क्षेत्र से अधिक क्षेत्र वाली सारी परियोजनाओं को पर्यावरणीय मंजूरी लेनी होती हैं।