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अंगदान करने पर परिवार को मिलेगी पांच लाख की मदद
Updated Fri, 23 Nov 2018 07:56 AM IST
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अंगदान पर आश्रितों को पांच लाख की मदद का प्रस्ताव
- देश में अंगदान को बढ़ावा देने के लिए नोटो ने तैयार किया प्रस्ताव
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। देश में अंगदान को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय अंग एवं ऊतक प्रत्यारोपण संगठन (नोटो) आश्रित परिजनों को पांच लाख रुपये की आर्थिक मदद देने की योजना बनाई है। नोटो ने इस प्रस्ताव को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय को भेजा गया है। मंत्रालय ने इसे मंजूरी के लिए भेज दिया है।
नोटो के अनुसार किसी परिवार का सदस्य ब्रेन डेड होता है और वह परिवार का पालन करने वाला मुख्य सदस्य होता है तो उसके आश्रित को चिकित्सीय और शिक्षा के लिए पांच लाख रुपये की मदद दी जाएगी। इस राशि को बतौर बीमा के रुप में दिया जाएगा जो कैशलेस होगा।
हालांकि, इस प्रस्ताव में अभी इस बात पर सहमति नहीं बन पाई है कि आर्थिक मदद किस श्रेणी में दी जाएगी। जानकारों की मानें तो भारत में अंग एवं ऊतक प्रत्यारोपण अधिनियम के तहत किसी भी व्यक्ति को अंगदान के फलस्वरूप आर्थिक मदद करना गैरकानूनी है। इसलिए मंत्रालय अब इसे लेकर विधि मंत्रालय से भी चर्चा करेगा। जानकारों का कहना है कि केंद्र सरकार वाकई इस नियम को जमीन पर उतारती है तो आयुष्मान भारत के बाद विश्व में भारत का ये दूसरी सबसे बड़ी योजना होगी। फिलहाल विश्व में कहीं भी इस तरह का चलन नहीं है।
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- देश में अंगदान को बढ़ावा देने के लिए नोटो ने तैयार किया प्रस्ताव
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। देश में अंगदान को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय अंग एवं ऊतक प्रत्यारोपण संगठन (नोटो) आश्रित परिजनों को पांच लाख रुपये की आर्थिक मदद देने की योजना बनाई है। नोटो ने इस प्रस्ताव को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय को भेजा गया है। मंत्रालय ने इसे मंजूरी के लिए भेज दिया है।
नोटो के अनुसार किसी परिवार का सदस्य ब्रेन डेड होता है और वह परिवार का पालन करने वाला मुख्य सदस्य होता है तो उसके आश्रित को चिकित्सीय और शिक्षा के लिए पांच लाख रुपये की मदद दी जाएगी। इस राशि को बतौर बीमा के रुप में दिया जाएगा जो कैशलेस होगा।
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हालांकि, इस प्रस्ताव में अभी इस बात पर सहमति नहीं बन पाई है कि आर्थिक मदद किस श्रेणी में दी जाएगी। जानकारों की मानें तो भारत में अंग एवं ऊतक प्रत्यारोपण अधिनियम के तहत किसी भी व्यक्ति को अंगदान के फलस्वरूप आर्थिक मदद करना गैरकानूनी है। इसलिए मंत्रालय अब इसे लेकर विधि मंत्रालय से भी चर्चा करेगा। जानकारों का कहना है कि केंद्र सरकार वाकई इस नियम को जमीन पर उतारती है तो आयुष्मान भारत के बाद विश्व में भारत का ये दूसरी सबसे बड़ी योजना होगी। फिलहाल विश्व में कहीं भी इस तरह का चलन नहीं है।
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