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कांग्रेस मुख्यालय के निर्माण को एनजीटी की क्लीनचिट
Updated Fri, 23 Nov 2018 07:55 AM IST
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कांग्रेस मुख्यालय के निर्माण को एनजीटी की क्लीन चिट
- पीठ ने पर्यावरण मंजूरी संबंधी आपत्ति को किया खारिज
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने राष्ट्रीय राजधानी में 9-कोटला रोड पर कांग्रेस मुख्यालय के भवन निर्माण को क्लीन चिट दे दिया है। एनजीटी ने कहा कि भवन निर्माण का दायरा 20 हजार वर्ग मीटर से कम है। वहीं, दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति के मुताबिक इस निर्माण गतिविधि को पर्यावरण मंजूरी की जरूरत नहीं है। जस्टिस आदर्श कुमार गोयल की अध्यक्षता वाली पीठ ने याची विक्रांत तोंगड़ की याचिका का निपटारा करते हुए यह आदेश दिया है। याची का आरोप था कि कांग्रेस मुख्यालय का निर्माण बिना पर्यावरण मंजूरी के किया जा रहा है, जिससे पर्यावरणीय क्षति हो रही है। वहीं, एनजीटी ने कहा कि दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति के 18 सितंबर, 2018 के पत्र से यह स्पष्ट है कि भवन निर्माण का दायरा 20 हजार वर्ग मीटर से कम है और ऐसे निर्माण को किसी मंजूरी की जरूरत नहीं है। वहीं, याची विक्रांत तोंगड़ ने एनजीटी के निर्णय से असहमति जताते हुए कहा है कि उनकी याचिका पर्यावरणीय क्षति रोकने के लिए थी। इस संबंध में कोई आदेश नहीं दिया गया वे इस मामले को अपीलीय प्राधिकरण के पास ले जाएंगे।
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- पीठ ने पर्यावरण मंजूरी संबंधी आपत्ति को किया खारिज
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने राष्ट्रीय राजधानी में 9-कोटला रोड पर कांग्रेस मुख्यालय के भवन निर्माण को क्लीन चिट दे दिया है। एनजीटी ने कहा कि भवन निर्माण का दायरा 20 हजार वर्ग मीटर से कम है। वहीं, दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति के मुताबिक इस निर्माण गतिविधि को पर्यावरण मंजूरी की जरूरत नहीं है। जस्टिस आदर्श कुमार गोयल की अध्यक्षता वाली पीठ ने याची विक्रांत तोंगड़ की याचिका का निपटारा करते हुए यह आदेश दिया है। याची का आरोप था कि कांग्रेस मुख्यालय का निर्माण बिना पर्यावरण मंजूरी के किया जा रहा है, जिससे पर्यावरणीय क्षति हो रही है। वहीं, एनजीटी ने कहा कि दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति के 18 सितंबर, 2018 के पत्र से यह स्पष्ट है कि भवन निर्माण का दायरा 20 हजार वर्ग मीटर से कम है और ऐसे निर्माण को किसी मंजूरी की जरूरत नहीं है। वहीं, याची विक्रांत तोंगड़ ने एनजीटी के निर्णय से असहमति जताते हुए कहा है कि उनकी याचिका पर्यावरणीय क्षति रोकने के लिए थी। इस संबंध में कोई आदेश नहीं दिया गया वे इस मामले को अपीलीय प्राधिकरण के पास ले जाएंगे।