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अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेला 21 कैरेट गोल्ड से तैयार कांगड़ा पेंटिंग दिखा रही हैं देवभूमि हिमाचल की कलाशैली
Updated Wed, 21 Nov 2018 06:51 AM IST
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हिमाचल प्रदेश के ध्यानार्थ
अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेला
गोल्ड से तैयार कांगड़ा पेंटिंग दिखा रही देवभूमि की झलक
पत्थर घिसकर तैयार किए गए रंग बढ़ा रहे हैं पेंटिंग्स की खूबसूरती
अरुण कुमार
नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेले में हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा और लाहौल-स्पीति की लघु चित्रकारी दर्शकों को खूब भा रही है। खास बात ये है कि कांगड़ा पेंटिंग में स्टोन कलर और 21 कैरेट गोल्ड की कलाकारी इन पेंटिंग्स का आकर्षण और बढ़ा रही है। वहीं चीन की सीमा पर स्थित लाहौल-स्पीति की थंका चित्रकारी दर्शकों को गौतमबुद्ध की शिक्षा दे रही है।
प्रगति मैदान के हॉल-12ए में हिमाचल प्रदेश के मंडप में कांगड़ा के चित्रकार कमलजीत और जितेन्द्र कुमार पेंटिंग्स लेकर दर्शकों के समक्ष पहुंचे हैं। कमलजीत ने बताया कि कांगड़ा की लघु चित्रकारी के जरिये उन्होंने पिछले 15 साल में कई पेंटिंग्स बनाईं हैं। वह इस बार 200 साल पुराने कागज पर बनाई गई अद्भुत पेंटिंग्स लेकर पहुंचे हैं। उन्होंने बताया कि पत्थर को घिसकर तैयार किए गए ताजे रंगों का प्रयोग किया गया है। इस पेंटिंग में उन्होंने महाराजा दुष्यंत और शकुंतला के इश्क को बयां किया। इसके साथ ही कई पेंटिंग्स में हिमाचल की प्रकृति, भगवान राधा-कृष्ण, राजा महाराजाओं के दरबार और अन्य दृश्य बनाए गए हैं।
पत्थर से बनाए रंगों को बबूल की गोंद में मिलाकर पेंटिंग में भरा जाता है। पेंटिंग में रंग भरने के बाद चित्रकारी में बनाई गई धातुओं में 21 कैरेट गोल्ड भरा जाता है, जिससे पेंटिंग और आकर्षक हो जाती है।
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लाहौल-स्पीति की थंका पेंटिंग
लाहौल-स्पीति से थंका पेंटिंग लेकर आए दोरजी ने बताया कि इस पेंटिंग को कपड़े पर पत्थर से बनाए गए रंगों से तैयार किया जाता है। उन्होंने बताया कि इस पेंटिंग को बनाने में गोल्ड का प्रयोग किया जाता है, लेकिन बिना गोल्ड के भी इसे बनाया जाता है। इन पेंटिंग्स में खास तौर पर पहाड़ की शैलियों और कला को दर्शाया गया है। उन्होंने हाल में बनाई थंका पेंटिंग में बौद्ध मठ बनाकर लोगों को बौद्ध धर्म की शिक्षा देनी की कोशिश की है।
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अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेला
गोल्ड से तैयार कांगड़ा पेंटिंग दिखा रही देवभूमि की झलक
पत्थर घिसकर तैयार किए गए रंग बढ़ा रहे हैं पेंटिंग्स की खूबसूरती
अरुण कुमार
नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेले में हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा और लाहौल-स्पीति की लघु चित्रकारी दर्शकों को खूब भा रही है। खास बात ये है कि कांगड़ा पेंटिंग में स्टोन कलर और 21 कैरेट गोल्ड की कलाकारी इन पेंटिंग्स का आकर्षण और बढ़ा रही है। वहीं चीन की सीमा पर स्थित लाहौल-स्पीति की थंका चित्रकारी दर्शकों को गौतमबुद्ध की शिक्षा दे रही है।
प्रगति मैदान के हॉल-12ए में हिमाचल प्रदेश के मंडप में कांगड़ा के चित्रकार कमलजीत और जितेन्द्र कुमार पेंटिंग्स लेकर दर्शकों के समक्ष पहुंचे हैं। कमलजीत ने बताया कि कांगड़ा की लघु चित्रकारी के जरिये उन्होंने पिछले 15 साल में कई पेंटिंग्स बनाईं हैं। वह इस बार 200 साल पुराने कागज पर बनाई गई अद्भुत पेंटिंग्स लेकर पहुंचे हैं। उन्होंने बताया कि पत्थर को घिसकर तैयार किए गए ताजे रंगों का प्रयोग किया गया है। इस पेंटिंग में उन्होंने महाराजा दुष्यंत और शकुंतला के इश्क को बयां किया। इसके साथ ही कई पेंटिंग्स में हिमाचल की प्रकृति, भगवान राधा-कृष्ण, राजा महाराजाओं के दरबार और अन्य दृश्य बनाए गए हैं।
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पत्थर से बनाए रंगों को बबूल की गोंद में मिलाकर पेंटिंग में भरा जाता है। पेंटिंग में रंग भरने के बाद चित्रकारी में बनाई गई धातुओं में 21 कैरेट गोल्ड भरा जाता है, जिससे पेंटिंग और आकर्षक हो जाती है।
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लाहौल-स्पीति की थंका पेंटिंग
लाहौल-स्पीति से थंका पेंटिंग लेकर आए दोरजी ने बताया कि इस पेंटिंग को कपड़े पर पत्थर से बनाए गए रंगों से तैयार किया जाता है। उन्होंने बताया कि इस पेंटिंग को बनाने में गोल्ड का प्रयोग किया जाता है, लेकिन बिना गोल्ड के भी इसे बनाया जाता है। इन पेंटिंग्स में खास तौर पर पहाड़ की शैलियों और कला को दर्शाया गया है। उन्होंने हाल में बनाई थंका पेंटिंग में बौद्ध मठ बनाकर लोगों को बौद्ध धर्म की शिक्षा देनी की कोशिश की है।