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चिटेहरा में बनेगा सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट
Updated Mon, 19 Nov 2018 01:12 AM IST
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चिटेहरा में बनेगा सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट
- तीन हेक्टेयर जमीन का किया सर्वे, जल निगम बनाएगा प्लांट
ऋषिपाल सिंह
दादरी। सीवेज की समस्या का समाधान करने के लिए दादरी नगरपालिका परिषद चिटेहरा में जल्द ही सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट बनाएगा। इसके लिए जमीन का सर्वे हो गया है। नगरपालिका के प्रस्ताव पर शासन ने जल निगम को जिम्मेदारी दे दी है।
दरअसल, नगरपालिका परिषद में 25 वार्ड हैं, जिसमें करीब तीन लाख आबादी रहती है। नगर में सीवेज निकासी की समस्या लंबे समय से चली आ रही है। निवासी लंबे समय से एसटीपी की मांग कर रहे थे। इसे देखते हुए दादरी की सीमा पर स्थित गांव चिटेहरा में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट बनाने की योजना है। करीब तीन हेक्टेयर जमीन चिह्नित की गई है। ट्रीटमेंट प्लांट जल निगम बनाएगा। जलनिगम के अधिशासी अधिकारी, नगरपालिका जूनियर इंजीनियर समेत अधिकारियों की टीम ने सर्वे किया है। नगर में सीवर डालने के बाद गंदे पानी की निकासी और जलभराव से निजात मिलेगी।
जल निगम के अधिशासी अधिकारी आरपी सिंह का कहना है कि नगरपालिका परिषद से जमीन का प्रस्ताव मांगा गया है। प्रस्ताव मिलने पर आकलन कर शासन को भेजा जाएगा। धनराशि मिलने पर सीवर का काम शुरू होगा। इसे बनाने में करीब दो साल का समय लगेगा।
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- तीन हेक्टेयर जमीन का किया सर्वे, जल निगम बनाएगा प्लांट
ऋषिपाल सिंह
दादरी। सीवेज की समस्या का समाधान करने के लिए दादरी नगरपालिका परिषद चिटेहरा में जल्द ही सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट बनाएगा। इसके लिए जमीन का सर्वे हो गया है। नगरपालिका के प्रस्ताव पर शासन ने जल निगम को जिम्मेदारी दे दी है।
दरअसल, नगरपालिका परिषद में 25 वार्ड हैं, जिसमें करीब तीन लाख आबादी रहती है। नगर में सीवेज निकासी की समस्या लंबे समय से चली आ रही है। निवासी लंबे समय से एसटीपी की मांग कर रहे थे। इसे देखते हुए दादरी की सीमा पर स्थित गांव चिटेहरा में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट बनाने की योजना है। करीब तीन हेक्टेयर जमीन चिह्नित की गई है। ट्रीटमेंट प्लांट जल निगम बनाएगा। जलनिगम के अधिशासी अधिकारी, नगरपालिका जूनियर इंजीनियर समेत अधिकारियों की टीम ने सर्वे किया है। नगर में सीवर डालने के बाद गंदे पानी की निकासी और जलभराव से निजात मिलेगी।
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जल निगम के अधिशासी अधिकारी आरपी सिंह का कहना है कि नगरपालिका परिषद से जमीन का प्रस्ताव मांगा गया है। प्रस्ताव मिलने पर आकलन कर शासन को भेजा जाएगा। धनराशि मिलने पर सीवर का काम शुरू होगा। इसे बनाने में करीब दो साल का समय लगेगा।
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