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अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेले में चढ़ा बनारस की बौद्धिक संपदा का रंग

Sun, 18 Nov 2018 01:23 AM IST
Updated Sun, 18 Nov 2018 01:23 AM IST
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अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेले में चढ़ा बनारस की बौद्धिक संपदा का रंग
व्यापार मेले में आज से आएंगे आम लोग
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जीआई मंडप में मिट्टी के बर्तनों ने दर्शकों को लुभाया, बनारसी उत्पादों की भी है धूम
अरुण कुमार
नई दिल्ली। भागदौड़ की जिंदगी में फंसे लोग अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेले में पारंपरिक खानपान के तरीकों के प्रति आकर्षण दिखा रहे हैं। मेले में मिट्टी के बर्तनों का जादू दर्शकों पर खूब चढ़ रहा है। प्राचीन कला शैलियों से दर्शकों को अवगत कराने के लिए हॉल नंबर सात में जीआई जियोग्राफिकल इंडिकेशन पवेलियन (भौगोगिक उपदर्शन मंडप) बनाया गया है। यहां बनारस के बौद्धिक संपदा अधिकार प्राप्त उत्पाद विशेष रूप से प्रदर्शित किए गए हैं। शनिवार को मेले के आखिरी व्यावसायिक दिवस पर दर्शकों काफी भीड़ पहुंची। रविवार से मेला आम लोगों के लिए खुल जाएगा और इस दौरान दर्शकों की भारी भीड़ उमड़ने की संभावना है।
हॉल नंबर 7 में उत्तर प्रदेश के बौद्धिक संपदा अधिकार प्राप्त उत्पादों में बनारसी साड़ी, भदोही के कालीन, मेटल रिपोजी क्राफ्ट, बनारस लकड़ी के खिलौने, चांदी पर गुलाबी मीनाकारी, बनारस के कांच के मोती, गाजीपुर वॉल हैंगर, सॉफ्ट स्टोनजाली वर्क, आजमगढ़ के निजामाबाद की ब्लैक पाट्री आदि रखे गए हैं। डॉ. रजनीकांत ने बताया कि बौद्धिक अधिकार के क्षेत्र में भारत में कर्नाटक पहले, महाराष्ट्र दूसरे और उत्तर-प्रदेश तीसरे स्थान पर हैं। उत्तर प्रदेश के 24 क्षेत्रों के उत्पाद इसमें पंजीकृत हैं। इनमें से 10 बनारस और उसके आसपास के क्षेत्रों के हैं। बनारस के राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त कलाकार रामेश्वर सिंह ने बताया कि करीब एक इंच की लकड़ी पर बनाया सितार दर्शकों को खूब भा रहा है। भगवान की दो इंच से एक फुट तक की प्रतिमाएं बेहद खास हैं। इनकी कीमत 100 रुपये से लेकर पांच हजार रुपये तक है। एक दर्शक चंचल ने कहा कि मिट्टी के बर्तन में खाना बनाने का अलग ही आनंद हैं। इसके खाने का स्वाद भी बेहतर होता है। इसीलिए उन्होंने जीआई पेवेलियन से मिट्टी की हांडी और गिलास खरीदे हैं।
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कहीं और नहीं हो सकता निर्माण
डॉ. रजनीकांत ने बताया कि बौद्धिक संपदा अधिकार के तहत पंजीकृत कर उन उत्पादों को संरक्षित किया जाता है, जो भारतीय संस्कृति की प्राचीन विरासत से जुड़े हैं। इसके तहत चुने गए उत्पाद का निर्माण फिर मूल स्थान पर ही हो सकता है। किसी दूसरे क्षेत्र में उसके निर्माण पर कानूनी रोक लग जाती है। ऐसा होने से वस्तुओं की नकल नहीं हो सकती।
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घरेलू साजसज्जा की वस्तुओं का भी आकर्षण
व्यापार मेले में आई हिमाद्री और हिमानी ने बताया कि मेले में होम डेकोरेशन की वस्तुएं बेहद खूबसूरत हैं और उन्हें यहां सबसे ज्यादा लैंप पसंद आ रहे हैं। उन्होंने हुनर हाट में मेटल आर्टिस्ट रफीक के स्टाल से अपने घर के लिए मुरादाबादी मेटल वर्क से तैयार लैंप खरीदा है। साथ ही घर की सजावट के लिए अन्य दुकानों से भी काफी वस्तुएं खरीदी हैं। रफीक ने बताया कि उनके पास 150 रुपये से लेकर 800 रुपये तक के लैंप हैं।
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