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पहल : अब मुद्रा योजना के जरिए जन औषधि पर मिल सकेगा लोन
Updated Tue, 16 Oct 2018 05:56 AM IST
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ऑल यूपी:::::
अब मुद्रा योजना से जन औषधि केंद्र को मिलेगा लोन
- देश में जनऔषधि केंद्रों को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने लिया फैसला
- बैंक ऑफ बड़ौदा से हुआ करार, संचालकों को इंसेटिंव भी देगी सरकार
- देश में साढ़े चार हजार से ज्यादा पहुंच चुकी है इन केंद्रों की संख्या
परीक्षित निर्भय
नई दिल्ली। देश में जनऔषधि केंद्रों को बढ़ावा देने के लिए अब केंद्र सरकार प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के जरिए केंद्र संचालकों को लोन भी मुहैया कराएगी। इसके लिए बैंक ऑफ बड़ौदा के साथ करार भी हुआ है। इसके अलावा सरकार ने केंद्र संचालकों को अब इंसेंटिव दवाओं की आपूर्ति के दौरान ही देने का निर्णय लिया है। अब तक यह दवाओं की बिक्री के बाद मिलता था।
सोमवार को दिल्ली के कॉन्सटिट्यूशन क्लब में आयोजित डिजिटल कैश मैनेजमेंट सिस्टम की लॉचिंग में अमर उजाला से बातचीत में केंद्रीय रसायन एवं उर्वरक राज्य मंत्री मनसुख मांडविया ने बताया कि मुद्रा योजना के तहत दवा खरीदने के लिए केंद्र संचालकों को बैंक ऑफ बड़ौदा नौ फीसदी की वार्षिक ब्याज की दर पर लोन मिल सकेगा। इसके लिए एमओयू हो चुका है। हालांकि इसमें शर्त यह होगी कि इस रकम से सिर्फ दवाएं ही खरीदी जा सकेगी। केंद्र संचालकों को अब तक 15 फीसदी या अधिकतम 10 हजार रुपये मासिक इंसेंटिव के रुप में दिया जाता है। सूत्रों की मानें तो अब तक जिन केंद्रों को ये इंसेंटिव नहीं मिला है, उन्हें सरकार एक ही बार में पूरी राशि देने की तैयारी कर रही है।
हर संचालक को मिलेगा वर्चुअल खाता नंबर
प्रधानमंत्री जनऔषधि परियोजना के सीईओ सचिन कुमार सिंह ने बताया कि सभी केंद्रों को वर्चुअल अकाउंट नंबर जारी किया जा रहा है। इस खाता नंबर के जरिए मुद्रा योजना के तहत लोन लेने वाले लाभार्थी पूरा हिसाब रख सकेंगे। जैसे ही वे इस अकाउंट में अपना बकाया जमा करेंगे सिस्टम पर यह रिफ्लेक्ट हो जाएगा कि उनका बिल क्लीयर हो गया। इसके बाद उनके मांग के अनुरूप दवा की नई खेप भेज दी जाएगी।
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केंद्र संचालकों को ऐसे मिलेगा फायदा
दरअसल, आर्थिक तौर पर जनऔषधि केंद्र संचालकों को हमेशा से बड़ी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। इनकी मानें तो मुद्रा लोन के जरिए अब संचालक बड़ा ऑर्डर भी दे सकेंगे। इसका फायदा यह होगा कि केंद्र पर मरीजों को सभी तरह की दवाएं उपलब्ध हो सकेंगी। जबकि अभी तक केंद्र संचालक उतनी ही दवाओं का ऑर्डर कर पा रहे थे, जितना उनके पास बजट था।
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अब मुद्रा योजना से जन औषधि केंद्र को मिलेगा लोन
- देश में जनऔषधि केंद्रों को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने लिया फैसला
- बैंक ऑफ बड़ौदा से हुआ करार, संचालकों को इंसेटिंव भी देगी सरकार
- देश में साढ़े चार हजार से ज्यादा पहुंच चुकी है इन केंद्रों की संख्या
परीक्षित निर्भय
नई दिल्ली। देश में जनऔषधि केंद्रों को बढ़ावा देने के लिए अब केंद्र सरकार प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के जरिए केंद्र संचालकों को लोन भी मुहैया कराएगी। इसके लिए बैंक ऑफ बड़ौदा के साथ करार भी हुआ है। इसके अलावा सरकार ने केंद्र संचालकों को अब इंसेंटिव दवाओं की आपूर्ति के दौरान ही देने का निर्णय लिया है। अब तक यह दवाओं की बिक्री के बाद मिलता था।
सोमवार को दिल्ली के कॉन्सटिट्यूशन क्लब में आयोजित डिजिटल कैश मैनेजमेंट सिस्टम की लॉचिंग में अमर उजाला से बातचीत में केंद्रीय रसायन एवं उर्वरक राज्य मंत्री मनसुख मांडविया ने बताया कि मुद्रा योजना के तहत दवा खरीदने के लिए केंद्र संचालकों को बैंक ऑफ बड़ौदा नौ फीसदी की वार्षिक ब्याज की दर पर लोन मिल सकेगा। इसके लिए एमओयू हो चुका है। हालांकि इसमें शर्त यह होगी कि इस रकम से सिर्फ दवाएं ही खरीदी जा सकेगी। केंद्र संचालकों को अब तक 15 फीसदी या अधिकतम 10 हजार रुपये मासिक इंसेंटिव के रुप में दिया जाता है। सूत्रों की मानें तो अब तक जिन केंद्रों को ये इंसेंटिव नहीं मिला है, उन्हें सरकार एक ही बार में पूरी राशि देने की तैयारी कर रही है।
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हर संचालक को मिलेगा वर्चुअल खाता नंबर
प्रधानमंत्री जनऔषधि परियोजना के सीईओ सचिन कुमार सिंह ने बताया कि सभी केंद्रों को वर्चुअल अकाउंट नंबर जारी किया जा रहा है। इस खाता नंबर के जरिए मुद्रा योजना के तहत लोन लेने वाले लाभार्थी पूरा हिसाब रख सकेंगे। जैसे ही वे इस अकाउंट में अपना बकाया जमा करेंगे सिस्टम पर यह रिफ्लेक्ट हो जाएगा कि उनका बिल क्लीयर हो गया। इसके बाद उनके मांग के अनुरूप दवा की नई खेप भेज दी जाएगी।
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केंद्र संचालकों को ऐसे मिलेगा फायदा
दरअसल, आर्थिक तौर पर जनऔषधि केंद्र संचालकों को हमेशा से बड़ी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। इनकी मानें तो मुद्रा लोन के जरिए अब संचालक बड़ा ऑर्डर भी दे सकेंगे। इसका फायदा यह होगा कि केंद्र पर मरीजों को सभी तरह की दवाएं उपलब्ध हो सकेंगी। जबकि अभी तक केंद्र संचालक उतनी ही दवाओं का ऑर्डर कर पा रहे थे, जितना उनके पास बजट था।