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हवाई टिकट का अधिकतम किराया तय करना क्षेत्राधिकार से बाहर: डीजीसीए
Updated Fri, 12 Oct 2018 06:48 AM IST
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हवाई टिकट का अधिकतम किराया तय करना क्षेत्राधिकार से बाहर: डीजीसीए
- केंद्र व डीजीसीए ने अधिकतम किराया तय करने पर दिया अपना जवाब
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। एयर लाइन के किराए पर ऊपरी सीमा तय करना उसके क्षेत्राधिकार में नहीं है। यह तर्क नागरिक विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) ने अपना जवाब दाखिल कर हाईकोर्ट में दिया है। यह जवाब उस जनहित याचिका पर दिया है, जिसमें देश में एयरलाइनों के किराए पर अधिकतम सीमा तय करने की मांग की गई है।
मुख्य न्यायाधीश राजेंद्र मेनन व न्यायमूर्ति वीके राव की खंडपीठ के समक्ष केंद्र सरकार व डीजीसीए ने अपना जवाब बृहस्पतिवार को अपना जवाब दाखिल कर दिया। डीजीसीए ने अपने जवाब में वह एयर लाइन का अधिकतम किराया तय नहीं कर सकता।
वहीं दूसरी ओर याची के वकील शशांक देव सुधी व वकील शशि भूषण ने केंद्र सरकार व डीजीसीए के जवाब पर अपना विस्तृत जवाब देने के लिये समय मांगा है। हाईकोर्ट ने चार सप्ताह का समय देते हुये सुनवाई के लिये 14 जनवरी 2019 की तारीख तय की है।
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पेश मामले में याची बेजोन कुमार मिश्रा की तरफ से शशांक देव व शशि भूषण ने कहा कि निजी एयर लाइंस से टिकट लेने के बाद अब आप कैंसिल करते हैं तो टिकट का आधा दाम कट जाता है, लेकिन वह वापस नहीं किया जाता। याची का आरोप है कि एयर लाइन सीट की कमी होने पर बेस रेट से 10 गुना तक अधिक किराया वसूलती हैं।
याची ने अपने तर्क के समर्थन में इंडिगो के विमान के ईंजन में गड़बड़ी के बाद बहुत से विमान रद्द करने का मामला सामने रखा। उन्होंने कहा कि इन विमानों के रद्द होने की वजह से यात्रियों को दूसरी एयरलाइन्स में बहुत महंगे टिकट से यात्रा करनी पड़ी। उन्होंने कोर्ट से मांग की है कि एयरलाइन्स को एडवांस टिकट की तुलना में इस तरह की स्थिति में किराया वसूलने की एक अधिकतम सीमा तय किये जाने की जरूरत है।
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- केंद्र व डीजीसीए ने अधिकतम किराया तय करने पर दिया अपना जवाब
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। एयर लाइन के किराए पर ऊपरी सीमा तय करना उसके क्षेत्राधिकार में नहीं है। यह तर्क नागरिक विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) ने अपना जवाब दाखिल कर हाईकोर्ट में दिया है। यह जवाब उस जनहित याचिका पर दिया है, जिसमें देश में एयरलाइनों के किराए पर अधिकतम सीमा तय करने की मांग की गई है।
मुख्य न्यायाधीश राजेंद्र मेनन व न्यायमूर्ति वीके राव की खंडपीठ के समक्ष केंद्र सरकार व डीजीसीए ने अपना जवाब बृहस्पतिवार को अपना जवाब दाखिल कर दिया। डीजीसीए ने अपने जवाब में वह एयर लाइन का अधिकतम किराया तय नहीं कर सकता।
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वहीं दूसरी ओर याची के वकील शशांक देव सुधी व वकील शशि भूषण ने केंद्र सरकार व डीजीसीए के जवाब पर अपना विस्तृत जवाब देने के लिये समय मांगा है। हाईकोर्ट ने चार सप्ताह का समय देते हुये सुनवाई के लिये 14 जनवरी 2019 की तारीख तय की है।
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पेश मामले में याची बेजोन कुमार मिश्रा की तरफ से शशांक देव व शशि भूषण ने कहा कि निजी एयर लाइंस से टिकट लेने के बाद अब आप कैंसिल करते हैं तो टिकट का आधा दाम कट जाता है, लेकिन वह वापस नहीं किया जाता। याची का आरोप है कि एयर लाइन सीट की कमी होने पर बेस रेट से 10 गुना तक अधिक किराया वसूलती हैं।
याची ने अपने तर्क के समर्थन में इंडिगो के विमान के ईंजन में गड़बड़ी के बाद बहुत से विमान रद्द करने का मामला सामने रखा। उन्होंने कहा कि इन विमानों के रद्द होने की वजह से यात्रियों को दूसरी एयरलाइन्स में बहुत महंगे टिकट से यात्रा करनी पड़ी। उन्होंने कोर्ट से मांग की है कि एयरलाइन्स को एडवांस टिकट की तुलना में इस तरह की स्थिति में किराया वसूलने की एक अधिकतम सीमा तय किये जाने की जरूरत है।