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सरकारी कालोनी पुनर्विकास मामलो
Updated Wed, 10 Oct 2018 03:36 AM IST
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सरकार को संशोधित योजना की मंजूरी लेने की अनुमति
- सरकारी कालोनी पुनर्विकास मामला
- हाईकोर्ट ने कहा, केंद्र या एनबीसीसी अनुमति के लिए कर सकती है आवेदन
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।
हाईकोर्ट ने सरोजनी नगर व नेताजी नगर समेत छह सरकारी कालोनियों को दोबारा विकसित करने लिए संशोधित योजना पर मंजूरी लेने के लिए संबंधित विभाग के समक्ष आवेदन दायर करने की अनुमति प्रदान कर दी है। केंद्र सरकार ने इस मामले में कहा था कि इन कालोनियों को दोबारा विकसित करने के लिए योजना में संशोधन किया है।
मुख्य न्यायाधीश राजेंद्र मेनन व न्यायमूर्ति वीके राव ने अपने फैसले में कहा कि आवास व शहरी विकास मंत्रालय इन छह कालोनियों के विकास संबंधी योजना में संशोधन कर चुका है। इसके लिए मंत्रालय या एनबीसी अनुमति के लिए आवेदन करे और उस पर कानून के मुताबिक विचार किया जाए। संशोधित योजना के मुताबिक पेड़ हटाने के लिये मंत्रालय या एनबीसीसी दिल्ली सरकार के वृक्ष अधिकारी के समक्ष आवेदन दायर कर सकती है।
हाईकोर्ट ने इन छह सरकारी कालोनियों के संबंध में तीन अक्तूबर को फैसला सुरक्षित रख लिया था। हाईकोर्ट ने नौरोजी नगर कालोनी के संबंध में अलग से सुनवाई करने की बात कही थी। मामला सात सरकारी कालोनियों को दोबारा विकसित करने के लिये 16500 पेड़ों की कटाई के मिली अनुमति में कथित अनियमितता से जुड़ा है।
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कोर्ट के समक्ष पर्यावरण मंत्रालय व एनबीसीसी ने कहा था कि इन प्रोजेक्ट की योजना में कई बदलाव किये गये है ताकि इनके लिये कम से कम पेडों को वहां से हटाना पड़े और निर्माण में पानी की खपत कम से कम हो। इसकेअलावा सड़को भी विकसित किया जायेगा ताकि बढ़े ट्रैफिक के कारण असुविधा न हो।
मंत्रालय ने अधिवक्ता रिपुदमन भारद्वाज के जरिये हलफनामा दायर कर कहा कि इन प्रोजेक्ट में बनने घरों की संख्या 739 कम कर दी गई है। अब कालोनियों में केवल 24928 घर बनाये जायेंगे। इनकी घरों की योजना व वास्तु में भी परिवर्तन किया गया है। अब पहले के 13 हजार से ज्यादा पेड़ों की बजाय केवल सात हजार पेड़ों को हटाना पड़ेगा। इन प्रोजेक्ट के लिये 16500 पेड़ काटने की अनुमति मिली थी जिनमें से करीब दो हजार पेड़ काटे जा चुके हैं।
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- सरकारी कालोनी पुनर्विकास मामला
- हाईकोर्ट ने कहा, केंद्र या एनबीसीसी अनुमति के लिए कर सकती है आवेदन
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।
हाईकोर्ट ने सरोजनी नगर व नेताजी नगर समेत छह सरकारी कालोनियों को दोबारा विकसित करने लिए संशोधित योजना पर मंजूरी लेने के लिए संबंधित विभाग के समक्ष आवेदन दायर करने की अनुमति प्रदान कर दी है। केंद्र सरकार ने इस मामले में कहा था कि इन कालोनियों को दोबारा विकसित करने के लिए योजना में संशोधन किया है।
मुख्य न्यायाधीश राजेंद्र मेनन व न्यायमूर्ति वीके राव ने अपने फैसले में कहा कि आवास व शहरी विकास मंत्रालय इन छह कालोनियों के विकास संबंधी योजना में संशोधन कर चुका है। इसके लिए मंत्रालय या एनबीसी अनुमति के लिए आवेदन करे और उस पर कानून के मुताबिक विचार किया जाए। संशोधित योजना के मुताबिक पेड़ हटाने के लिये मंत्रालय या एनबीसीसी दिल्ली सरकार के वृक्ष अधिकारी के समक्ष आवेदन दायर कर सकती है।
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हाईकोर्ट ने इन छह सरकारी कालोनियों के संबंध में तीन अक्तूबर को फैसला सुरक्षित रख लिया था। हाईकोर्ट ने नौरोजी नगर कालोनी के संबंध में अलग से सुनवाई करने की बात कही थी। मामला सात सरकारी कालोनियों को दोबारा विकसित करने के लिये 16500 पेड़ों की कटाई के मिली अनुमति में कथित अनियमितता से जुड़ा है।
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कोर्ट के समक्ष पर्यावरण मंत्रालय व एनबीसीसी ने कहा था कि इन प्रोजेक्ट की योजना में कई बदलाव किये गये है ताकि इनके लिये कम से कम पेडों को वहां से हटाना पड़े और निर्माण में पानी की खपत कम से कम हो। इसकेअलावा सड़को भी विकसित किया जायेगा ताकि बढ़े ट्रैफिक के कारण असुविधा न हो।
मंत्रालय ने अधिवक्ता रिपुदमन भारद्वाज के जरिये हलफनामा दायर कर कहा कि इन प्रोजेक्ट में बनने घरों की संख्या 739 कम कर दी गई है। अब कालोनियों में केवल 24928 घर बनाये जायेंगे। इनकी घरों की योजना व वास्तु में भी परिवर्तन किया गया है। अब पहले के 13 हजार से ज्यादा पेड़ों की बजाय केवल सात हजार पेड़ों को हटाना पड़ेगा। इन प्रोजेक्ट के लिये 16500 पेड़ काटने की अनुमति मिली थी जिनमें से करीब दो हजार पेड़ काटे जा चुके हैं।