फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi NCR ›   Noida News ›   छात्राओं के लिये स्कूलों में नहीं शौचालय व पानी की समुचित व्यवस्था

छात्राओं के लिये स्कूलों में नहीं शौचालय व पानी की समुचित व्यवस्था

Mon, 08 Oct 2018 05:40 AM IST
Updated Mon, 08 Oct 2018 05:40 AM IST
विज्ञापन
छात्राओं के लिये स्कूलों में नहीं शौचालय व पानी की समुचित व्यवस्था
पीरियड में स्कूल छोड़ने को मजबूर हो रहीं ‘लाली’
विज्ञापन


- छात्राओं के लिए स्कूलों में नहीं शौचालय व पानी की समुचित व्यवस्था
- जनहित याचिका दायर कर की गई छात्राओं को उचित सुविधाएं देने की मांग

अमर उजाला ब्यूरो,
नई दिल्ली। एक तरफ सरकार बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ का ढिढोरा पीटा जा रहा है। दूसरी ओर स्कूलों में शौचालय, साफ पानी, सेनिटरी प्रोडक्ट और हाईजीन के अभाव में 40 फीसदी छात्राएं (लाली) माहवारी के दौरान स्कूल नहीं जा जा रही हैं। वहीं, करीब 20 फीसदी हमेशा के लिए स्कूल छोड़ देती हैं। यह खुलासा यूनिसेफ की एक रिपोर्ट में हुआ है। साथ हाई कोर्ट में डाली गई याचिका में एशियन ह्यूमन राइट कमीशन की रिपोर्ट का भी हवाला देकर कहा गया है कि इससे छात्राओं के निशुल्क व अनिवार्य शिक्षा के अधिकार का हनन हो रहा है। इसलिए दिल्ली सरकार के शिक्षा विभाग को इन सुविधाओं को उपलब्ध कराने के निर्देश दिया जाए।
हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर अधिवक्ता मनीषा त्यागी ने कहा है कि राजधानी के सरकारी स्कूलों में छात्राओं के लिए माहवारी के दिनों में शौचालयों, साफ पानी व साफ सफाई की समुचित व्यवस्था नहीं है। इसलिए 11 साल की उम्र के बाद छात्राएं स्कूल से अनुपस्थित रहती है। इतना ही नहीं करीब 20 फीसदी छात्राएं स्कूल ही छोड़ देती हैं। यूनिसेफ की रिपोर्ट के मुताबिक इसका कारण स्कूलों में सेनिटरी प्रोडक्ट का उपलब्ध न होना है। याचिका में एशियन ह्यूमन राइट कमीशन की रिपोर्ट का हवाला भी दिया गया है। इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए याचिका में कहा गया है कि 2011 में स्कूलों में शौचालय निर्माण का निर्देश दिया गया था। लेकिन सात साल में केवल 75 फीसदी स्कूलों में शौचालय बनाए गए हैं। इनमें से भी केवल 60 फीसदी में ही छात्राओं के लिए अलग व्यवस्था हैं। जबकि ज्यादातर शौचालय इस्तेमाल के लायक नहीं है।
विज्ञापन

याची का कहना है कि इन कारणों से अगर छात्रायें स्कूल से अनुपस्थित रहती हैं या फिर उन्हें स्कूल छोड़ना पड़ता है तो उनके मौलिक अधिकारों के साथ ही शिक्षा के अधिकार का हनन है। इसलिए सरकार व संबंधित विभागों को यह सुविधायें प्रदान करने का निर्देश दिया जाए।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed