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अब अंगूठे से दिल तक पहुंच सकेगा स्टेंट, डॉक्टरों ने निकाला रास्ता
Updated Thu, 27 Sep 2018 03:32 AM IST
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अब अंगुठे से दिल तक पहुंचे स्टेंट, डॉक्टरों ने निकाला रास्ता
- दिल्ली के फोर्टिस अस्पताल ने अपनाई नई तकनीकी
- अब तक 50 से ज्यादा मरीजों पर किया गया सफल परीक्षण
- रक्त और समय दोनों का हुआ बचाव, महज बेंडेज से चल जाता है काम
- एंजियोप्लास्टि से पहले करनी होती है एंजियोग्राफी, अब तक लगाना पड़ता था कट
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। आमतौर पर एंजियोप्लास्टि एक प्रक्रिया है, जिसके तहत दिल की धमनियों में स्टेंट लगाया जाता है। जबकि एंजियोग्राफी एक टेस्ट, जिसमें जांघ या कलाई पर कट लगाकर धमनियों में रक्त संचार के अवरोधों का पता लगाया जाता है। अब दिल्ली फोर्टिस अस्पताल के डॉक्टरों ने नई तकनीक के जरिए इस जांच को और आसान बना दिया है। अब अंगुठे पर कट लगाने से ही एंजियोग्राफी की जा सकेगी। इसको लेकर 50 मरीजों पर सफल परिणाम देखने को मिले हैं। इस तकनीक से रक्त और समय की बचत भी होगी।
दरअसल, कई सरकारी और निजी अस्पतालों में अब भी जांघ या कलाई पर कट लगाने के बाद एंजियोग्राफी की जाती है। इसके कारण करीब 3.5 से 10 फीसदी तक रक्त की निकल जाता है। जबकि कलाई में कट लगने के बाद रक्त प्रेशर के साथ बाहर आता है। जबकि अंगुठे के नीचे (आर्टरी का पहला बिंदु) कट लगाकर एंजियोग्राफी करने से रक्त कम बर्बाद होता है। साथ ही मरीज तीन से चार घंटे में घर जा सकता है। वसंत कुंज स्थित फोर्टिस अस्पताल के ह्दयरोग विशेषज्ञ डॉ. तपन घोष ने बुधवार को बताया कि तीन माह से इस तकनीक पर उनके अस्पताल में काम किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि कलाई, जांघ या फिर अंगूठा कहीं से भी एंजियोग्राफी करने पर उसमें इस्तेमाल होने वाली दवाएं एक जैसी होती हैं। ये जब उंगली के जरिए किया जाता है तो इसे लेफ्ट डिस्टल रेडियल एंजियोग्राफी कहते हैं। पारंपरिक प्रक्रिया के मुकाबले उंगली के जरिए एंजियोग्राफी करने में कम समय लगता है और इसमें रोगी को दर्द न के बराबर होता है।
दिल्ली के निवासी 47 वर्षीय मरीज डीएस मथुरिया ने बताया कि वे पेशे से इंजीनियर हैं। फुटबॉल और बैडमिंटन खेलने के साथ उनके परिवार में कभी दिल की बीमारी की शिकायत नही हुई। लेकिन कोलेस्ट्रॉल अत्यधिक होने के कारण उन्हें एक ब्लॉकेज की शिकायत हुई। जब वह डॉ. तपन के पास पहुंचे तो उन्होंने एंजियोग्राफी कराने की सलाह दी। इस विधि से 10 मिनट में डॉक्टरों ने उन्हें प्रक्रिया पूरी होने और परिजनों से मिलने का सांत्वना दिया। डॉ. तपन ने ये भी बताया कि अस्पताल में इस तकनीक के लिए कोई अतिरिक्त फीस भी नहीं ली जा रही है।
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- दिल्ली के फोर्टिस अस्पताल ने अपनाई नई तकनीकी
- अब तक 50 से ज्यादा मरीजों पर किया गया सफल परीक्षण
- रक्त और समय दोनों का हुआ बचाव, महज बेंडेज से चल जाता है काम
- एंजियोप्लास्टि से पहले करनी होती है एंजियोग्राफी, अब तक लगाना पड़ता था कट
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। आमतौर पर एंजियोप्लास्टि एक प्रक्रिया है, जिसके तहत दिल की धमनियों में स्टेंट लगाया जाता है। जबकि एंजियोग्राफी एक टेस्ट, जिसमें जांघ या कलाई पर कट लगाकर धमनियों में रक्त संचार के अवरोधों का पता लगाया जाता है। अब दिल्ली फोर्टिस अस्पताल के डॉक्टरों ने नई तकनीक के जरिए इस जांच को और आसान बना दिया है। अब अंगुठे पर कट लगाने से ही एंजियोग्राफी की जा सकेगी। इसको लेकर 50 मरीजों पर सफल परिणाम देखने को मिले हैं। इस तकनीक से रक्त और समय की बचत भी होगी।
दरअसल, कई सरकारी और निजी अस्पतालों में अब भी जांघ या कलाई पर कट लगाने के बाद एंजियोग्राफी की जाती है। इसके कारण करीब 3.5 से 10 फीसदी तक रक्त की निकल जाता है। जबकि कलाई में कट लगने के बाद रक्त प्रेशर के साथ बाहर आता है। जबकि अंगुठे के नीचे (आर्टरी का पहला बिंदु) कट लगाकर एंजियोग्राफी करने से रक्त कम बर्बाद होता है। साथ ही मरीज तीन से चार घंटे में घर जा सकता है। वसंत कुंज स्थित फोर्टिस अस्पताल के ह्दयरोग विशेषज्ञ डॉ. तपन घोष ने बुधवार को बताया कि तीन माह से इस तकनीक पर उनके अस्पताल में काम किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि कलाई, जांघ या फिर अंगूठा कहीं से भी एंजियोग्राफी करने पर उसमें इस्तेमाल होने वाली दवाएं एक जैसी होती हैं। ये जब उंगली के जरिए किया जाता है तो इसे लेफ्ट डिस्टल रेडियल एंजियोग्राफी कहते हैं। पारंपरिक प्रक्रिया के मुकाबले उंगली के जरिए एंजियोग्राफी करने में कम समय लगता है और इसमें रोगी को दर्द न के बराबर होता है।
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दिल्ली के निवासी 47 वर्षीय मरीज डीएस मथुरिया ने बताया कि वे पेशे से इंजीनियर हैं। फुटबॉल और बैडमिंटन खेलने के साथ उनके परिवार में कभी दिल की बीमारी की शिकायत नही हुई। लेकिन कोलेस्ट्रॉल अत्यधिक होने के कारण उन्हें एक ब्लॉकेज की शिकायत हुई। जब वह डॉ. तपन के पास पहुंचे तो उन्होंने एंजियोग्राफी कराने की सलाह दी। इस विधि से 10 मिनट में डॉक्टरों ने उन्हें प्रक्रिया पूरी होने और परिजनों से मिलने का सांत्वना दिया। डॉ. तपन ने ये भी बताया कि अस्पताल में इस तकनीक के लिए कोई अतिरिक्त फीस भी नहीं ली जा रही है।
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