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डोर स्टेप डिलीवरी ऑफ सर्विसेज स्कीम: बर्दाश्त नहीं होगी देरी, निरस्त नहीं होगा आवेदन
Updated Wed, 12 Sep 2018 04:12 AM IST
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हेड : डोर स्टेप डिलीवरी में देरी न हो
सबहेड : मुख्यमंत्री का निर्देश, बगैर मंत्री की पूर्व अनुमति के किसी भी सेवा को देने से अधिकारी नहीं करेंगे मना
प्वाइंटर
मंत्री भी 24 घंटे से ज्यादा नहीं रोक सकेंगे आवेदन, अपरिहार्य वजहों से देरी पर करनी होगी रिपोर्ट
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली । मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने डोर स्टेप डिलीवरी ऑफ सर्विसेज को सही तरीके से लागू करने का सख्त निर्देश दिया। उन्होंनेे दो टूक कहा कि कोई भी अधिकारी अपने स्तर पर किसी आवेदन को निरस्त नहीं करेगा। छोटी-छोटी आपत्तियों के सहारे सर्विस देने की मनाही भ्रष्टाचार माना जाएगा। इसके अलावा देरी भी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अगर किसी भी स्तर कोई देरी होती है तो उसकी दैनिक रिपोर्ट सीधे मुख्यमंत्री को देनी होगी। मंगलवार को जारी निर्देश की कापी सभी कैबिनेट सहयोगियों को भेज दी गई है।
अरविंद केजरीवाल ने आदेश में कहा है कि मोबाइल सहायक अगर किसी सेवा के बारे में विभाग से संपर्क करता है तो विभाग किसी भी हालत में इसे देने से मना नहीं कर सकता है। अगर बेहद जरूरी हुआ तो मना करने से पहले संबंधित मंत्री से इसकी इजाजत लेनी होगी।
अगर मंत्री के स्तर पर भी आवेदन निरस्त किया जा रहा है, तो 24 घंटे के भीतर जरूरी औपचारिकताएं पूरी कर उसे सेवा देनी होगी। मुख्यमंत्री कार्यालय से जुड़े अधिकारी बताते हैं कि कई बार निचले स्तर पर कर्मी आवेदनों को छोटी-छोटी खामियां दिखाकर रद्द कर देते हैं। इसकी वजह आवेदकों को परेशान कर घूसखोरी करने की होती है। स्कीम को इस मानसिकता से बचाने के लिए मुख्यमंत्री को यह निर्देश देना पड़ा है।
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लेटलतीफी भ्रष्टाचार करने का तरीका
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा है कि सभी सेवाएं समयबद्ध तरीके से देनी होंगी। लेटलतीफी किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं होगी। मुख्यमंत्री ने लेटलतीफी को भ्रष्टाचार करने का एक तरीका माना है। इस योजना में किसी आवेदन को लेकर देरी की जाती है तो इसे भ्रष्ट तौर-तरीकों को बढ़ावा देने वाला माना जाएगा। मुख्यमंत्री ने सभी विभागाध्यक्षों को समय सीमा का पालन सख्ती से सुनिश्चित करने को कहा है।
जिम्मेदार अधिकारी पर होगी कार्रवाई
लेटलतीफी होने पर जिम्मेदार अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई होगी। इन मामलों में संबंधित विभाग प्रमुखों व सचिवों से भी जवाब तलब किया जाएगा। एक अधिकारी ने बताया कि अगर वाजिब वजहों से देरी हो रही है तो ऐसे सभी मामलों की रिपोर्ट मुख्यमंत्री को देनी होगी। मुख्यमंत्री खुद स्कीम के तहत आने वाली कॉल्स, बैक-एंड सिस्टम और आउटपुट की निगरानी कर रहे हैं।
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सबहेड : मुख्यमंत्री का निर्देश, बगैर मंत्री की पूर्व अनुमति के किसी भी सेवा को देने से अधिकारी नहीं करेंगे मना
प्वाइंटर
मंत्री भी 24 घंटे से ज्यादा नहीं रोक सकेंगे आवेदन, अपरिहार्य वजहों से देरी पर करनी होगी रिपोर्ट
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली । मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने डोर स्टेप डिलीवरी ऑफ सर्विसेज को सही तरीके से लागू करने का सख्त निर्देश दिया। उन्होंनेे दो टूक कहा कि कोई भी अधिकारी अपने स्तर पर किसी आवेदन को निरस्त नहीं करेगा। छोटी-छोटी आपत्तियों के सहारे सर्विस देने की मनाही भ्रष्टाचार माना जाएगा। इसके अलावा देरी भी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अगर किसी भी स्तर कोई देरी होती है तो उसकी दैनिक रिपोर्ट सीधे मुख्यमंत्री को देनी होगी। मंगलवार को जारी निर्देश की कापी सभी कैबिनेट सहयोगियों को भेज दी गई है।
अरविंद केजरीवाल ने आदेश में कहा है कि मोबाइल सहायक अगर किसी सेवा के बारे में विभाग से संपर्क करता है तो विभाग किसी भी हालत में इसे देने से मना नहीं कर सकता है। अगर बेहद जरूरी हुआ तो मना करने से पहले संबंधित मंत्री से इसकी इजाजत लेनी होगी।
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अगर मंत्री के स्तर पर भी आवेदन निरस्त किया जा रहा है, तो 24 घंटे के भीतर जरूरी औपचारिकताएं पूरी कर उसे सेवा देनी होगी। मुख्यमंत्री कार्यालय से जुड़े अधिकारी बताते हैं कि कई बार निचले स्तर पर कर्मी आवेदनों को छोटी-छोटी खामियां दिखाकर रद्द कर देते हैं। इसकी वजह आवेदकों को परेशान कर घूसखोरी करने की होती है। स्कीम को इस मानसिकता से बचाने के लिए मुख्यमंत्री को यह निर्देश देना पड़ा है।
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लेटलतीफी भ्रष्टाचार करने का तरीका
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा है कि सभी सेवाएं समयबद्ध तरीके से देनी होंगी। लेटलतीफी किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं होगी। मुख्यमंत्री ने लेटलतीफी को भ्रष्टाचार करने का एक तरीका माना है। इस योजना में किसी आवेदन को लेकर देरी की जाती है तो इसे भ्रष्ट तौर-तरीकों को बढ़ावा देने वाला माना जाएगा। मुख्यमंत्री ने सभी विभागाध्यक्षों को समय सीमा का पालन सख्ती से सुनिश्चित करने को कहा है।
जिम्मेदार अधिकारी पर होगी कार्रवाई
लेटलतीफी होने पर जिम्मेदार अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई होगी। इन मामलों में संबंधित विभाग प्रमुखों व सचिवों से भी जवाब तलब किया जाएगा। एक अधिकारी ने बताया कि अगर वाजिब वजहों से देरी हो रही है तो ऐसे सभी मामलों की रिपोर्ट मुख्यमंत्री को देनी होगी। मुख्यमंत्री खुद स्कीम के तहत आने वाली कॉल्स, बैक-एंड सिस्टम और आउटपुट की निगरानी कर रहे हैं।