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100 के तीन इंग्लिश नॉवल के फेर में फंसा दिल्ली पुस्तक मेला
Updated Sat, 25 Aug 2018 09:24 PM IST
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100 के तीन इंग्लिश नॉवेल ऑफर की धूम
नई दिल्ली। साहित्य, इतिहास, रोमांच और भूगोलीय जानकारियों के लिए जाना जाने वाला पुस्तक मेला इस बार 100 के तीन इंग्लिश नॉवेल के फेर में फंसा दिखाई दे रहा है। मेले का आधे से ज्यादा ज्यादा हिस्सा नॉवेल स्टॉल्स से भरा हुआ है।
प्रगति मैदान में निर्माण कार्य के चलते पिछले सालों की तुलना में दिल्ली पुस्तक मेले का आकार छोटा हो गया है। इस बार प्रगति मैदान के हॉल नंबर-7 में मेले का आयोजन किया गया है। यहां तीन उप-खंडों में पुस्तक मेले को विभाजित किया गया है। इनमें दो खंडों में पुस्तक मेला है, जबकि एक खंड में स्टेशनरी के स्टॉल्स और कारपोरेट सामान लाए गए हैं। जिन दो खंडों में पुस्तक मेला आयोजित किया गया है। उनमें इंग्लिश नॉवेल के स्टॉल्स की भरमार है। यहां 100 रुपए में तीन इंग्लिश नॉवेल बेचे जा रहे हैं। इन पुस्तकों में डेविड बैकहम की जीवनी समेत अन्य नामी हस्तियों की महंगी पुस्तकों को रद्दी के भाव में बेचा जा रहा है। खास बात यह है कि इन पुस्तकों को खरीदने के लिए पाठकों की भारी भीड़ है।
आलम ऐसा है कि दिल्ली पुस्तक मेले में दरियागंज की संडे मार्केट जैसी पुस्तकें बेची जा रही हैं, हालांकि ये पुस्तके दिखने में पुरानी नहीं लगती, लेकिन इनके पॉयरेटेड न होने की भी कोई गारंटी नहीं है। बहरहाल मेले के पहले दिन अन्य विषयों के स्टॉल्स के बजाए इंग्लिश नॉवल की खरीद पर पाठकों का ज्यादा जोर दिखाई दिया।
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नई दिल्ली। साहित्य, इतिहास, रोमांच और भूगोलीय जानकारियों के लिए जाना जाने वाला पुस्तक मेला इस बार 100 के तीन इंग्लिश नॉवेल के फेर में फंसा दिखाई दे रहा है। मेले का आधे से ज्यादा ज्यादा हिस्सा नॉवेल स्टॉल्स से भरा हुआ है।
प्रगति मैदान में निर्माण कार्य के चलते पिछले सालों की तुलना में दिल्ली पुस्तक मेले का आकार छोटा हो गया है। इस बार प्रगति मैदान के हॉल नंबर-7 में मेले का आयोजन किया गया है। यहां तीन उप-खंडों में पुस्तक मेले को विभाजित किया गया है। इनमें दो खंडों में पुस्तक मेला है, जबकि एक खंड में स्टेशनरी के स्टॉल्स और कारपोरेट सामान लाए गए हैं। जिन दो खंडों में पुस्तक मेला आयोजित किया गया है। उनमें इंग्लिश नॉवेल के स्टॉल्स की भरमार है। यहां 100 रुपए में तीन इंग्लिश नॉवेल बेचे जा रहे हैं। इन पुस्तकों में डेविड बैकहम की जीवनी समेत अन्य नामी हस्तियों की महंगी पुस्तकों को रद्दी के भाव में बेचा जा रहा है। खास बात यह है कि इन पुस्तकों को खरीदने के लिए पाठकों की भारी भीड़ है।
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आलम ऐसा है कि दिल्ली पुस्तक मेले में दरियागंज की संडे मार्केट जैसी पुस्तकें बेची जा रही हैं, हालांकि ये पुस्तके दिखने में पुरानी नहीं लगती, लेकिन इनके पॉयरेटेड न होने की भी कोई गारंटी नहीं है। बहरहाल मेले के पहले दिन अन्य विषयों के स्टॉल्स के बजाए इंग्लिश नॉवल की खरीद पर पाठकों का ज्यादा जोर दिखाई दिया।
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