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अटलजी के गांववासी दर्शन के बगैर लौटे
Updated Fri, 17 Aug 2018 10:00 PM IST
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वाजपेयी के गांववासी दर्शन के बगैर लौटे
-कुल्लू के प्रीणीसे आया था गांववासियों का दल
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। हिमाचल प्रदेश को अपना घर बताने वाले पूर्व पीएम वाजपेयी अब कभी लौटकर नहीं आएंगे। इसीलिए हम उनके घर से उनके अंतिम दर्शन के लिए सैकड़ों किलोमीटर दूर से बीजेपी मुख्यालय पहुंचे हैं। यह कहना था कुल्लू के प्रीणी इलाके के गांववासियों का, जोकि बरसात की परवाह किए बगैर अपने प्रिय नेता को अंतिम विदाई देने आए थे। ग्रामीणों का कहना था कि अटल जी तो पूरे हिमाचल को अपना घर बताते थे, लेकिन उन्होंने घर कुल्लू स्थित प्रीणी में बनाया था। हम अपने नेता के अंतिम दर्शन करने आए हैं लेकिन अंदर जाने की अनुमति नहीं मिली। ग्रामीण दो घंटे तक एक गेट से दूसरे गेट भटकते रहे, लेकिन अपने प्रिय नेता को श्रद्धंाजलि अर्पित नहीं कर पाए।
गौरतलब है कि अटल बिहारी वाजपेयी बेशक पूरे देश के लिए प्रधानमंत्री थे, लेकिन हिमाचल के लिए वे अभिभावक की तरह रहे। यही वजह है कि सक्रिय राजनीतिक छोड़ने के बाद पूर्व प्रधानमंत्री ने कुल्लू के प्रीणी को अपना घर बनाया। वह ज्यादातर समय यही पर ही रहना पसंद करते थे। यहां के सौंदर्य और बर्फ से लदी पहाड़ियों पर उन्होंने कविताएं भी लिखी हैं।
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-कुल्लू के प्रीणीसे आया था गांववासियों का दल
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। हिमाचल प्रदेश को अपना घर बताने वाले पूर्व पीएम वाजपेयी अब कभी लौटकर नहीं आएंगे। इसीलिए हम उनके घर से उनके अंतिम दर्शन के लिए सैकड़ों किलोमीटर दूर से बीजेपी मुख्यालय पहुंचे हैं। यह कहना था कुल्लू के प्रीणी इलाके के गांववासियों का, जोकि बरसात की परवाह किए बगैर अपने प्रिय नेता को अंतिम विदाई देने आए थे। ग्रामीणों का कहना था कि अटल जी तो पूरे हिमाचल को अपना घर बताते थे, लेकिन उन्होंने घर कुल्लू स्थित प्रीणी में बनाया था। हम अपने नेता के अंतिम दर्शन करने आए हैं लेकिन अंदर जाने की अनुमति नहीं मिली। ग्रामीण दो घंटे तक एक गेट से दूसरे गेट भटकते रहे, लेकिन अपने प्रिय नेता को श्रद्धंाजलि अर्पित नहीं कर पाए।
गौरतलब है कि अटल बिहारी वाजपेयी बेशक पूरे देश के लिए प्रधानमंत्री थे, लेकिन हिमाचल के लिए वे अभिभावक की तरह रहे। यही वजह है कि सक्रिय राजनीतिक छोड़ने के बाद पूर्व प्रधानमंत्री ने कुल्लू के प्रीणी को अपना घर बनाया। वह ज्यादातर समय यही पर ही रहना पसंद करते थे। यहां के सौंदर्य और बर्फ से लदी पहाड़ियों पर उन्होंने कविताएं भी लिखी हैं।
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