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दमकल के 45 फीसदी पद खाली
Updated Fri, 17 Aug 2018 12:12 AM IST
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दमकल विभाग में 45 फीसदी पद खाली
डीएफएस में दमकल कर्मियों की कमी पर सरकार को नोटिस
उपहार हादसा पीड़ितों की जनहित याचिका से उठाया अग्नि सुरक्षा का मुद्दा
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली अग्नि शमन सेवा (डीएफएस) कर्मियों की भारी कमी से जूझ रही है। यह दावा एक जनहित याचिका दायर करके किया गया है। याचिका में कहा गया है कि डीएफएस में 45 फीसदी पद खाली हैं। हाईकोर्ट ने इस याचिका पर नोटिस जारी कर दिल्ली सरकार से जवाब मांगा है। मुख्य न्यायाधीश राजेंद्र मैनन व न्यायमूर्ति वीके राव ने एसोसिएशन आफ दि विक्टिम ऑफ उपहार ट्रेजेडी (अवूत) की जनहित याचिका पर नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। हाईकोर्ट ने दिल्ली सरकार से पूछा है कि खाली पदों को भरने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं।
याचिका में दावा किया गया है कि 21 साल पहले हुए उपहार सिनेमा हॉल में आग लगने से महिलाओं व बच्चों समेत 59 लोगों की जान गई थी, लेकिन इतने साल बाद भी हालात में कोई सुधार नहीं हुआ है। यह हादसा 13 जून 1997 को हिंदी फीचर फिल्म बॉर्डर के शो के दौरान हुआ था। जनहित याचिका पर पक्ष रखते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता विकास पाहवा ने कहा कि उपहार हादसे के 21 साल बाद भी राजधानी में अग्नि सुरक्षा का इंतजाम बद से बदतर हुए है क्योंकि डीएफएस में 45 फीसदी पद खाली हैं। सीएजी की 2015 की रिपोर्ट में डीएफएस के कामकाज के तरीके में कई खामियों को उजागर किया गया था।
याचिका में कहा गया है कि डीएफएस के अग्नि रोकथाम विंग को चाक-चौबंद करने की बेहद जरूरत है। राजधानी में उपहार जैसे हादसे रोकने के लिए सेफ गोवा 24/7 की तर्ज पर इमरजेंसी मॉनीटरिंग सिस्टम की शुुरुआत सरकार को करनी चाहिए। इसके तहत दमकल मुख्यालय, स्थानीय दमकल केंद्र व इमारत को एक इलेक्ट्रोनिक यंत्र की जरिये जोड़ा जाता है, जिससे आपातकालीन स्थिति की स्वत: सूचना मिल जाती है।
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डीएफएस में दमकल कर्मियों की कमी पर सरकार को नोटिस
उपहार हादसा पीड़ितों की जनहित याचिका से उठाया अग्नि सुरक्षा का मुद्दा
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली अग्नि शमन सेवा (डीएफएस) कर्मियों की भारी कमी से जूझ रही है। यह दावा एक जनहित याचिका दायर करके किया गया है। याचिका में कहा गया है कि डीएफएस में 45 फीसदी पद खाली हैं। हाईकोर्ट ने इस याचिका पर नोटिस जारी कर दिल्ली सरकार से जवाब मांगा है। मुख्य न्यायाधीश राजेंद्र मैनन व न्यायमूर्ति वीके राव ने एसोसिएशन आफ दि विक्टिम ऑफ उपहार ट्रेजेडी (अवूत) की जनहित याचिका पर नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। हाईकोर्ट ने दिल्ली सरकार से पूछा है कि खाली पदों को भरने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं।
याचिका में दावा किया गया है कि 21 साल पहले हुए उपहार सिनेमा हॉल में आग लगने से महिलाओं व बच्चों समेत 59 लोगों की जान गई थी, लेकिन इतने साल बाद भी हालात में कोई सुधार नहीं हुआ है। यह हादसा 13 जून 1997 को हिंदी फीचर फिल्म बॉर्डर के शो के दौरान हुआ था। जनहित याचिका पर पक्ष रखते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता विकास पाहवा ने कहा कि उपहार हादसे के 21 साल बाद भी राजधानी में अग्नि सुरक्षा का इंतजाम बद से बदतर हुए है क्योंकि डीएफएस में 45 फीसदी पद खाली हैं। सीएजी की 2015 की रिपोर्ट में डीएफएस के कामकाज के तरीके में कई खामियों को उजागर किया गया था।
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याचिका में कहा गया है कि डीएफएस के अग्नि रोकथाम विंग को चाक-चौबंद करने की बेहद जरूरत है। राजधानी में उपहार जैसे हादसे रोकने के लिए सेफ गोवा 24/7 की तर्ज पर इमरजेंसी मॉनीटरिंग सिस्टम की शुुरुआत सरकार को करनी चाहिए। इसके तहत दमकल मुख्यालय, स्थानीय दमकल केंद्र व इमारत को एक इलेक्ट्रोनिक यंत्र की जरिये जोड़ा जाता है, जिससे आपातकालीन स्थिति की स्वत: सूचना मिल जाती है।
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