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रिश्वत लेकर इलाज करने पर घिरे जीबी पंत के डॉक्टर
Updated Mon, 23 Jul 2018 10:16 PM IST
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रिश्वत लेकर इलाज करने पर
घिरे जीबी पंत के डॉक्टर
- स्वास्थ्य विभाग ने कई डॉक्टरों पर कार्रवाई करने का लिया फैसला
- पिछले वर्ष मंत्री इमरान हुसैन की शिकायत पर सीएम ने दिए थे जांच के आदेश
- जांच में अपोडी कार्ड मैनुअल तरीके से बनाते हुए पाया गया, रिकॉर्ड भी मेंटेन नहीं मिला
- सीटीवीएस विभाग के अध्यक्ष ने साल भर पहले अस्पताल को ऐसी गतिविधियों की जानकारी दी थी
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली सरकार के सबसे बड़े सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल जीबी पंत के डॉक्टरों पर रिश्वत लेकर इलाज करने के आरोप लगे हैं। मामला थोड़ा पुराना है, लेकिन सरकार ने अब इस मामले को गंभीरता से लेते हुए डॉक्टरों के खिलाफ कार्रवाई करने का मन बना लिया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, दिल्ली स्वास्थ्य विभाग ने स्वास्थ्य सेवाओं के महानिदेशक को कार्रवाई के लिए निर्देश भी जारी कर दिया है। साथ ही पत्र में लिखा है कि पिछले वर्ष दिल्ली के मंत्री इमरान हुसैन ने सीएम केजरीवाल से इसकी शिकायत की थी। इस पर केजरीवाल ने वरिष्ठ डॉक्टरों की टीम गठित कर जांच के आदेश दिए थे। इसी जांच में जीबी पंत अस्पताल की कई खामियां भी उजागर हुई हैं। आमतौर पर किसी भी मरीज को यहां ओपन हार्ट सर्जरी कराने के लिए तीन से चार माह की वेटिंग दी जा रही है, लेकिन कुछ मरीजों का दूसरे ओपीडी कार्ड पर अस्पताल में ऑपरेशन भी कर दिया गया। हालांकि जिन लोगों ने ऑपरेशन कराया, उन्होंने रिश्वत देने की बात से इंकार किया, लेकिन जांच टीम ने महज 10 दिन के अंतर से उनके ऑपरेशन करने के पीछे डॉक्टरों से वजह पूछी तो मामला उजागर हुआ।
मंत्री इमरान हुसैन ने शिकायत में कहा था कि असलम नाम के एक मरीज को बाईपास ऑपरेशन के लिए जीबी पंत अस्पताल उन्होंने भेजा था। तब डॉक्टरों ने मना कर दिया, लेकिन बाद में उसी मरीज ने एक दलाल को सवा लाख रुपये देकर तत्काल ऑपरेशन करवा लिया। इसके बाद वह वार्ड नंबर 22 के बेड नंबर दस पर भर्ती भी रहा। यह शिकायत मुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग को भेजी जहां से यह विजिलेंस विभाग को भेजी गई। जांच के दौरान पता चला कि अस्पताल में ओपीडी कार्ड मैनुअल तरीके से बनाए जा रहे थे, जिसका रिकॉर्ड मेंटेन नहीं किया गया था। असलम के मामले में पाया गया कि जिस ओपीडी नंबर 75210 पर उसकी 23 सितंबर को एंजियोग्राफी, 29 को पीएसी और चार अक्तूबर को बाईपास किया गया, वह किसी फातिमा के नाम पर दर्ज था।
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बताया जा रहा है कि जांच में सीटीवीएस विभाग के अध्यक्ष डॉ. प्रो. गिलानी ने बताया कि उन्होंने करीब साल भर पहले अस्पताल प्रशासन को ऐसी गतिविधियों की जानकारी दी थी। इसमें उन्होंने सीटीवीएस के दो, कार्डियोलॉजी के तीन और जेनरल सर्जरी व न्यूरो सर्जरी विभाग के एक-एक फैकल्टी के शामिल होने की बात कही थी। इसके अलावा उन्होंने छह अन्य कर्मचारियों की भी एक लिस्ट प्रशासन को सौंपी थी। जिनका साल भर बाद तबादला कर दिया गया था। इस मामले में अस्पताल प्रशासन से बात करने की कोशिश की गई, लेकिन प्रतिक्रिया नहीं मिल पाई।
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घिरे जीबी पंत के डॉक्टर
- स्वास्थ्य विभाग ने कई डॉक्टरों पर कार्रवाई करने का लिया फैसला
- पिछले वर्ष मंत्री इमरान हुसैन की शिकायत पर सीएम ने दिए थे जांच के आदेश
- जांच में अपोडी कार्ड मैनुअल तरीके से बनाते हुए पाया गया, रिकॉर्ड भी मेंटेन नहीं मिला
- सीटीवीएस विभाग के अध्यक्ष ने साल भर पहले अस्पताल को ऐसी गतिविधियों की जानकारी दी थी
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली सरकार के सबसे बड़े सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल जीबी पंत के डॉक्टरों पर रिश्वत लेकर इलाज करने के आरोप लगे हैं। मामला थोड़ा पुराना है, लेकिन सरकार ने अब इस मामले को गंभीरता से लेते हुए डॉक्टरों के खिलाफ कार्रवाई करने का मन बना लिया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, दिल्ली स्वास्थ्य विभाग ने स्वास्थ्य सेवाओं के महानिदेशक को कार्रवाई के लिए निर्देश भी जारी कर दिया है। साथ ही पत्र में लिखा है कि पिछले वर्ष दिल्ली के मंत्री इमरान हुसैन ने सीएम केजरीवाल से इसकी शिकायत की थी। इस पर केजरीवाल ने वरिष्ठ डॉक्टरों की टीम गठित कर जांच के आदेश दिए थे। इसी जांच में जीबी पंत अस्पताल की कई खामियां भी उजागर हुई हैं। आमतौर पर किसी भी मरीज को यहां ओपन हार्ट सर्जरी कराने के लिए तीन से चार माह की वेटिंग दी जा रही है, लेकिन कुछ मरीजों का दूसरे ओपीडी कार्ड पर अस्पताल में ऑपरेशन भी कर दिया गया। हालांकि जिन लोगों ने ऑपरेशन कराया, उन्होंने रिश्वत देने की बात से इंकार किया, लेकिन जांच टीम ने महज 10 दिन के अंतर से उनके ऑपरेशन करने के पीछे डॉक्टरों से वजह पूछी तो मामला उजागर हुआ।
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मंत्री इमरान हुसैन ने शिकायत में कहा था कि असलम नाम के एक मरीज को बाईपास ऑपरेशन के लिए जीबी पंत अस्पताल उन्होंने भेजा था। तब डॉक्टरों ने मना कर दिया, लेकिन बाद में उसी मरीज ने एक दलाल को सवा लाख रुपये देकर तत्काल ऑपरेशन करवा लिया। इसके बाद वह वार्ड नंबर 22 के बेड नंबर दस पर भर्ती भी रहा। यह शिकायत मुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग को भेजी जहां से यह विजिलेंस विभाग को भेजी गई। जांच के दौरान पता चला कि अस्पताल में ओपीडी कार्ड मैनुअल तरीके से बनाए जा रहे थे, जिसका रिकॉर्ड मेंटेन नहीं किया गया था। असलम के मामले में पाया गया कि जिस ओपीडी नंबर 75210 पर उसकी 23 सितंबर को एंजियोग्राफी, 29 को पीएसी और चार अक्तूबर को बाईपास किया गया, वह किसी फातिमा के नाम पर दर्ज था।
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बताया जा रहा है कि जांच में सीटीवीएस विभाग के अध्यक्ष डॉ. प्रो. गिलानी ने बताया कि उन्होंने करीब साल भर पहले अस्पताल प्रशासन को ऐसी गतिविधियों की जानकारी दी थी। इसमें उन्होंने सीटीवीएस के दो, कार्डियोलॉजी के तीन और जेनरल सर्जरी व न्यूरो सर्जरी विभाग के एक-एक फैकल्टी के शामिल होने की बात कही थी। इसके अलावा उन्होंने छह अन्य कर्मचारियों की भी एक लिस्ट प्रशासन को सौंपी थी। जिनका साल भर बाद तबादला कर दिया गया था। इस मामले में अस्पताल प्रशासन से बात करने की कोशिश की गई, लेकिन प्रतिक्रिया नहीं मिल पाई।